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Wp/mag/शिव

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शिव
शान्ति, बिनाश, समय, योग, ध्यान, नृत्य, प्रलय आउ वैराग्यके देवता, सृष्टिके संहारकर्ता आउ जगतपिता परब्रह्म
भगवान् शिव
अन्यनामनीलकण्ठ, महादेव, महाकाल, शङ्कर, महेश्वर, पशुपतिनाथ, नटराज, भोलेनाथ, बैद्यनाथ, रुद्र, भैरव
सम्बन्धहिन्दु देवता, परब्रह्म, परमात्मा, परमेश्वर
निवासस्थानकैलास पर्बत
मन्त्रॐ नमः शिवाय
ॐ नमो भगवते रूद्राय
महामृत्युञ्जय मन्त्र
अस्त्रत्रिशूल
पिनाक धनुष
परशु
पशुपतास्त्र
जीवनसङ्गीपार्वती (सतीके पुनर्जनम) आउ सती
भाई-बहिनसरस्वती (छोट बहिन)
सन्तानकार्तिकेय, गणेश, अशोकसुन्दरी, अय्यपा, मनसा देवी आउ ज्योति
सवारीनन्दी

शङ्कर वा महादेव सनातनधर्ममे सबसे महत्वपूर्ण देवतामे से एक हथ ।[1] ऊ त्रिदेवमे एक देव हथ । इनखा देवसबके देव महादेवो कहल जाहे । इनखा भोलेनाथ, शङ्कर, महेश, भिलपती, भिलेश्वर,रुद्र, नीलकण्ठ, गङ्गाधार आदि नामोसे जानल जाहे । तन्त्र साधनामे इनखा भैरवके नामोसे जानल जाहे ।[2] हिन्दु शिवधर्मके प्रमुख देवतामे से हथ । वेदमे इनखर नाम रुद्र हे । ई व्यक्तिके चेतनाके अन्तर्यामी हथ । इनखर अर्धाङ्गिनी (शक्ति) के नाम पार्वती हे । इनखर पुत्र कार्तिकेय, अय्यपा आउ गणेश हथ, एवं पुत्रि अशोक सुन्दरी, ज्योति आउ मनसा देवी हथ । शिव अधिक्तर चित्रमे जोगीके रूपमे लौक हथ आउ उनखर पूजा शिवलिङ्ग तथा मूर्ति दोनो रूपमे कैल जाहे । शिवजीके गलामे नाग देवता बिराजित हथ आउ हाथमे डमरू आउ त्रिशूल लेले हथ । कैलाशमे उनखर वास हे । ई शैवमतके आधार हे । ई मतमे शिवके साथ शक्ति सर्वरूपमे पूजित हथ ।[3] [4][5][6]

शिवजी के संहारके देवता कहल जा है । शङ्करजी सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दुनहो ला विख्यात हथिन । इनका अन्य देवसे बढ़के मानल जाएके कारण महादेव कहल जा है । सृष्टिके उत्पत्ति, स्थिति एवं संहारके अधिपति शिव हथिन । त्रिदेवमे भगवान् शिव संहारके देवता मानल गेलन हे । शिव अनादि एवं सृष्टि प्रक्रियाके आदि स्रोत हथिन आउ ई काल महाकाले ज्योतिषशास्त्रके आधार है । शिवके अर्थ यद्यपि कल्याणकारी मानल गेलै हे, किन्तु ऊ हमेशा लय एवं प्रलय दुनोके अपन अधीन कैले हथिन । राम, रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनकर भक्त होलथिन हे । शिव सबके समान दृष्टिसे देखहथिन एहीसे उनका महादेव कहल जा है । शिवके कुछ प्रचलित नाम, महाकाल, आदिदेव, किरात, शङ्कर, चन्द्रशेखर, जटाधारी, नागनाथ, मृत्युञ्जय (मृत्यु पर विजयी), त्रयम्बक, महेश, विश्वेश, महारुद्र, विषधर, नीलकण्ठ, महाशिव, उमापति (पार्वतीके पति), कालभैरव, भूतनाथ, त्रिलोचन (तीन नयन वाला), शशिभूषण आदि । भगवान् शिवके रूद्र नामसे जानल जा है । रुद्रके अर्थ है रुत् दूर करे वाला अर्थात दुखके हरे वाला अतः भगवान् शिवके स्वरूप कल्याण कारक है । रुद्राष्टाध्यायीके पचमा अध्यायमे भगवान् शिवके अनेक रूप वर्णित है रूद्र देवताके स्थावर जंगम सर्व पदार्थ रूप, सर्वजाति मनुष्य देव पशु वनस्पति रूप मानके सर्व अन्तर्यामी भाव एवं सर्वोत्तम भाव सिद्ध कैल गेलै हे । ई भावके ज्ञाता होके साधक अद्वैतनिष्ठ बनहै ।[7]

