Wp/mag/दुर्गा
| मैया दुर्गा | |
|---|---|
| जगत जननी सुरक्षा, शक्ति, ऊर्जा आउ नारी शक्तिके देवी, जगदम्बा, जगतमाता | |
| अन्यनाम | महिषासुर मर्दिनी, नवदुर्गा, देवी मैयो, शाकम्भरी, शक्ति, गौरी, नारायणी, ब्राह्मणी, वैष्णवी, वैष्णो देवी, कल्याणी, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री, आदि शक्ति, सती |
| देवनागरी | दुर्गा |
| सम्बन्ध | आदिशक्ति, नवदुर्गा, पार्वती, काली, सती, त्रिदेवी, महाकाली |
| निवासस्थान | मणिद्वीप |
| ग्रह | सब ग्रह |
| मन्त्र |
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| अस्त्र | त्रिशूल, चक्र, गदा, धनुष, शङ्ख, तलवार,कमल, तीर, अभयहस्त, परशु, रस्सी, पाश, भाला, ढाल, डमरू, खप्पर, अग्निकटोरी |
| युद्ध | महिषासुर वध, धूम्रलोचन वध, शुम्भ - निशुम्भ वध, दुर्गमासुर वध |
| प्रतीक | कुमारी कन्या आउ कलश |
| वर्ण | लाल, पीयर आउ केसरिया |
| जीवनसङ्गी | शिव |
| सवारी | शेर |
| त्योहार | नवरात्रि, दुर्गा पूजा, चैत्र नवरात्रि, श्रावणी नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि, दुर्गाष्टमी, महासप्तमी, महानवमी, कन्यापूजन आउ दशाएन |
दुर्गा वा आदिशक्ति हिन्दुके प्रमुख देवी मानल जाहथ जिनखा माता, नवदुर्गा, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, पार्वती , जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामोसे जानल जाहे ।[1][2] शाक्त सम्प्रदायके ऊ मुख्य देवी हथ । दुर्गाके आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बतावल गेलहे । ऊ अन्धकार आउ अज्ञानता रुपी राक्षससे रक्षा करेवाला, ममतामई, मोक्ष प्रदायनी तथा कल्याणकारी हथ । उनखर बारेमे मान्यता हे कि ऊ शान्ति, समृद्धि तथा धरम पर आघात करेवाला राक्षसी शक्तिके बिनाश करहथ ।[3]
दुर्गाके निरूपण सिंह पर सवार एक देवीके रूपमे कैल जा है । दुर्गा देवी आठ भुजासे युक्त हथिन जे सबमे कौनो न कौनो शस्त्रास्त्र होवऽ है । ऊ महिषासुर नामक असुरके वध कैलन (महिषासुर = महिष + असुर = भैँसा नियन असुर) । जे ज्योतिर्लिङ्गमे देवी दुर्गाके स्थापना रहऽ है ओकरा सिद्धपीठ कहल जा है । ओहाँ कैल गेल सब सङ्कल्प पूर्ण होवऽ है । माताके दुर्गा देवी नाम दुर्गम नामके महान दैत्यके वध करेके कारण पड़लै । माता शताक्षी स्वरूप धारण कैलन आउ ओकरा बाद शाकम्भरी देवीके नामसे विख्यात होएल शाकम्भरी देविए दुर्गमासुरके वध कैलन । जेकरा चलते ऊ समस्त ब्रह्माण्डमे दुर्गा देवीके नामोसे विख्यात हो गेलन । माताके देशमे अनेक मन्दिर है । कहुँ पर महिषासुरमर्दिनि शक्तिपीठ त कहुँ पर कामाख्या देवी । एही देवी कोलकातामे महाकालीके नामसे विख्यात आउ सहारनपुरके प्राचीन शक्तिपीठमे शाकम्भरी देवीके रूपमे एही पूजल जा हथिन ।
