Jump to content

Wp/mag/बल (भौतिकशास्त्र)

From Wikimedia Incubator
< Wp | mag
Wp > mag > बल (भौतिकशास्त्र)
बल अनेक प्रकारके होवहे जैसे- गुरुत्वीयबल, विद्युत्बल, चुम्बकीयबल, पेशीयबल (धकेलल/खीँचल) आदि ।

भौतिकशास्त्रमे बल एगो सदिश राशि हे जेकरासे कौनो पिण्डके वेग बदल सकहे । न्यूटनके गतिके द्वितीय नियमके अनुसार बल संवेग परिवर्तनके दरके अनुपाती हे ।

बलसे त्रिविम पिण्डके विरूपण वा घूर्णनो हो सकहे, वा दाबमे बदलाव हो सकहे । जखनि बलसे कोणीय वेगमे बदलाव होवहे, ओकरा बल आघूर्ण कहल जाहे ।

प्राचीनकालसे लोग बलके अध्ययन करैत हथ । अनिशा आउ रुकसारके कुछ धारणा हल जे न्यूटन सत्रहमा सदीमे गलत साबित कैलन । बीसमा सदीमे अल्बर्ट आइन्स्टाइन उनखर सापेक्षता सिद्धान्त द्वारा बलके आधुनिक अवधारणा देलन ।

प्रकृतिमे चार मूल बल ज्ञात हे: गुरुत्वाकर्षण बल, विद्युत्चुम्बकीय बल, प्रबल नाभकीय बल आउ दुर्बल नाभकीय बल

बलके गणितीय परिभाषा हे:

,

जन्ने बल, संवेग आउ समय हे । एगो अधिक सरल परिभाषा हे:

जन्ने द्रव्यमान हे आउ त्वरण हे ।

न्यूटनके गतिके नियम

[edit | edit source]

न्यूटनके गतिके तीन नियम कौनो वस्तु पर लगेवाला बल एवं ऊ वस्तुके गतिके बीच सम्बन्ध बतावहे ।

प्रथम नियम

[edit | edit source]

यदि कौनो वस्तु स्थिर हे त स्थिरे रहत आउ गतिमान हे त स्थिर वेगसे गतिशीले रहत जखनि तक ओकरा पर कौनो शुद्ध बाह्य बल नै लगावल जाये । न्यूटनके अनुसार प्रत्येक वस्तुमे स्थिति परिवर्तनके विरोध करेके प्राकृतिक प्रवृत्ती होवहे । ई प्रवृत्तीके जड़त्व कहल जा हे आउ एकराला प्रथम नियमके कखनियो-कखनियो "जड़त्व नियम" कहल जा हे । न्यूटन ई नियमके प्रथम रखलन काहेकि ई नियम ऊसब निर्देशतन्त्रके परिभाषित करहे जेकरामे अन्य नियम मान्य हे । ईसब निर्देशतन्त्रके जडत्वीय तन्त्र कहल जा हे ।

द्वितीय नियम

[edit | edit source]

संवेग परिवर्तनके दर लगावल गेल बलके समानुपाती होवहे आउ ओकर (संवेग परिवर्तनके) दिशा ओही होवहे जे बलके होवहे । द्वितीय नियम एक गणितीय समीकरणमे व्यक्त कैल जा सकहे:

,

ई समीकरणके अनुसार, जखनि कौनो निकाय पर कौनो बाह्य बल नै हे, त निकायके संवेग स्थिर रहहे ।

जखनि निकायके द्रव्यमान स्थिर होवहे, त समीकरण अधिक सरल रूपमे लिखल जा सकहे:

मने कौनो पिण्डके त्वरण आरोपित बलके अनुक्रमानुपाती हे ।

आवेग

[edit | edit source]

आवेग द्वितीय नियमसे सम्बन्धित हे । आवेग मने संवेगमे परिवर्तन । अर्थात्

जन्ने I आवेग हे । आवेग टक्करके विश्लेषणमे बड्डी महत्वपूर्ण हे ।

तृतीय नियम

[edit | edit source]

प्रत्येक क्रियाके बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया होवहे । न्यूटन ई नियमके प्रयोग करके संवेग संरक्षणके नियमके वर्णन कैलन, किन्तु असलमे संवेग संरक्षण एक अधिक मूलभूत सिद्धान्त हे । ढेर उदहारण हे जेकरामे संवेग संरक्षित होवहे किन्तु तृतीय नियम मान्य नै हे ।

विशेष सापेक्षता सिद्धान्त

[edit | edit source]

