Wp/mag/चतरा जिला
| चतरा मण्डल चतरा जिला | |
|---|---|
| झारखण्डके मण्डल | |
झारखण्डमे चतरा मण्डलके स्थिति | |
| देश | |
| राज्य | |
| प्रमण्डल | छोटानागपुर प्रमण्डल |
| स्थापना | २९ मई १९९१ |
| मुख्यालय | चतरा, झारखण्ड |
| सरकार | |
| • जिलाध्यक्ष | अबु इरमान, भा प्र से |
| • लोकसभा निर्वाचनक्षेत्र | चतरा (पलामू आउ लातेहार मण्डल सङ्गे साझा) |
| • सांसद् | सुनील कुमार सिंह (भाजपा) |
| • बिधानसभा निर्वाचनक्षेत्र | 2 |
| क्षेत्रफल | |
| • कुल | 3,718 किमी2 (1,436 वर्ग मील) |
| जनसङ्ख्या (२०११) | |
| • कुल | १०४२८८६ |
| • नगरी | ०५.३१ |
| जनसाङ्ख्यिकी | |
| • साक्षरता | ६०.१८% |
| • लिङ्गानुपात | 951 |
| समयमण्डल | युटिसि+०५:३० (भा मा स) |
| वाहन पञ्जीकरण | JH 13 |
| मुख्य राजमार्ग | रा रा २२, रा रा ५२२ |
| जालस्थल | http://chatra.nic.in/ |
चतरा मण्डल (चतरा जिला) भारतके झारखण्ड राज्जके एगो मण्डल हे । एकर मुख्यालय चतरा हे । झारखण्डके उत्तरी छोटानागपुर प्रमण्डलके प्रवेश द्वार कहल जायेवाला चतरा मण्डलके स्थापना २९ मई १९९१ ईo मे होलै हल ।[1]I चतरा मण्डलके स्थापना हजारीबागसे विभाजित करके कैल गेलै हल । राँची, हजारीबाग, पलामू आउ लातेहारके सीमा ई मण्डलसे लगहै । चतरा मण्डलमे २ पर्यटन स्थल मा भद्रकाली मन्दिर आउ माँ कौलेश्वरी पर्वत है । मण्डलमे दु अनुमण्डल सिमरिया आउ चतरा है । मण्डलमे १२ प्रखण्ड क्रमशः चतरा, सिमरिया, टण्डवा, पत्थलगड़ा, कुन्दा, प्रतापपुर, हण्टरगङ्ज, कान्हाचट्टी, इटखोरी, मयूरहण्ड, लावालौङ्ग, गिधौर प्रखण्ड शामिल है । १५४ पञ्चायत आउ १४७४ गाँव है । मण्डलसे एनएच ९९ आउ एनएच १०० गुजर है । मण्डलमे दु विधानसभा चतरा आउ सिमरिया है । चतरा झारखण्डके सबसे छोट संसदीय क्षेत्र है । चतरा लोकसभामे ५ विधानसभा आवहै, जेकरामे चतरा, सिमरिया, पाँकी, लातेहार, मनिका विधानसभा शामिल है । मण्डलके साक्षरता दर ६०.१६% है, जेकरामे पुरुष साक्षरता दर ६९.९२ आउ महिला साक्षरता दर ४९.९२ है ।
इतिहास
[edit | edit source]प्राचीन काल
[edit | edit source]पुरान समयमे आजके जिला आउ आसपासके इलाका पर ढेर राज्यके राज हलै जेकरा मिलाके अतविक (जङ्गल) राज्य कहल जा हलै । ई सब राज्य अशोकके राज (लगभग २३२ ई पू) मे मौर्य साम्राज्यके राजमे आ गेलै । समुद्रगुप्त आजके छोटानागपुर इलाकासे गुजरित महानदी घाटीमे दक्षिण कोसल राज्य पर पहिला हमला केलन ।[2]