हिन्दुके शक्ति साम्प्रदायमे भगवती दुर्गेके दुनियाके पराशक्ति आउ सर्वोच्च देवता मानल जात है (शाक्त साम्प्रदाय ईश्वरके देवीके रूपमे मानऽ है) । वेदमे त दुर्गाके व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषदमे देवी "उमा हैमवती" (उमा, हिमालयके पुत्री) के वर्णन है । पुराणमे दुर्गाके आदिशक्ति मानल गेलै हे । दुर्गा असलमे शिवके पत्नी आदिशक्तिके एक रूप हथिन, शिवके ऊ पराशक्तिके प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्वके जननी आउ विकाररहित बतावल गेलै हे । एकाङ्की (केन्द्रित) होवहुँ पर ऊ माया शक्ति संयोगवश अनेक हो जा है । ऊ आदिए शक्ति देवी सरस्वती (ब्रह्माजीके पहिल पत्नी), लक्ष्मी आउ मुख्य रूपसे पार्वती (सती) के रूपमे जन्म लेलन आउ ऊ ब्रह्मा, विष्णु आउ महेशसे विवाह कैलन हल । तीन रूप होहुँके दुर्गा (आदि शक्ति) एके हथिन ।
देवी दुर्गाके स्वयं ढेर रूप है (सावित्री, लक्ष्मी एवं पार्वतीसे अलगे) । मुख्य रूप उनकर "गौरी" है, अर्थात् शान्तमय, सुन्दर आउ गोर रूप । उनकर सबसे भयानक रूप "काली" है, अर्थात् करिया रूप । विभिन्न रूपमे दुर्गा भारत आउ नेपालके ढेर मन्दिर आउ तीर्थस्थानमे पूजल जा हथिन । भगवती दुर्गाके सवारी शेर है ।
मार्कण्डेय पुराणमे ब्रहदेव मनुष्य जातिके रक्षाला एक परम गुप्त, परम उपयोगी आउ मनुष्यके कल्याणकारी देवी कवच एवं देवी सुक्त बतौलन हे आउ कहलन हे कि जे मनुष्य ई सब उपायके करतै, ऊ ई संसारमे सुख भोगके अन्त समयमे बैकुण्ठ जैतै । ब्रहदेव कहलन कि जे मनुष्य दुर्गा सप्तशतीके पाठ करतै ओकरा सुख मिलतै । भगवत पुराणके अनुसार माँ जगदम्बाके अवतरण श्रेष्ठ पुरुषके रक्षाला होलै हे । जबकि श्रीं मद देवीभागवतके अनुसार वेद आउ पुराणके रक्षाके आउ दुष्टके दलनला माँ जगदम्बाके अवतरण होलै हे । एही प्रकार ऋग्वेदके अनुसार माँ दुर्गे आदि-शक्ति हथिन, उनकेसे साब विश्वके सञ्चालन होवऽ है आउ उनका इलावा आउ कौनो अविनाशी न है । एहीसे नवरात्रि घड़ी नवदुर्गाके नौ रूपके ध्यान, उपासना आउ आराधना कैल जा है आउ नवरात्रिके प्रत्येक दिन माँ दुर्गाके एक-एक शक्ति रूपके पूजन कैल जा है । जय अम्बे गौरी आरती माँ दुर्गाके सबसे प्रसिद्ध आरतीमे से एक है ।[4] माँ अम्बेके ई प्रसिद्ध आरती माँ दुर्गाजीसे जुड़ल जादेतर मौका पर पढ़ल जा है ।
दुर्गाके १०८ नाम
[edit | edit source]दुर्गा सप्तशतीके अनुसार इनकर १०८ नाम बतावल गेलै हे ।[5][6]
- 1. सती : अग्निमे जरोके जीवित होवे वाली
- 2. साध्वी : आशावादी
- 3. भवप्रीता : भगवान् शिव पर प्रीति रखे वाली
- 4. भवानी : ब्रह्माण्डके निवास
- 5. भवमोचनी : संसार बन्धनसे मुक्त करे वाली
- 6. आर्या : देवी
- 7. दुर्गा : देवी
- 8. जया : विजयी
- 9. आद्या : शुरूआतके वास्तविकता
- 10. त्रिनेत्र : तीन आँख वाली
- 11. शूलधारिणी : शूल धारण करे वाली
- 12. पिनाकधारिणी करे वाली
- 13. चित्रा : सुरम्य, सुन्दर
- 14. चन्द्रघण्टा : प्रचण्ड स्वरसे घण्टा नाद करे वाली, घण्टाके आवाज निकाले वाली
- 15. महातपा : भारी तपस्या करे वाली