शिवजी

रामायणमे भगवान रामके कथन अनुसार शिव आउ राममे अन्तर जाने वाला कबहुँ भगवान् शिवके या भगवान् रामके प्रिय न हो सकै । शुक्ल यजुर्वेद संहिताके अन्तर्गत रुद्र अष्टाध्यायीके अनुसार सूर्य, इन्द्र, विराट पुरुष, हरियाएल वृक्ष, अन्न, जल, वायु एवं मनुष्यके कल्याणके सबला भगवान् शिवेके स्वरूप है । भगवान् सूर्यके रूपमे ऊ शिव भगवान् मनुष्यके कर्मके भली-भाँति निरीक्षण करके उनका ओइसने फल दे हथिन । आशय ई है कि सम्पूर्ण सृष्टि शिवमय है । मनुष्य अपन-अपन कर्मानुसार फल पावहै अर्थात् स्वस्थ बुद्धि वालाके वृष्टि रूपी जल, अन्न, धन, आरोग्य, सुख आदि भगवान् शिव प्रदान करहथिन आउ दुर्बुद्धि वालाला व्याधि, दुख एवं मृत्यु आदिके विधानो शिवजी करहथिन ।

शिव स्वरूप

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शिव प्रतिमा
उत्तरप्रदेशके गोला गोकर्णनाथमे शिव प्रतिमा

शिव स्वरूप सूर्य

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जौन प्रकार ई ब्रह्माण्डके न कोई अन्त है, न कोई छोर आउ नहिए कोई शूरुआत, ओही प्रकार शिव अनादि हथिन । सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड शिवके भीतरे समाएल है । जखनी कुछो न हलै तखनिओ शिव हलन । जखनी कुछो न होतै तखनिओ शिवे होथिन । शिवके महाकाल कहल जा है, अर्थात् समय । शिव अपन ई स्वरूप द्वारा पूर्ण सृष्टिके भरण-पोषण करहथिन । एही स्वरूप द्वारा परमात्मा अपन ओज आउ उष्णताके शक्तिसे सब ग्रहके एकत्रित करके रखलन हे । परमात्माके ई स्वरूप अत्यन्ते कल्याणकारी मानल जा है काहेकि पूर्ण सृष्टिके आधार एही स्वरूप पर टिकल है । पवित्र श्रीदेवी भागवत् महापुराणमे भगवान् शङ्करके तमोगुण बतावल गेलै हे । एकर प्रमाण श्रीदेवी भागवत् महापुराण अध्याय ५, स्कन्द ३, पृष्ठ १२१ मे देल गेलै हे ।

शिव पुराण

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पवित्र शिवपुराण एक लेखके अनुसार कैलाशपति शिवजी देवी आदिशक्ति आउ सदाशिवसे कहलन हे कि हे मात! ब्रह्मा तोहर सन्तान हे आउ विष्णुके उत्पतियो अपनही से होलै हे त उनकय बादो उत्पन्न होवे वाला अपनेके सन्तान होलन ।

ब्रह्मा आउ विष्णु सदाशिवके आधा अवतार हथिन, किन्तु कैलाशपति शिव "सदाशिव" के पूर्ण अवतार हथिन । जैसन कृष्ण विष्णुके पूर्ण अवतार हथिन ओही प्रकार कैलाशपति शिव "ओमकार सदाशिव" के पूर्ण अवतार हथिन । सदाशिव आउ शिव दिखेमे, वेषभूषा आउ गुणमे एकदम समान हथिन । एही प्रकार देवी सरस्वती, लक्ष्मी आउ पार्वती (दुर्गा) आदिशक्तिके अवतार हथिन ।