मध्यकाल
[edit | edit source]मुहम्मद बिन तुगलकके राजमे जे इलाकामे आजके जिला है, ऊ दिल्ली सल्तनतके सम्पर्कमे ऐलै । बादमे ई मुगल साम्राज्यके बिहार सूबाके भाग बन गेलै । औरङ्गजेबके राजमे बिहारके मुगल सूबेदार दाउद खान ५ मई १६६० के पोखरी किला भिजुन कोठी पर बिन कौनो खास विरोधके कब्जा कर लेलकै आउ फिर ऊ कुण्डा किला दने बढ़ गेलै जेकर किलेबन्दी बड़ी मजबूत हलै काहेकि ऊ एगो पहाड़ीके चोटी पर हलै । आखिरकार ई किला पर ओकर कब्जा हो गेलै आऊ २ जून १६६० के एकर पूरा तरहसे नष्ट कर देल गेलै । बादमे कुण्डा किला रामगढ़के राजाके कब्जामे आ गेलै । १७३४ मे अलीवर्दी खान टेकारी (गया) के बागी जमीन्दारके हरावेके बाद कुण्डा दने बढ़लै । ऊ चतरा किला पर हमला केलकै आउ ओकरा तोड़ देलकै ।[2]
ब्रिटिश शासन
[edit | edit source]ब्रिटिश इस्ट इण्डिया कम्पनी १७६९ मे पहिला बेर ई क्षेत्र के सम्पर्कमे अइलै । राजा राममोहन राय १८०५–०६ खनि चतरामे सेरेस्टदारके रूपमे कार्य कैलन आउ अपन कार्यकाल खनि ऊ चतरा आउ रामगढ़ दुनही स्थान पर रहलन ।[2]
१८५७ के सङ्ग्राम खनि छोटानागपुरमे क्रान्तिकारी सब आउ अङ्ग्रेजके बीच लड़ल गेल सबसे महत्वपूर्ण युद्ध "चतराके युद्ध" हलै । ई निर्णायक युद्ध २ अक्टूबर १८५७ के फाँसी तालाब भिरु लड़ल गेलै हल । ई एक घण्टा तक चललै जेकरामे क्रान्तिकारीके पूरा प्रकारसे हरा देल गेलै । ५६ यूरोपीय सैनिक आऊ अधिकारी मरल जखनकि १५० क्रान्तिकारी मारल गेलन आउ ७७ के एगो गड्ढामे दफना देल गेलै । सूबेदार मङ्गल पाण्डे आउ नादिर अली खानके ४ अक्टूबर १७५७ के ठीक ओही स्थान पर मृत्युदण्ड सुनावल गेलै आउ फाँसी दे देल गेलै । यूरोपीय आउ सिख सैनिकके उनकर हथियार आउ गोला-बारूदके साथे एगो कुँइआमे दफना देल गेलै । एगो उत्कीर्ण पट्टिका जे अबहियो विद्यमान है, ऊ कहहै:
"२ अक्टूबर १८५७ के चतरामे रामगढ़ बटालियनके विद्रोहीके बिरुद्ध होएल लड़ाईमे महारानीके ५३मा फुट रेजिमेण्टके ५६ सैनिक आउ सिखके एगो दस्ता मारल गेलै । ई लड़ाईमे असाधारण वीरता देखावेके लेल ७०मा बङ्गाल नेटिव इन्फेण्ट्रीके लेफ्टिनेण्ट जे सि सि डाण्ट आउ ५३मा रेजिमेण्ट के सार्जेण्ट डि डायनान के 'विक्टोरिया क्रास' से सम्मानित कैल गेलै; ई लड़ाईमे विद्रोही पूरा प्रकारसे हार गेलन आउ ओखनी अपन चारो तोप आउ गोला-बारूद भूला देलन हल ।"
एकरो देखी
[edit | edit source]सन्दर्भ
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