आइन्स्टाइनके विशेष सापेक्षता सिद्धान्तमे बलके अवधारणा बदलहे । ऊर्जा आउ द्रव्यमानके समानताके चलते जखनि एक पिण्डके वेग अधिक होवहे, त ओकर जड़त्वोमे वृद्धि होवहे । अर्थात् एक पिण्डके कौनो त्वरण देवेला अधिक वेगमे जादे बल चाही कम वेगमे से । न्यूटनके परिभाषा,

तैयो चलहे एकर सन्दर्भमे, किन्यु संवेगके एक नया परिभाषा चाही:

जन्ने वेग हे आउ प्रकाशके चाल हे ।

मूलबल

[edit | edit source]

गुरुत्वाकर्षण, विद्युत चुम्बकीय बल, प्रबल नाभकीय बल आउ दुर्बल नाभकीय बल प्रकृतिके मूलबल हे ।

गुरुत्वाकर्षण

[edit | edit source]

प्रुथ्वीमे एक पिण्डके गुरुत्वाकर्षण बल जना हे:

जन्ने गुरुत्वीय त्वरणके नियताङ्क हे ।

विद्युत चुम्बकीय बल

[edit | edit source]

कौनो आवेशित कण पर एक विद्युत चुम्बकीय बल होवहे ।

जन्ने विद्युत चुम्बकीय बल, वैद्युत आवेशके राशि, विद्युत क्षेत्र, कणके वेग आउ चुम्बकीय क्षेत्र हे ।

प्रबल नाभकीय बल

[edit | edit source]

परमाणुके नाभिकमे प्रोटोन आउ न्युट्रोनके एक साथे बान्धके रखेवाला बल प्रबल नाभिकिय बल कहला हे ।

प्रबल नाभकीय बलसे नाभिक संयुक्त रहहे ।

दुर्बल नाभकीय बल

[edit | edit source]

दुर्बल नाभकीय बलके चलते नाभिकीय क्षय होवहे ।

अन्य सामान्य बल

[edit | edit source]

शास्त्रीय बलविज्ञानमे कुछ आउ प्रकारके बल देखल जा हे ।

अभिलम्ब बल

[edit | edit source]

अभिलम्ब बल निकटस्थ परमाणुके प्रतिक्षेपसे उत्पन्न हे । दु पिण्डके सम्पर्क-पृष्ठके अभिलम्बवत् दिशामे विवश करहे । उदहारणला जखनि मेज पर एक प्याला रखल हे, त मेजसे प्याला पर एक अभिलम्ब बल हे जे प्यालेके भारके समान आउ विपरीत हे ।

घर्षण

[edit | edit source]

घर्षण अभिलम्ब बलसे सम्बन्धित हे । ई गतिके विरोध करहे । घर्षणके दु प्रकार हे: स्थैतिक आउ गतिज । स्थैतिक घर्षण दु पिण्डके सम्पर्क-पृष्ठके समान्तर दिशामे हे, किन्यु गतिज घर्षण गतिके दिशा पर निर्भर नै हे ।

कमानी बल

[edit | edit source]

कमानी बल कमानीके सम्पीडन आउ विस्तारणके विरोध करहे । ई बल खाली कमानीके विस्थापन पर निर्भर हे:

जन्ने कमानी-स्थिराङ्क हे, जे कमानीके एक गुण हे आउ जन्ने विस्थापन हे । बलके दिशा विस्थापनके विपरीत हे ।

घूर्णी गति आउ बल आघूर्ण

[edit | edit source]

दृढ़ पिण्डमे स्थानान्तारीय गतिके अतिरिक्त घूर्णी गतियो हो सकहे । घूर्णनमे बल आघूर्ण ओही भूमिका निभावहे जे बल स्थानान्तारीय गतिमे निभावहे । एक बल आघूर्ण हमेशा कौनो एक बलसे सम्बन्धित हे । बल आघूर्णके परिभाषा हे:

जन्ने सदिश हे, जे घूर्णन बिन्दु आउ बल पर लगेवाला बिन्दुके दूरी दर्शावहे आउ जन्ने पिण्ड पर लगेवाला बल हे ।

न्यूटनके गतिके नियम घूर्णनोमे प्रयोग कैल जा सकहे । प्रथम नियमके अनुसार यदि कौनो पिण्ड पर बल आघूर्ण नै लगल होवे, त पिण्डके घूर्णी गत्यावस्था नै बदलत । द्वितीय नियमसे बल आघूर्णके एक नया परिभाषा भेटहे:

या

जन्ने कोणीय संवेग हे, : जड़त्व आघूर्ण हे आउ कोणीय त्वरण हे । तृतीय नियमसे कोणीय संवेग संरक्षणके सिद्धान्त भेटहे ।

इहो देखी

[edit | edit source]