Wp/raj/हिन्द-आर्य भासावां
हिन्द-आर्य भासावां हिन्द-यूरोपीय भासावां री हिन्द-ईरानी साखा री एक मोटी उपसाखा है, जिणनै 'भारतीय उपसाखा' भी कैवै है। आं मांय सूं घणकरी भासावां री उत्पत्ति संस्कृत अर प्राकृत सूं हुई। 80 करोड़ हूं बेसी लोगां रै द्वारा बोली जाबा आळी, खासकर दक्सिण एसिया रै मांय, आ भासावां भारत, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेस अर स्रीलंका जैड़ा देसां रै भासाई परिदृस्य माथै हावी है। भौगोलिक दीठूं, हिन्द-आर्य भासावां विविध खेतरां मांय फैली है। उत्तरी भारत रै "हिंदी खेतर" रै मांय भोजपुरी अर मैथिली जैड़ी खेतरीय भासावां रै साथै आधुनिक मानक हिंदी भी प्रधान है। आसै-पासै रै खेतरां मांय हिमालय री तलहटी मांय नेपाली, पूर्वी भारत अर बांग्लादेस मांय बंगाली, पस्चिमी भारत मांय मराठी, पाकिस्तान रै सिंध प्रांत मांय सिंधी अर स्रीलंका मांय सिंहली है।[1]
हिन्द-आर्य परिवार रै मांय भासाई विविधता प्रवासन रै पैटर्न, सांस्कृतिक आदान-प्रदान अर साहित्यिक परम्परावां सूं प्रभावित जटिल ऐतिहासिक विकास नै दरसावै है। प्रोटो-हिन्द-आर्य या प्रारंभिक वैदिक संस्कृत रै मांय आपरी साझा जड़ां रै बावजूद, आं भासावां सहस्राब्दियां रै मांय अनूठी ध्वन्यात्मक प्रणाली, व्याकरणिक संरचनावां अर सब्दावली विकसित करी है। [2]आज, वे दक्सिण एसिया री सांस्कृतिक पहचाण अर संचार नेटवर्क रो अभिन्न अंग बण्योड़ा है। हिंद-आर्य भासावां मांय आदिम-हिन्द-यूरोपीय भासा रा घ, ध अर भ जैड़ा व्यंजन संरक्सित रैया है, जिका दूजी साखावां मांय लुप्त हुयग्या है। हिन्द-आर्य भासावां नै तीन प्रमुख चरणों मांय बांटियो गयो है: जूनी हिन्द-आर्य (वैदिक संस्कृत आर सास्त्रीय संस्कृत), मध्य हिन्द-आर्य (प्राकृत बोलियां) अर नवी हिन्द-आर्य (आधुनिक भासावां)। आधुनिक समूह मांय संस्कृत, हिंदी, उर्दू, बंगाली, कस्मीरी, सिंधी, पंजाबी, नेपाली, असमी, गुजराती आद भासावां सांमिळ है।[3]
जूनी हिन्द-आर्य
[edit | edit source]जूनी हिन्द-आर्य (संस्कृत)
[edit | edit source]जूनी हिन्द-आर्य, जिणनै मुख्य रूप सूं वैदिक अर सास्त्रीय संस्कृत रै द्वारा दर्साया जावै है, लगभग 1500 ईसा पूर्व रो है। वैदिक संस्कृत वेद नामक पवित्र हिंदू ग्रंथां रै मांय मिलै है अर वैदिक संस्कृत सूं न्यारी भासाई विसेसतावां नै प्रदर्सित करै है। व्याकरणकार पाणिनी (5वीं-6वीं सदी ईसा पूर्व) आपरै मौलिक ग्रंथ "अष्टाध्याय" रै मांय सास्त्रीय संस्कृत रा नियमां रो दस्तावेजीकरण करियो है, जिणमांय पवित्र भासा रै प्रयोग (*चंदस*) अर बोलचाल री भासा (*भासा*) रै बीच भेद करियो गयो है। संस्कृत सदियों तांई एक धार्मिक अर विद्वान भासा रै रूप मांय काम करियो अर इणरै बाद री हिंद-आर्य भासावां रै विकास नै प्रभावित करियो।[4][5]
मध्य हिन्द-आर्य (प्राकृत काल)