शिव पुराणके लेखके अनुसार सदाशिव जी कहलन हे कि जे हमरामे आउ कैलाशपति शिवमे भेद करतै या हमनी दुनोके अलगे मानतै ऊ नर्कमे गिरतै । या फिर शिव आउ विष्णुमे जे भेद करतै ऊ नर्कमे गिरतै । वास्तवमे हमरामे, ब्रह्मा, विष्णु आउ कैलाशपति शिव कौनो भेद न, हमनी एके हियै । किन्तु सृष्टिके कार्यला हमनी अलगे अलगे रूप ले हियै ।

शिव स्वरूप शङ्कर जी

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पृथ्वी पर बीतल इतिहासमे सतयुगसे कलयुग तक, एके मानव शरीर ऐसन है जेकर ललाट पर ज्योति है । एही स्वरूप द्वारा जीवन व्यतीत कर परमात्मा मानवके वेदके ज्ञान प्रदान कैलकै हे जे मानवला अत्यन्ते कल्याणकारी साबित होलै हे । वेदो शिवम शिवो वेदम ।। परमात्मा शिवके एही स्वरूप द्वारा मानव शरीरके रुद्रसे शिव बनेके ज्ञान प्राप्त होवहै ।

शिवलिङ्ग

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शिवके नन्दीगण

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  1. नन्दी
  2. भृङ्गी
  3. रिटी
  4. टुण्डी
  5. शृङ्गी
  6. नन्दिकेश्वर
  7. बेताल
  8. पिशाच
  9. तोतला
  10. भूतनाथ

शिवके अष्टमूर्ति

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  1. पृथ्वीमूर्ति - शर्व
  2. जलमूर्ति - भव
  3. तेजमूर्ति - रूद्र
  4. वायुमूर्ति - उग्र
  5. आकाशमूर्ति - भीम
  6. अग्निमूर्ति - पशुपति
  7. सूर्यमूर्ति - ईशान
  8. चन्द्रमूर्ति - महादेव

व्यक्तित्व

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शिवमे परस्पर विरोधी भावके सामञ्जस्य देखेला मिलहै । शिवके मस्तक पर एक दन्ने चन्द्र है, त दोसर दन्ने महाविषधर सर्पो उनकर गलाके हार है । ऊ अर्धनारीश्वर होइतहुँ कामजित हथिन । गृहस्थ होइतहुँ श्मशानवासी, वीतरागी हथिन । सौम्य, आशुतोष होइतहुँ भयंकर रुद्र हथिन । शिव परिवारो एकरासे अछूत न है । उनकर परिवारमे भूत-प्रेत, नन्दी, सिंह, सर्प, मयूर आउ मूषक सबके समभाव देखेला मिलहै । ऊ स्वयं द्वन्द्वसे रहित सह-अस्तित्वके महान् विचारके परिचायक हथिन । ऐसन महाकाल शिवके आराधनाके महापर्व है शिवरात्रि[8]

पूजन

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शिवरात्रिके पूजा रात्रिके चारो प्रहरमे करेके चाही ।[9] शिवके बिल्वपत्र, पुष्प, चन्दनके स्नान प्रिय है । इनकर पूजाला दूध, दही, घी, चीनी, शहद ई पाँच अमृत जेकरा पञ्चामृत कहल जा है, से कैल जा है । शिवके त्रिशूल आउ डमरूके ध्वनि मङ्गल, गुरुसे सम्बन्धित है । चन्द्रमा उनकर मस्तक पर विराजमान होके अपन कान्तिसे अनन्ताकाशमे जटाधारी महामृत्युञ्जयके प्रसन्न रखहै त बुधादि ग्रह समभावमे सहायक बनहै । महामृत्युञ्जय मन्त्र शिव आराधनाके महामन्त्र है । सावन सोमवार व्रतके बड़ी फलदायी बतावल जा है । ऐसन मान्यता है कि ई व्रतके करेसे भक्तके सब इच्छाके पूर्ति हो जा है ।[10] महाशिवरात्रिके व्रत अपन मनोकामना पूर्तिला करहथिन ।

