Wp/mag/मथुरा
| मथुरा मथुरा | |
|---|---|
| नगर | |
| निर्देशाङ्क: 27°24′58″N 77°40′16″E / 27.416°N 77.671°Eनिर्देशाङ्क: 27°24′58″N 77°40′16″E / 27.416°N 77.671°E | |
| देश | |
| राज्य | उत्तरप्रदेश |
| मण्डल | मथुरा मण्डल |
| क्षेत्रफल | |
| • कुल | 3,709 किमी2 (1,432 वर्ग मील) |
| जनसङ्ख्या (2011) | |
| • कुल | ४,४१,८९४ |
| भाषा | |
| • राजकीय | हिन्दी |
| • उपभाषा | बृजभाषा |
| समयमण्डल | युटिसि+०५:३० (भारतीय मानक समय) |
| पिनकोड | 281 001 |
| टेलीफोन कोड | +91(565) |
| वाहन पञ्जीकरण | यूपी-85 |
| जालस्थल | mathura |
मथुरा (ब्रज: मथुरा ) भारतके उत्तरप्रदेश राज्यके मथुरा मण्डलमे स्थित एगो नगर हे । ई मण्डलके मुख्यालयो हे ।
मथुरा ऐतिहासिक रूपसे कुषाण राजवंश द्वारा राजधानीके रूपमे विकसित नगर हे । लोगके मान्यता हे कि ओकरसे पूर्व भगवान् कृष्णके समयकालोसे पूर्व अर्थात् लगभग ७५०० वर्षसे ई नगर अस्तित्वमे हे । ई धार्मिक पर्यटन स्थलके रूपमे प्रसिद्ध हे । किन्तु एकर कौनो पुरातत्विक प्रमाण नै हे काहिके १३मा शताब्दीसे पहिले एकर कहुँ उल्लेख नै हे । उदाहरण लागि वर्ष ४०२ मे चीनी यात्री फाहियान भारत आएल, ऊ अपन पुस्तकमे लिखलक हे "फाहियान मथुरा (मताऊला) पहुँचलक, जन्ने ऊ ढेर विहार देखलक, जेकरामे तीन हजारसे जादे भिक्खू रहहलन आउ एहाँके सब राजा बुद्धके अनुयाई हलन । फाहियान आगे लिखहथ कि ई देशके कौनो निवासी न जीव हत्या करहे, न मद्यपान करहे आउ न लहसुन प्याज खा हे ।"[1][2] वर्ष ६३० ई मे चीनी यात्री व्हेनसोङ्ग भारत आएल चीनी यात्री ह्वेनत्साङ्ग मथुराके अपन यात्रा विवरण सी-यू-की मे मोटउलोके नामसे सम्बोधित कैलक हे, जेकरामे एकर क्षेत्रफल 5000 ली बतौलक हे । भूमि निम्मन एवं उपजाऊ हे । एहाँके निवासी आमलक (आँवला) बड़ी पैदा करहथ । एहाँ बड़ी उत्तम किसमके कपास उत्पन्न होवहे । एहाँके मौसम गरम हे आउ लोगके व्यवहार कोमल एवं आदरणीय हे । एहाँ पर २० सङ्घाराम हे, जेकरामें २००० से भी जादे भिक्खु रहहथिन, जिनकर सम्बन्ध हीनयान आउ महायान दुनो सम्प्रदायसे हे । ५ देवमन्दिरो हे, जेकरामे अलग मतके अनुयाई रहहथिन । सम्राट अशोक जौन ३ स्तूपके निर्माण एहाँ पर करवौलक हल, ऊ आझो मौजूद हे ।[3]
मथुरा भारतीय संस्कृति एवं सभ्यताके केन्द्र रहलै हे । भारतीय धर्म, दर्शन कला एवं साहित्यके निर्माण एवं विकासमे मथुराके महत्त्वपूर्ण योगदान सदासे रहलै हे । आझो महाकवि सूरदास, सङ्गीतके आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानन्दके गुरु स्वामी विरजानन्द, चैतन्य महाप्रभु आदिसे ई नगरीके नाम जुड़ल हे । मथुराके श्रीकृष्ण जन्मभूमिके नामोसे जानल जा हे ।[4][5]
एकरो देखी
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में आए चीनी यात्री फाहियान ने अपने यात्रा विवरण में क्या लिखा है । (Hindi मे), अभिगमन तिथि 2023-07-01
- ↑ "Cheeni Bodh Yatri Fahiyan Ki Bharat Yatra: Buy Cheeni Bodh Yatri Fahiyan Ki Bharat Yatra by Fahiyan at Low Price in India". Flipkart.com. मूल से 1 जुलाई 2023 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2023-07-01.
- ↑ ह्वेनसांग ने अपने यात्रा विवरण में मथुरा अयोध्या प्रयागराज और वाराणसी के बारे में क्या लिखा है । (Hindi मे), अभिगमन तिथि 2023-07-01
- ↑ "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
- ↑ Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance
Archived 2017-04-23 at the वेबैक मशीन ," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975
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