[edit | edit source]मध्य हिंद-आर्य, जो लगभग 600 ईसा पूर्व सूं 1000 ई. तांई फैल्योड़ो है, इण मांय प्राकृत बोलियां जियां कै पाली (बौद्ध ग्रंथां मांय बरतीजण आळी) अर अर्धमागधी (जैन ग्रंथां सूं जुड़ी) सांमिळ है। इण काल मांय अपभ्रंस बोलियां रो उद्भव हुयो, जिणमांय मध्य हिंद-आर्य अर प्रारंभिक आधुनिक हिंद-आर्य भासावां रो सेल बण्यो। अपभ्रंस साहित्यिक परम्परावां मांय महताऊ योगदान दियो अर बंगाली, हिन्दुस्तानी (हिन्दी-उर्दू), गुजराती, मराठी अर पंजाबी जैड़ी आधुनिक भासावां री नींव राखी।
नवी हिन्द-आर्य (आधुनिक काल)
[edit | edit source]नव हिन्द-आर्य, अवस्था मांय अपभ्रंसूं विकसित आधुनिक भासावां सांमिळ है। ये भासावां खेतरां रै मांय एक निरंतरता प्रदर्सित करै है, जिणसूं बोलियां रै बीच भेद कीं कृत्रिम हो जावै है। जियां कै उत्तरी भारत रै मांय हिंदी एक मानकीकृत भासा रै रूप मांय काम करै है पण इण मांय अवधी अर ब्रज जैड़ी केई खेतरीय बोलियां है। इणी भांत बंगाली भासा मांय *साधु-भासा* (औपचारिक) अर *कलित-भासा* (बोलचाल) जैड़ा न्यारा-न्यारा रजिस्टर विकसित हुया। मुगल युग रै दौरान ऐतिहासिक बातचीत रै कारण फारसी, अरबी अर तुर्किक भासावां रा साब्दिक प्रभाव कई नई हिन्द-आर्य भासावां मांय स्पष्ट है।
साखावां
[edit | edit source]दार्दिक/पैसाची
[edit | edit source]- कस्मीरी: कस्मीरी भासा मुख्य रूपूं कस्मीर घाटी रै मांय बोली जावै है। यो दरदिक भासा समूह रो एक हिस्सो है अर इण माथै फारसी रो घणो प्रभाव पड़्यो है। भासा री लिखण वाळो छेत्र रै आधार माथै फारसी लिपि अर देवनागरी लिपि दोनूं ई हुवै।[6]
- सीना: सीना, जिणनै सिना भी कैवै है, पाकिस्तान रै कब्जे वाळा कस्मीर रै गिलगित-बाल्टिस्तान खेतर रै मांय बोली जावै है। आ दार्दिक भासावां रै समूह सूं संबंधित है अर इण छेत्र री दूजी भासावां सूं घनिष्ठ संबंध है। इणरै आसै-पासै री भासावां सूं न्यारी ध्वन्यात्मक अर व्याकरण री खासियतां है।[7]
- चित्राली: खोवर रै नांव सूं भी जाणीजै है, आ खास तौर सूं पाकिस्तान रै खैबर पख्तूनख्वा रै चित्राल खेतर रै मांय बोली जावै है। आ भासा दरदिक भासा परिवार री सदस्य है अर इण मांय देसी अर फारसी प्रभावां रो मिस्रण है। आ अरबी लिपि मांय लिखीजी है अर इण मांय मौखिक साहित्य रो समृद्ध है।[8]
- कोहिस्तानी: कोहिस्तानी पाकिस्तान रै कोहिस्तान (खैबर पख्तूनख्वा) रै पहाड़ी इलाकां मांय बोली जावण आळी भासावां रै समूह नै कैवै है। आ भासा दरदिक परिवार सूं संबंधित है अर सिना अर चित्राली जैड़ी भासावां सूं कीं खासियतां साझा करै है। इणरी केई बोलियां है, जिणसूं इणनै बोलणियां री दीठ सूं विविधता है।[9]
पहाड़ी (उत्तर)
[edit | edit source]- नेपाली: नेपाली नेपाल री राजभासा है अर इणनै भारत अर भूटान रै केई भागां मांय भी बोली जावै है। इणमें देवनागरी लिपि रो प्रयोग है, अर इणरी सबदावली संस्कृत अर तिब्बती-बर्मन भासावां सूं प्रभावित है। नेपाली लोककथावां, कवितावां अर धार्मिक ग्रंथां सूं भरपूर है।[10]