- 16. मन : मनन- शक्ति
- 17. बुद्धि : सर्वज्ञाता
- 18. अहङ्कारा : अभिमान करे वाली
- 19. चित्तरूपा : ऊ जे सोचके अवस्थामे हथिन
- 20. चिता : मृत्युशय्या
- 21. चिति : चेतना
- 22. सर्वमन्त्रमयी : सब मन्त्रके ज्ञान रखे वाली
- 23. सत्ता : सत्-स्वरूपा, जे सबसे ऊपरे है
- 24. सत्यानन्दस्वरूपिणी : अनन्त आनन्दके रूप
- 25. अनन्ता : जिनकर स्वरूपके कहुँ अन्त न
- 26. भाविनी : सबके उत्पन्न करे वाली, सुन्दर नारी
- 27. भाव्या : भावना एवं ध्यान करे योग्य
- 28. भव्या : कल्याणरूपा, भव्यताके साथ
- 29. अभव्या : जेकरासे बढ़के भव्य कुछ न
- 30. सदागति : हमेशा गतिमे, मोक्ष दान
- 31. शाम्भवी : शिवप्रिया, शम्भूके पत्नी
- 32. देवमाता : देवगणके माता
- 33. चिन्ता : चिन्ता
- 34. रत्नप्रिया : गहनासे प्रेम
- 35. सर्वविद्या : ज्ञानके निवास
- 36. दक्षकन्या : दक्षके बेटी
- 37. दक्षयज्ञविनाशिनी : दक्षके यज्ञके रोके वाली
- 38. अपर्णा : तपस्याके समय पत्तोके न खाए वाली
- 39. अनेकवर्णा : अनेक रङ्ग वाली
- 40. पाटला : लाल रङ्ग वाली
- 41. पाटलावती : गुलाबके फूल या लाल परिधान या फूल धारण करे वाली
- 42. पट्टाम्बरपरीधाना : रेशमी वस्त्र पहने वाली
- 43. कलामञ्जीरारञ्जिनी : पायलके धारण करके प्रसन्न रहे वाली
- 44. अमेय : जेकर कौनो सीमा न
- 45. विक्रमा : असीम पराक्रमी
- 46. क्रूरा : दैत्यके प्रति कठोर
- 47. सुन्दरी : सुन्दर रूप वाली
- 48. सुरसुन्दरी : अत्यन्त सुन्दर
- 49. वनदुर्गा : जङ्गलके देवी, बनशङ्करी अथवा शाकम्भरी
- 50. मातङ्गी : मतङ्गाके देवी
- 51. मातंगमुनिपूजिता : बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय
- 52. ब्राह्मी : भगवान् ब्रह्माके शक्ति
- 53. माहेश्वरी : प्रभु शिवके शक्ति
- 54. इन्द्री : इन्द्रके शक्ति
- 55. कौमारी : किशोरी
- 56. वैष्णवी : अजेय
- 57. चामुण्डा : चण्ड आउ मुण्डके नाश करे वाली
- 58. वाराही : वराह पर सवार होवे वाली
- 59. लक्ष्मी : सौभाग्यके देवी
- 60. पुरुषाकृति : ऊ जे पुरुष धारण कर ले
- 61. विमिलौत्त्कार्शिनी : आनन्द प्रदान करे वाली
- 62. ज्ञाना : ज्ञानसे भरल
- 63. क्रिया : हर कार्यमे होवे वाली
- 64. नित्या : अनन्त
- 65. बुद्धिदा : ज्ञान देवे वाली
- 66. बहुला : विभिन्न रूप वाली
- 67. बहुलप्रेमा : सर्व प्रिय
- 68. सर्ववाहनवाहना : सब वाहन पर विराजमान होवे वाली
- 69. निशुम्भशुम्भहननी : शुम्भ, निशुम्भके वध करे वाली
- 70. महिषासुरमर्दिनि : महिषासुरके वध करे वाली
- 71. मधुकैटभहन्त्री : मधु आउ कैटभके नाश करे वाली
- 72. चण्डमुण्ड विनाशिनि : चण्ड आउ मुण्डके नाश करे वाली
- 73. सर्वासुरविनाशा : सब राक्षसके नाश करे वाली
- 74. सर्वदानवघातिनी : संहारला शक्ति रखे वाली
- 75. सर्वशास्त्रमयी : सब सिद्धान्तमे निपुण
- 76. सत्या : सच्चाई
- 77. सर्वास्त्रधारिणी : सब हथियारके धारण करे वाली