ज्योतिर्लिङ्ग स्थान
पशुपतिनाथनेपालके राजधानी काठमाण्डु
सोमनाथसोमनाथ मन्दिर, सौराष्ट्र क्षेत्र, गुजरात
महाकालेश्वरश्री महाकाल, महाकालेश्वर, उज्जयिनी (उज्जैन)
ॐकारेश्वरॐकारेश्वर अथवा ममलेश्वर, ॐकारेश्वर
केदारनाथकेदारनाथ मन्दिर, रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड
भीमाशङ्करभीमाशङ्कर मन्दिर, निकट पुणे, महाराष्ट्र
विश्वनाथकाशी विश्वनाथ मन्दिर, वाराणसी, उत्तरप्रदेश
त्र्यम्बकेश्वर मन्दिरत्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग मन्दिर, नासिक, महाराष्ट्र
रामेश्वरमरामेश्वरम मन्दिर, रामनाथपुरम, तमिल्नाडु
घृष्णेश्वरघृष्णेश्वर मन्दिर, वेरुल, औरङ्गाबाद, महाराष्ट्र
बैद्यनाथदेवघर झारखण्ड
नागेश्वरऔण्ढा नागनाथ महाराष्ट्र नागेश्वर मन्दिर, द्वारका, गुजरात
श्रीशैलश्रीमल्लिकार्जुन, श्रीशैलम (श्री सैलम), आन्ध्रप्रदेश

अनेक नाम

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हिन्दुधर्ममे भगवान् शिवके अनेक नामसे बोलावल जा है

  • रूद्र - रूद्रसे अभिप्राय जे दुखके निर्माण आउ नाश करहे ।
  • पशुपतिनाथ - भगवान् शिवके पशुपति एहीला कहल जा है काहेकि ऊ पशु पक्षि आउ जीवआत्माके स्वामी हथिन
  • अर्धनारीश्वर - शिव आउ शक्तिके मिलनसे अर्धनारीश्वर नाम प्रचलित होलै ।
  • महादेव - महादेवके अर्थ है महान् ईश्वरीय शक्ति ।
  • भोलेनाथ - भोलेनाथके अर्थ है कोमल हृदय, दयालु आउ आसानीसे माफ करे वालामे अग्रणी । ई विश्वास कैल जा है कि भगवान् शङ्कर आसानीसे कौनो पर प्रसन्न हो जा हथिन ।
  • लिङ्गम् - पूरा ब्रह्माण्डके प्रतीक है ।
  • नटराज - नटराजके नृत्यके देवता मानहथिन काहेकि भगवान् शिव ताण्डव नृत्यके प्रेमी हथिन । "शिव" शब्दके अर्थ "शुभ, स्वाभिमानिक, अनुग्रहशील, सौम्य, दयालु, उदार, मैत्रीपूर्ण" होवहै । लोक व्युत्पत्तिमे "शिव" के जड़ "शि" है जेकर अर्थ है जौनमे सब चीज व्यापक है आउ "वा" एकर अर्थ है "अनुग्रहके अवतार" । ऋग्वेदमे शिव शब्द एक विशेषणके रूपमे प्रयोग कैल जा है, रुद्रा सहित ढेर ऋग्वेदिक देवताला एक विशेषणके रूपमे । शिव शब्द "मुक्ति, अन्तिम मुक्ति" आउ "शुभ व्यक्ति" के भी अर्थ देलक हे । ई विशेषणके प्रयोग विशेष रूपसे साहित्य के वैदिक परतमे ढेर देवताके सम्बोधित करेला कैल गेलै हे । ई शब्द वैदिक रुद्रा-शिवसे महाकाव्य आउ पुराणमे नाम शिवके रूपमे विकसित होलै, एक शुभ देवताके रूपमे, जे "निर्माता, प्रजनक आउ संहारक" होवहे ।
  • महाकाल अर्थात् समयके देवता, ई भगवान् शिवके एक रूप है जे ब्राह्मणके समय आयामके नियन्त्रित करहे ।