- गढ़वाली: गढ़वाली भारत रै उत्तराखंड रै गढ़वाल छेत्र मांय बोली जावै है। आ केन्द्रीय पहाड़ी भासावां रै समूह रो एक हिस्सो है अर इणरो कुमाओणी सूं भासाई जुड़ाव है। इण भासा री एक न्यारी सबदावली अर व्याकरण री संरचना आपरै पहाड़ी भूगोलूं प्रभावित है।[11]
- कुमाऊँनी: कुमाओणी भासा भारत रै उत्तराखंड रै कुमाऊ खेतर मांय बोली जावै है। यो मध्य पहाड़ी समूह सूं संबंधित है अर गढ़वाली सूं समानता राखै है पण इणरी स्थानीय अभिव्यक्तियां अर बोलियां में न्या[12]री है। कुमाओणी रो सांस्कृतिक इतिहास जीवंत है, खासकर लोक संगीत अर कला रै मांय।
- महासू पहाड़ी: महासू पहाड़ी हिमाचल प्रदेस रै महासू खेतर में बोली जाबा आळी एक बोली है। आ पस्चिमी पहाड़ी बोलियां मांय सूं एक है अर आस-पास रै इलाकां मांय बोली जावण आळी भासावां रै काफी नजीक है। इण बोली री आपरी न्यारी भासाई विसेसतावां अर समृद्ध मौखिक परम्परा है।[13]
उत्तर-पस्चिम
[edit | edit source]- पंजाबी: पंजाबी भारत अर पाकिस्तान रै पंजाब छेत्र मांय बोली जावै है। इणनै भारत मांय गुरमुखी अर पाकिस्तान मांय साहमुखी मांय लिखीजै। पंजाबी रो साहित्यिक अर सांस्कृतिक इतिहास समृद्ध है, खासकर सूफी कविता अर गुरु नानक अर वारिस साह जैड़ा नामी कवियां री रचनावां मांय।[14]
- सरैकी: सराईकी भासा मुख्य रूप सूं पाकिस्तान रै पंजाब रै दक्सिणी खेतरां मांय बोली जावै है। इणनै पंजाबी री एक किस्म मानीजै है पण इण मांय ध्वन्यात्मक, साब्दिक अर वाक्य रचना री न्यारी-न्यारी विसेषतावां है। सरायकी रो साहित्य अर कविता इण इलाकै री परम्परावां मांय घणी गहरी जड़ां राखै।[15]
- सिंधी: सिंधी पाकिस्तान रै मांय सिंध प्रांत री राजभासा है अर इणनै लाखां लोग बोलै है। खास कर'र सूफी कविता में समृद्ध साहित्यिक विरासत वाळै हिन्द-आर्य भासा है। पाकिस्तान मांय आ भासा अरबी लिपि मांय लिखी जावै है, हालांकि भारत मांय देवनागरी लिपि रो प्रयोग होवै है।[16]
पस्चिम
[edit | edit source]- राजस्थानी: राजस्थानी भारत रै राजस्थान प्रान्त मांय बोली जावै है, अर इण मांय मारवाड़ी, मेवाड़ी, अर ढूंढरी जैड़ी केई बोलियां सांमिळ है। इण भासा रो इण खेतर रै इतिहास, संगीत अर लोककथावां सूं घणो जुड़ाव है। इण मांय गुजराती अर हिंदी रै साथै घणी खासियतां है पण इणरी आपरी एक अनूठी ओळख है। [17]
- गुजराती: गुजराती मुख्य रूपूं भारत रै गुजरात राज्य मांय बोली जावै है अर आ राज्य री राजभासा है। अठै साहित्य री समृद्ध परम्परा है, खासकर कविता अर नाटक री। आ भासा गुजराती लिपि रो प्रयोग करै है अर गुजराती प्रवासियां रै कारण भारत अर दुनिया भर में इण भासा रा घणा बोलणिया है। [18]
- भिली: भीली भासा पस्चिमी भारत री भील जनजातियां रै द्वारा बोली जावै है, खासकर गुजरात, मध्यप्रदेस अर राजस्थान में। यो हिन्द-आर्य परिवार सूं संबंधित है अर इणरी केई बोलियां है। आ भासा लोककथावां अर आदिवासी संस्कृति सूं भरपूर है, जिण मांय मौखिक परम्परावां मजबूत है।
