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Wp/mag/शैव

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बड्डी शिव-मन्दिरमे शिवके योगमुद्रामे दर्शावल जाहे ।

भगवान् शिव आउ उनखर अवतारके मानेवाला आउ शिवजीके आराधना करेवाला लोगके शैव कहहथ ।[1]शैवमे शाक्त, नाथ, दशनामी, नाग आदि उपसम्प्रदाय हथ । एहु सम्प्रदाय‌ है जे भगवान् शिवके आराधना अलगे अलगे माध्यमसे करऽ है (१) शैव (२) पाशुपत । पाशुपत सम्प्रदाय तन्त्र पर जोर दे है । किन्तु पाशुपत सम्प्रदायके सात्विक विधा जे कि वेद, पुराण आउ उपनिषदोंमे बतावल गेलै हे, ऊ सब पूजा पद्धतिके जादे पालन करेके चाही आउ ओकरा जीवनमे जादे अपनावेके चाही काहेकि भगवान् शिव त एक विल्व पत्रके अर्पण करहीँसे प्रसन्न हो जा हथिन । भगवान् शिवके उल्लेख आउ वन्दना वेदमे क्रममे सबसे पहिले आवे वाला मने ऋग्वेदमे श्री रुद्रके सम्बोधनके रूपमे मिलऽ है ।[2] १२ रुद्रमे प्रमुख रुद्रे आगे चलके शिव, शङ्कर, भोलेनाथ आउ महादेव कहलैलन ।

इहो देखी

सन्दर्भ

  1. ↑ S Parmeshwaranand 2004, pp. 19–20, 272–275.
  2. ↑ extbooks from India, Volume 1. National Council of Educational Research and Training. 2002. p. 199. "The origin of Saivism may be traced to the conception of Rudra in the RigVeda"