Wp/mag/बोधगया
| बोधगया बुद्धगया | |
|---|---|
| नगर | |
| निर्देशाङ्क: 24°41′42″N 84°59′28″E / 24.695°N 84.991°Eनिर्देशाङ्क: 24°41′42″N 84°59′28″E / 24.695°N 84.991°E | |
| मण्डल | गया मण्डल |
| राज्य | बिहार |
| देश | |
| जनसङ्ख्या (२०११) | |
| • कुल | ३८,४३९ |
| भाषा | |
| • प्रचलित | मगही |
बोधगया बिहार राज्यके गया मण्डलमे स्थित एगो नगर हे, जेकर गहरा इतिहासिक आउ धार्मिक महत्व हे । हियाँ महात्मा बुद्धके बोधि वृक्षके तले ज्ञान प्राप्त होलहल । बोधगयामे प्रतिबरस प्रबुद्ध सोसाइटी द्बारा ज्ञान आउ सम्मान समारोह करल जाहे । बोधगया राष्ट्रिय राजमार्ग ८३ पर स्थित हे ।[1][2]
ई स्थान बौद्धधर्मला पवित्र मानल जा है आउ एहाँके महाबोधि मन्दिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक आउ पर्यटन स्थलके रूपमे पहचान प्राप्त कैलकै हे । ई स्थान बौद्धयात्राके महत्वपूर्ण भूमिका निभावहै ।[3] एहाँ २५०० वर्ष पहिले, युवा राजकुमार सिद्धार्थ गौतमके बोधि वृक्षके नीचे ज्ञान प्राप्त होलै हल, जेकरासे उनका बुद्ध कहल जाये लगलै ।
विवरण
[edit | edit source]बिहारके राजधानी पटनाके दक्षिणपूर्वमे लगभग १०१ किलोमीटर दूर स्थित बोधगया गयासे सटल एक छोट नगर है । बोधगयामे बोधि वृक्षके नीचे तपस्या करैत भगवान् गौतम बुद्धके ज्ञानके प्राप्ति होलै हल । तखनियेसे ई स्थल बौद्धधर्मके अनुयायीला अत्यन्त महत्वपूर्ण है । वर्ष २००२ मे युनेस्को द्वारा ई नगरके विश्व विरासत स्थल घोषित कैल गेलै ।
इतिहास
[edit | edit source]लगभग ५०० ई॰पू॰ मे गौतम बुद्ध फल्गु नदी तटे पहुँचलन आउ बोधि वृक्षके नीचे तपस्या करे बैठलन । तीन दिन आउ रातके तपस्याके बाद उनका ज्ञानके प्राप्ति होलै, जेकरा बादसे ऊ बुद्धके नामसे जानल गेलन । एकर बाद ऊ ओहाँ ७ सप्ताह अलग-अलग स्थान पर ध्यान करैत बितौलन आउ फिर सारनाथ जाके धर्मके प्रचार आरम्भ कैलन । बुद्धके अनुयायी बादमे ऊ जगह पर जाएल आरम्भ कैलन जन्ने बुद्ध वैशाख महीनामे पुर्णिमाके दिन ज्ञानके प्रप्ति कैलन हल । धीरे-धीरे ई जगह बोधगयाके नामसे जानल गेलै आउ ई दिन बुद्ध पुर्णिमाके नामसे जानल गेलै ।
महाबोधि मन्दिर
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बिहारमे एकरा मन्दिरके नगरके नामसे जानल जा है । ई गाँवके लोगके भाग्य ऊ दिन बदल गेलै जौन दिन एक राजकुमार सत्यके खोजला अपन राजसिहासनके ठुकरा देलन । बुद्धके ज्ञानके ई भूमि आज बौद्धके सबसे बड़ तीर्थस्थलके रूपमे प्रसिद्ध है । आज विश्वके हर धर्मके लोग एहाँ घूमे आवहथिन । पक्षीके चहचहाटके बीच बुद्धं-शरणं-गच्छामि के हल्का ध्वनि अनोखा शान्ति प्रदान करहै । एहाँके सबसे प्रसिद्ध मन्दिर महाबोधि मन्दिर है । विभिन्न धर्म एवं सम्प्रदायके व्यक्ति ई मन्दिरमे आध्यात्मिक शान्तिके खोजमे आवहथिन । ई मन्दिरके यूनेस्को २००२ मे विश्व धरोहर घोषित कैलकै हल । बुद्धके ज्ञान प्रप्तिके २५० वर्ष बाद राजा अशोक बोधगया गेलन । मानल जा है कि ऊ महाबोधि मन्दिरके निर्माण करौलन । कुछ इतिहासकारके मानना है कि पहिला शताब्दीमे ई मन्दिरके निर्माण करावल गेलै या ओकर मरम्मत करावल गेलै । भारतवर्षमे बौद्धधर्मके पतनके साथे-साथे ई मन्दिरके लोग भूला गेलन हल आउ ई मन्दिर धूरी आउ मट्टीमे दब गेलै हल । १९मा शताब्दीमे अलेक्जेण्डर कनिङ्घम ई मन्दिरके मरम्मत करौलक । १८८३ मे ऊ ई जगहके खुदाई कैलक आउ ढेर मरम्मतके बाद बोधगयाके अपन पुराना शानदार अवस्थामे लावल गेलै ।
सम्बन्धित लेख
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999
- ↑ "Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810
- ↑ "बिहार के बोधगया में पर्यटन उद्योग की है खास तैयारी". प्रभात खबर. 30 नवंबर 2023.
|date=में तिथि प्राचल का मान जाँची (सहायता)
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