पूर्व
[edit | edit source]- बंगाली: बंगाली बांग्लादेस अर भारत रै पस्चिमी बंगाल राज्य री प्राथमिक भासा है। आ बंगाली लिपि में लिखीजी है अर इणरी समृद्ध साहित्यिक विरासत है, जिणमें रवीन्द्रनाथ टैगोर री रचनावां सांमिळ है। बंगाली आपरी कविता, गीत अर दार्सनिक साहित्य रै वास्तै जाणीजै है।
- असमिया: असम भासा भारत रै असम री राजभासा है अर इणनै उत्तर-पूर्वी खेतर रै मांय लाखां लोग बोलै है। आ असमी लिपि में लिखी जावै है, जकी पूर्वी नागरी लिपि सूं ली गई है। असमिया भासा रो साहित्य रो एक लांबो इतिहास है, जिण मांय मध्यकालीन कविता अर आधुनिक गद्य भी सांमिळ है।
- उड़िया: उड़िया भासा मुख्य रूपूं भारत रै ओडिसा राज्य में बोली जावै है अर आ राज्य री राजभासा है। हजार बरसां सूं भी पुराणा प्राचीन साहित्य रै कारण इणनै सास्त्रीय भासा रो दर्जो मिल्यो है। उड़िया लिपि अनूठी है अर दूजी भारतीय लिपियां सूं न्यारी है।
- मैथिली: मैथिली भासा भारत रै बिहार रै मिथिला खेतर अर नेपाल रै केई हिस्सों रै मांय बोली जावै है। इण मांय साहित्य री समृद्ध परम्परा है, खासकर कविता अर लोकगीतां मांय। मैथिली री आपरी लिपि है जिणनै तिरहुता कैवै है, हालांकि आज घणकरी बार देवनागरी में लिखी जावै है।
- भोजपुरी: भोजपुरी मुख्य रूपूं उत्तर प्रदेस, बिहार, अर नेपाल रै केई भागां मांय बोली जावै है। इणरी मौखिक परम्परा घणी समृद्ध है, खासकर संगीत अर लोककला में। भोजपुरी साहित्य रै मांय चावा-ठावा लोकगीतां समेत इण छेत्र री सांस्कृतिक विविधता झलकै।
मध्य
[edit | edit source]- हिन्दी: हिंदी भारत री राजभासा है अर आखै देस मांय घणी बोली जावै है। आ देवनागरी लिपि मांय लिखीजी है अर इण मांय घणी सारी सबदावली है, जिण मांय संस्कृत अर मामूली प्रभाव फारसी अर अरबी है। हिंदी लाखों भारतीयों रै वास्तै संवाद रो माध्यम है।
- उर्दू: उर्दू मुख्य रूपूं पाकिस्तान अर भारत रा केई भागां मांय बोली जावै है, जठै आ राष्ट्रीय भासा है। इणरी व्याकरण रो घणकरों हिस्सो हिंदी रै साथै साझा करै है पण फारसी सूं ली गई लिपि रो प्रयोग करै है। उर्दू आपरी कवितावां, खासकर गजलां रै वास्तै प्रसिद्ध है अर इणरी एक समृद्ध साहित्यिक परम्परा है।
- ब्रज: ब्रज हिंदी री एक उपभासा है जिकी मुख्य रूप सूं उत्तर प्रदेस रै ब्रज छेत्र मांय बोली जावै है। खासकर सूरदास जैड़ा कवियां री रचनावां में आ भगवान स्रीकृष्ण री कविता सूं जुड़ाव राखण सारू जाणीजै। ब्रज रो प्रयोग घणकरी बार भक्ति गीत अर धार्मिक ग्रंथां मांय होवै है। आजादी सूं पैली री मानकीकृत भासावां मांय सूं एक भासा ही जकी अबै प्रचलित नीं हुयगी है।
- हरियाणवी: हरियाणवी भासा भारत रै हरियाणा राज्य मांय बोली जावै है अर इणरो हिंदी सूं घनिष्ठ सम्बन्ध है। इण मांय एक न्यारो सुर अर सबदावली है जिकी इणनै मानक हिंदी सूं न्यारी करै है। भासा हरियाणा री ग्रामीण अर सांस्कृतिक अस्मिता नै दरसावै है, खासकर लोकगीतां अर कहाणियां मांय।