शिवरात्रि

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प्रत्येक मासके कृष्णपक्षके चतुर्दशी शिवरात्रि कहला है, किन्तु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि कहल गेलै हे । ई दिन शिवोपासना भुक्ति एवं मुक्ति दुनो देवेवाला मानल गेलै हे, काहेकि एही दिन ब्रह्मा विष्णु शिवलिङ्गके पूजा सृष्टिमे पहिल बेर कैलन हल आउ महाशिवरात्रिएके दिन भगवान् शिव आउ माता पार्वतीके शादि बियाह हलै । एहीसे भगवान् शिव ई दिनके वरदान देलन हल आउ ई दिन भगवान् शिवके बड़ी प्रिय दिन है ।

माघकृष्ण चतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि । ॥ शिवलिङ्गतयोद्रूत: कोटिसूर्यसमप्रभ ॥

भगवान् शिव अर्धरात्रिमे शिवलिङ्ग रूपमे प्रकट होलन हल, एहीसे शिवरात्रि व्रतमे अर्धरात्रिमे रहेवाला चतुर्दशी ग्रहण करेके चाही । कुछ विद्वान प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी विद्धा चतुर्दशी शिवरात्रि व्रतमे ग्रहण करहथिन । नारद संहितामे आएल हे कि जे तिथिके अर्धरात्रिमे फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी होवे, ऊ दिन शिवरात्रि करेसे अश्वमेध यज्ञके फल मिलहे । जे दिन प्रदोष आउ अर्धरात्रिमे चतुर्दशी होवे, ऊ अति पुण्यदायिनी कहल गेलै हे ।

ईशान संहिताके अनुसार ई दिन ज्योतिर्लिङ्गके प्रादुर्भाव होलै, जेकरासे शक्तिस्वरूपा पार्वती मानवी सृष्टिके मार्ग प्रशस्त कैलन । फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशियेके महाशिवरात्रि मनावेके पीछे कारण है कि ई दिन क्षीण चन्द्रमाके माध्यमसे पृथ्वी पर अलौकिक लयात्मक शक्ति आवहै, जे जीवनीशक्तिमे वृद्धि करहै । यद्यपि चतुर्दशीके चन्द्रमा क्षीण रहहै, किन्तु शिवस्वरूप महामृत्युञ्जय दिव्यपुञ्ज महाकाल आसुरी शक्तिके नाश कर दे है । मारक या अनिष्टके आशंकामे महामृत्युञ्जय शिवके आराधना ग्रहयोगके आधार पर बतावल जा है । बारह राशि, बारह ज्योतिर्लिङ्गके आराधना या दर्शन मात्रसे सकारात्मक फलदायिनी हो जा है ।

ई काल वसन्त ऋतुके वैभवके प्रकाशनके काल है । ऋतु परिवर्तनके साथे मनो उल्लास आउ उमङ्गसे भरल होवहै । एही काल कामदेवके विकासके है आउ कामजनित भावना पर अंकुश भगवद् आराधनेसे सम्भव हो सकहै । भगवान् शिव त स्वयं काम निहन्ता हथिन, अतः ई समय उनकर आराधने सर्वश्रेष्ठ है ।

महाशिवरात्रि

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शिवके मूर्ति

महाशिवरात्रि हिन्दुके एक प्रमुख त्योहार है । भगवान् शिवके ई प्रमुख पर्व फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशीके शिवरात्रि पर्व मनावल जा है । माता पार्वतीके पति रूपके महादेव शिवके पावेला कैल गेल तपस्याके फल महाशिवरात्रि है । ई शिव आउ शक्तिके मिलनके रात है । आध्यात्मिक रूपसे एकरा प्रकृति आउ पुरुषके मिलनके रातके रूपमे बतावल जा है ।[11] एही दिन माता पार्वती आउ शिव विवाहके पवित्र सूत्रमे बन्धलन । बियाहमे जौन ७ वचनके वादा वर-वधु आपसमे करहथिन ओकर कारण शिव पार्वती विवाह है । महादेव शिवके जन्म उलेखन कुछे ग्रन्थमे मिलहै । किन्तु शिव अजन्मा हथिन, उनकर जन्म या अवतार न होलै । महाशिवरात्रि पर्व भारतवर्षमे बड़ी धूम-धामसे मनावल जा है ।