- 78. अनेकशस्त्रहस्ता : हाथमे ढेर हथियार धारण करे वाली
- 79. अनेकास्त्रधारिणी : अनेक हथियारके धारण करे वाली
- 80. कुमारी : सुन्दर किशोरी
- 81. एककन्या : कन्या
- 82. कैशोरी : जवान लैकी
- 83. युवती : नारी
- 84. यति : तपस्वी
- 85. अप्रौढा : जे कहियो पुरान न होवे
- 86. प्रौढा : जे पुरान है
- 87. वृद्धमाता : शिथिल
- 88. बलप्रदा : शक्ति देवे वाली
- 89. महोदरी : ब्रह्माण्डके सम्भारे वाली
- 90. मुक्तकेशी : खुलल केश वाली
- 91. घोररूपा : एक भयङ्कर दृष्टिकोण वाली
- 92. महाबला : अपार शक्ति वाली
- 93. अग्निज्वाला : मार्मिक आग नियन
- 94. रौद्रमुखी : विध्वंसक रुद्र नियन भयङ्कर चेहरा
- 95. कालरात्रि : करिया रङ्ग वाली
- 96. तपस्विनी : तपस्यामे लगल
- 97. नारायणी : भगवान् नारायणके विनाशकारी रूप
- 98. भद्रकाली : कालीके भयङ्कर रूप
- 99. विष्णुमाया : भगवान् विष्णुके माया
- 100. जलोदरी : ब्रह्माण्डमे निवास करे वाली
- 101. शिवदूती : भगवान् शिवके राजदूत
- 102. करली : हिंसक
- 103. अनन्ता : विनाश रहित
- 104. परमेश्वरी : प्रथम देवी
- 105. कात्यायनी : ऋषि कात्यायन द्वारा पूजनीय
- 106. सावित्री : सूर्यके बेटी
- 107. प्रत्यक्षा : वास्तविक
- 108. ब्रह्मवादिनी : वर्तमानमे हर जगह वास करे वाली
सती दुर्गाजी एक नाम है । दक्ष अपन यज्ञमे सब देवताके आमन्त्रित कैलक, किन्तु शिव आउ सतीके आमन्त्रण न देलक । एकरासे क्रुद्ध होके, अपमानके प्रतिकार करेला ई उग्रचण्डीके रूपमे अपन पिताके यज्ञके विध्वंस कैलन हल । इनकर हाथके सङ्ख्या १८ मानल जा है । आश्विन महीनामे कृष्णपक्षके नवमी दिन शाक्तमतावलम्बी विशेष रूपसे उग्रचण्डीके पूजा कैल जा है ।
स्तुति
[edit | edit source]श्री दुर्गा सप्तशतीमे शास्त्रोंक्त स्तुतिके कुछ श्लोक जे प्रचलित आउ प्रसिद्ध है यथा निम्नलिखित है -
| “ |
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभेतेषु चेतनेत्यभिधीयते । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ यादेवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥[7] |
” |
—दुर्गा सप्तशती | ||
इहो देखी
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ David R. Kinsley 1989, pp. 3-4.
- ↑ "9 days, 9 avatars: Be ferocious like Goddess Kaalratri". मूल से 15 जून 2017 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 सितम्बर 2017.
- ↑ Paul Reid-Bowen २०१२, pp. २१२-२१३ ।
- ↑
Archived 2022-09-12 at the वेबैक मशीन - ↑ "मां दुर्गा के 108 नाम, इसके साथ जानें हर रूप का अर्थ".
- ↑ "नवरात्रि में करते हैं मां दुर्गा के 108 नामों का जाप, जानें क्या है नियम?". प्रभात खबर.
- ↑ के, नवीना सि. Paratatva Stuti: A COLLECTION OF HINDU MANTRAS, STOTRAS AND KEERTANS (अङ्ग्रेजी मे). नवीना सि के.Wp/mag/सीएस१ रखरखाव: नामालूम भाषा (link)