- अवधि: अवधी भारत रै उत्तर प्रदेस रै अवध छेत्र मांय बोली जावै है अर अठै री साहित्यिक परंपरा री खासियतां है। इणनै तुलसीदास री रचनावां खास कर'र रामचरितमानस रै कारण जाणीजै। अवधी रो असर हिंदी रै विकास माथै पड़्यो है अर आज भी इण छेत्र रै केई ग्रामीण इलाकां मांय आ बोली जावै है।
- छत्तीसगढ़ी: छत्तीसगढ़ी भासा भारत रै छत्तीसगढ़ राज्य मांय बोली जावै है अर इणनै राज्य री भासा रो सरकारी दर्जो है। इणनै हिंदी री एक बोली मानीजै पण उच्चारण अर सबदावली री दीठ सूं इणरी आपरी न्यारी खासियतां है। आ भासा संगीत अर नृत्य समेत लोक परम्परावां सूं समृद्ध है।
दक्सिण
[edit | edit source]- मराठी: मराठी भारत रै महारास्ट्र राज्य री राजभासा है। इणरी समृद्ध साहित्यिक अर सांस्कृतिक परम्परा है, जिणमें संत-कवि ज्ञानेस्वर अर नाटककार विजय तेंदुलकर जैड़ा उल्लेखजोग हस्तियां है। मराठी देवनागरी लिपी में लिखी जावे है।
- कोंकणी: कोंकणी भासा कोंकण खेतर रै मांय बोली जावै है, जो महारास्ट्र, गोवा अर कर्नाटक रै केई हिस्सों रै मांय फैली है। इणनै गोवा री राजभासा रै रूप में मान्यता मिली है अर इणरी एक अनूठी लिपि है, जिणमें देवनागरी अर रोमन लिपियां रो प्रयोग कियो गयो है। कोंकणी री संस्कृति घणी जीवंत है, खासकर संगीत, नृत्य अर खानपान रै मांय।
- सिंहल (स्री लंका): सिंहली स्रीलंका री राजभासा है अर इणनै घणकरा लोग बोलै है। इणरी निजू लिपि मांय लिखीजै, जकी ब्राह्मी सूं व्योड़ी है। सिंहली रो एक लांबो साहित्यिक इतिहास है अर ओ स्रीलंका री सांस्कृतिक पहचाण रो एक प्रमुख पहलू है, खासकर बौद्ध ग्रंथां अर पाली कैनन सूं जुड़्योड़ो है।
- धिवेही (मालदीव): धिवेही मालदीव री राजभासा है। यो हिन्द-आर्य भासा समूह सूं संबंधित है अर थाना नांव री अनूठी लिपि में लिखीजै है। धिवेही रै मांय एक समृद्ध मौखिक साहित्य है अर ओ मालदीव री द्वीप संस्कृति अर परम्परावां सूं घणो जुड़्योड़ो है।
भासिकावां (भासा प्रकार) अर भासावैज्ञानिक सबदावळी
[edit | edit source]हिन्द-आर्य भासावां रै संदर्भ मांय, केई सबद है जिका, जे समझाया जावै तो आपां नै भारतीय भासावां री दीठ नै गहराई सूं समझण मांय मदद मिलैला।
मातृभासा
[edit | edit source]मातृभासा वा भासा कैयी जावै है जिकी मिनख आपरै जलम रै बगत आपरै घर-परिवार अर समाज हूं सीख लेवै। जळम रै पछै मिनख जकी पैली भासा सीखै वा मायड़ भासा कैवै। मातृभासा किणी भी मिनख री सामाजिक अर भासाई पिछाण है। इणसूं मिनख री मानसिक संरचना अर सोच री प्रक्रिया माथै असर पड़ै है। मायड़भासा किणी मिनख री सांस्कृतिक अस्मिता हूं जुड़ी हुया करै है, अर बां री भावनावां, विचारां अर अभिव्यक्तियां रो मुख्य माध्यम है। मायड़ भासा मांय बातचीत करणो मिनख री सहजता अर स्वाभाविकता रो प्रतीक है।
भासिका