शिव महापुराण

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शिव महापुराणमे देव सबके देव महादेव अर्थात् महाकालके बारेमे विस्तारसे बतावल गेलै हे । शिव पुराणमे शिव लीला आउ उनकर जीवनके सब घटनाके बारेमे उल्लेख कैल गेलै हे ।[12] शिव पुराणमे प्रमुख रूपसे १२ संहिता है । महादेवके एक बेर ई दुनियाके बचावेला विषके पान करे पड़लै हल, आउ ऊ महाविनाशक विषके अपन कण्ठमे धारण करे पड़लै हल ।[13] एही चलते उनका नीलकण्ठोके नामसे जानल जा है ।[14]

कैलाश मानसरोवर

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कुछ कथाके अनुसार कैलाश सरोवरके शिवके निवास स्थान मानल जा है ।

भगवान् शिवके अनेक अवतार है । प्रलयकालके समय इनकर अवतार निराकार ब्रह्मम जेकरा कि उत्तराखण्डमे निरंकार देवताके नामोसे पूजा जा है । एक ऐसने अन्य अवतार है भैरवनाथ अवतार जेकरा भैरव या कालभैरव के नामसे पूजा जा है ।[5]

इहो देखी

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सन्दर्भ

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  1. "Shiva In Mythology: Let's Reimagine The Lord".
  2. संजय पोखरियाल (13-11-2017). "तस्वीरों के जरिए जानें, भगवान शिव के ये आभूषण देते हैं किन बातों का संदेश". मूल से 7 अप्रैल 2018 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 अप्रैल 2018. नामालूम प्राचल |Publisher= की उपेक्षा कैल गेल (|publisher= सुझावित हे) (सहायता); |date= में तिथि प्राचल का मान जाँची (सहायता)
  3. हिमान्शु जी शर्मा (13-02-2018). "भगवान शिव के इन गुणों को अपनाएंगे तो आपका जीवन सफल हो जाएगा।". मूल से 24 फ़रवरी 2020 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 4 जनवरी 2022. |date=, |archive-date= में तिथि प्राचल का मान जाँची (सहायता)
  4. K. Sivaraman (1973). Śaivism in Philosophical Perspective: A Study of the Formative Concepts, Problems, and Methods of Śaiva Siddhānta. Motilal Banarsidass. प॰ 131. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-81-208-1771-5. मूलसे 7 अप्रैल 2017 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 21 मार्च 2020.
  5. 1 2 Flood 1996, पन्ना 17, 153
  6. Zimmer (1972) pp. 124-126
  7. रुद्राष्टाध्यायी पृष्ठ संख्या १० गीताप्रेस गोरखपुर ।
  8. "Maha Shivratri 2020: जानिए क्‍यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?". NDTVIndia. मूल से 20 जुलाई 2020 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-07-20.
  9. "शिवोपासना और सोमवार का क्या है रहस्य, जानें विस्तार से". प्रभात खबर. अभिगमन तिथि 22 July 2024.
  10. "सावन का दूसरा सोमवार आज, जानिए पूजा सामग्री, विधि, कथा और मुहूर्त". Jansatta (Hindi मे). 2020-07-13. मूल से 14 जुलाई 2020 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-07-14.
  11. नवभारतटाइम्स.कॉम (2019-03-03). "Mahashivratri: इसलिए मनाई जाती है महाशिवरात्रि, हुई थी यह घटना". नवभारत टाइम्स (Hindi मे). मूलसे 24 अप्रैल 2020 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-07-14.
  12. Template:Wp/mag/Cite
  13. नवभारतटाइम्स.कॉम (2018-04-20). "आखिर भगवान शिव क्यों कहलाए गए नीलकंठ महादेव". नवभारत टाइम्स (Hindi मे). मूलसे 12 दिसम्बर 2019 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-07-20.
  14. Webdunia. "शिव महापुराण : परिचय और 8 पवित्र संहिताएं". hindi.webdunia.com (Hindi मे). मूल से 31 जुलाई 2019 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-06-07.