[edit | edit source]एक भासा या बोली रै निरंतरता रो एक विसिस्ट रूप है। ओ कोई भासा, बोली, भासा रो प्रयोग, भासा री सैली या दूजी भासा रो रूप हो सकै है। भासा विग्यान मांय किणी खास भासा रूप नै मानक भासा कैय’र ऊंचो दरजो दियो जावै है, जदकै दूजा रूपां नै बोलियां कैय’र घणकरी बार नीचो दरजो दियो जावै है। इण कारण सूं भासाविदों रै बीच वांरी परिभासा रै बाबत लगातार बहस चाल री है। "भासिका" सबद रै मांय कोई विवाद कोनी है अर सगळी मानक भासावां अर बोलियां भासा री परिभासा रै मांय आ सकै है। [19][20]
बोली/उपभासा
[edit | edit source]उपभासा भासा रो एक विसिस्ट रूप है जिणनै बोलणियां रो एक न्यारा समुदाय बरतै है। घणकरी बार, किणी भासा री खेतरीय किस्में नै 'बोलियां' कैयो जावै है; जियां कै , अवधी, हरियाणवी, ब्रजभासा अर खारीबोली हिंदी री केई खेतरीय बोलियां है।[21] अर राजस्थानी भासा री उपभासावां मांय मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी, मेवाती आद। पण कदै-कदै, किणी सामाजिक वर्ग रै द्वारा बरतीजण आळी भासा री विविधता नै ‘बोली’ भी कैयो जावै। बोली नै कदैई-कदैई उपभासा भी कैयो जावै है, हालांकि ओ सबद मानक भासा रै वास्तै भी बरतीजै है। [22]
प्रयुक्ति
[edit | edit source]भासा विग्यान मांय रजिस्टर किणी भासा री विविधता (लेक्ट) कैवै जिणनै किणी खास सामाजिक स्थिति, सामाजिक वर्ग या लक्स्य रै वास्तै काम मांय लीजै। जियां कै औपचारिक परिस्थितियां मांय हिंदी मांय "आप कल अइये" या "तू काल आना" रो प्रयोग सही व्याकरण मानीजै है, जदकै दो किसोर मित्रां रै बिचाळै "तु कल अइयो" रो प्रयोग घणी बार न्यारी-न्यारी भासा रै प्रयोग रै रूप मांय करियो जावै है। इणीज भांत, अमेरिकी अंग्रेजी मांय, "I'm going to talk to my father" विनम्र समाज मांय एक औपचारिक प्रयोग है, जदकै "I'm gonna talk to my old man" एक अनौपचारिक प्रयोग है जिणरो ओ ई अरथ है। [23][24]
मानक बोली
[edit | edit source]मानक भासा भासा री वा सैली या भासा री बोली है जिणनै किणी समुदाय, राज्य या रास्ट्र में संपर्क भासा रो दर्जो मिलै अर जनसंचार में काम में ली जावै। आं भासावां नै मानकीकरण री प्रक्रिया हूं गुजर'र मानक बणायो जावै है, जिण मांय औपचारिक व्याकरण, सबदकोस अर दूजा भासाई कामां रो निर्माण अर प्रकासन सांमिळ है। एक मानक भासा बहुकेंद्रित या एककेंद्रित हो सकै है। अरबी, अंग्रेजी, फारसी, जर्मन अर फ्रेंच जैड़ी भासावां बहुकेंद्रित है, यानी बां रै मांय एक सूं बेसी मानक रूप है। इणरै विपरीत, कई भासावां, जियां कै रूसी, इटालियन अर जापानी, एककेन्द्रीय है।[25]
भासा-द्वैत
[edit | edit source]भासा द्वैत उण हालत रो नांव है जिण मांय एक भासा समुदाय दो न्यारी-न्यारी भासावां रो प्रयोग करै। रोजमर्रा री जिंदगी मांय आम तौर सूं बोली जावण आळी 'नीची' भासा रै अलावा दूजी 'उच्च भासा' रो प्रयोग करीजै है। ‘उच्च भासा’ रो प्रयोग साहित्य, औपचारिक सिक्सा आद मांय घणकरी बार हुवै पण साधारण बंतळ मांय नीं। ओ संभव है कै 'उच्च' भासा 'नीची' भासा रो एक पुराणो संस्करण है (आ बात मध्यकालीन यूरोप रै मांय देखी गई ही, जठै लैटिन रो प्रयोग औपचारिक उद्देस्यां रै वास्तै करियो जातो हो जदकै आम भासा उणसूं बिल्कुल अलग ही)। ओ भी संभव है कै बरतीजण आळी दो भासावां पूरी तरह सूं न्यारी-न्यारी हुवै। या फेर ओ भी हो सकै है कै दो न्यारी-न्यारी भासावां रो प्रयोग हो रैयो है पण ऐ दोनूं भासावां एक जैड़ी है।
संदर्भ
[edit | edit source]- ↑ https://www.britannica.com/topic/Indo-Aryan-languages
- ↑ https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA163#v=onepage&q&f=false
- ↑ Hammarström, Harald; Forkel, Robert; Haspelmath, Martin; Bank, Sebastian, eds. (2016). "Indo-Aryan Template:Webarchive". Glottolog 2.7. Jena: Max Planck Institute for the Science of Human History.
- ↑ Template:Cite book
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- ↑ https://hindi.uok.edu.in/Files/88762580-f106-4ce1-9953-cf5db4fc18f0/Journal/f21d2864-ec33-40ba-af7b-4888fc4c2cae.pdf
- ↑ https://www.jagran.com/uttar-pradesh/agra-city-sheena-language-spoken-in-kashmir-and-laddakh-also-known-as-younger-sister-of-sanskrit-jagran-special-20538039.html
- ↑ https://www.ethnologue.com/language/khw/
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- ↑ https://uou.ac.in/sites/default/files/slm/CGL-103.pdf
- ↑ https://uou.ac.in/sites/default/files/slm/AECC-K-101.pdf
- ↑ https://www.ethnologue.com/language/bfz/
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- ↑ https://www.ethnologue.com/language/skr/
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- ↑ Dialect Accent Features for Establishing Speaker Identity: A Case Study Template:Webarchive, Manisha Kulshreshtha, Ramkumar Mathur, pp. 16, Springer, 2012, ISBN 978-1-4614-1138-3, ... some popular dialects of Hindi, namely, Khariboli, Bundeli, Kannauji, and Haryanvi among the western Hindi belt, Chattisgarhi from eastern Hindi dialectal group, Marwari from Rajasthani group, and Bhojpuri from Bihari group ...
- ↑ Upendranath Ashk: A Critical Biography Template:Webarchive, Daisy Rockwell, pp. 78, Katha, 2004, ISBN 978-81-89020-02-6, ... Those languages, such as Braj Bhasha and Awadhi, do not actually qualify to be defined as bolis in their literary form, but the double meaning of Boli as both 'dialect' and 'spoken language,' makes it possible to blur distinctions ...
- ↑ Gregory, M. (1967), "Aspects of Varieties Differentiation", Journal of Linguistics 3: 177–197.
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