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Wp/mag/सुभद्रा

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सुभद्रा
अर्जुन आउ सुभद्रा राजा रवि वर्मा द्वारा बनावल चित्र
अन्यनामभद्रे, चित्र, सुभद्रे
देवनागरीसुभद्रा
सम्बन्धमहाभारतके पात्र, देवी
जीवनसङ्गीअर्जुन
माता-पिता
भाई-बहिनबलराम, कृष्ण (भ्राता)
सन्तानअभिमन्यु
शास्त्रमहाभारत, भागवत पुराण

सुभद्रा महाभारतके प्रमुख नायक भगवान कृष्ण आउ बलरामके बहिन हलथिन । इनकर पिता वसुदेव आउ माता रोहिणी हलथिन । कृष्णके सुझाव पाके सुभद्राके विवाह अर्जुनसे होलै हल । अभिमन्यु इनके पुत्र हलथिन ।

ढेर हिन्दु सुभद्राके देवी योगमायाके पुनर्जन्म मानऽ हथिन जे कृष्णके जीवनके दुष्ट कंससे बचावेला जन्म लेलन हल ।[1]

विवाह

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बोरी सीई के अनुसार जखनि अर्जुन स्व-लगावल तीर्थयात्राके बीचमे हलथिन, त ऊ अपन भाईके साथे अपन आम पत्नी द्रौपदीके साथे निजी समयके सम्बन्धमे समझौतेके शर्तके तोड़ेला द्वारका नगर पहुँचे आउ कृष्णसे मिलेके बाद, ऊ रैवत पर्वत पर आयोजित एक उत्सवमे भाग लेलन । ओहाँ अर्जुन सुभद्राके देखलन आउ उनकर सुन्दरतासे मुग्ध हो गेलन आउ उनकासे बियाह करेके कामना कैलन । कृष्ण खुलासा कैलन कि ऊ अर्जुनके मामा वसुदेवके सन्तान आउ अर्जुनोके बहन हे । कृष्ण कहलन कि ऊ सुभद्राके स्वयंवरमे उनकर निर्णयके भविष्यवाणी न कर सकलन काहेकि सुभद्रा अर्जुनके बहन हलथिन आउ कृष्ण अर्जुनके‌ सुभद्राके अपहरण करेके सलाह देलन । जखनि अर्जुन युधिष्ठिरके अनुमतिला एक पत्र भेजलन, त ऊ एक रथके पहाड़ी पर ले गेलन आउ मुस्कुराइत सुभद्राके अपने साथे ले गेलन । सुभद्राके रक्षक द्वारा उनका रोकेके असफल प्रयासके बाद, यादव, वृष्णि आउ अन्धका ई मामले पर चर्चा करेला एक बैठक कैलन । कृष्ण द्वारा उनका दिलासा देवेके बाद ऊ सहमत हो गेलन आउ ई प्रकार अर्जुन सुभद्रासे वैदिक रीति-रिवाजसे बियाह कैलन ।[2][3]

सुभद्रा अपन प्रेमी अर्जुनके साथे द्वारकासे भाग जा हथिन ।

भागवत पुराणमे बलराम द्वारा दुर्योधन के सुभद्राके दूल्हाके रूपमे उनकर सहमतिके बिना चुने आउ अर्जुनके भावनाके प्रति उनकर पारस्परिक सम्बन्धके बारेमे बतावल गेलै हे । ई जानके कि सुभद्राके भाग जाएके समाचार मिलेके बाद बलराम अर्जुनके बिरुद्ध युद्ध छेड़थिन, कृष्ण निर्णय कैसन कि सुभद्रा अर्जुनके सारथी होथिन । अर्जुन सुभद्राके लेवेला आगे बढ़ऽ हथिन आउ कृष्णके साथे ऊ चल जा हथिन । ई समाचार मिलेके बाद कि सुभद्रा अर्जुनके साथे भाग गेलन हे आउ उनका रथ पर सवार देखके बलराम आउ अन्य यादव ई बातसे नाराज हथिन आउ अर्जुनके पीछा करेके निर्णय करऽ हथिन जे उनका सफलतापूर्वक रोक देलकै हल । कृष्णके भागवेके बाद वापिस लौटे आउ उनका मना लेलन । अन्तमे बलराम सहमत होवऽ हथिन आउ द्वारकामे अर्जुनके साथे सुभद्राके विवाह करऽ हथिन ।[4]

मौत

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परीक्षितके सिंहासन पर बैठेके बाद स्वर्गला प्रस्थान करैत समय युधिष्ठिर दुनो राज्य हस्तिनापुरके अपन पोता द्वारा शासित आउ इन्द्रप्रस्थके अपन भाई कृष्णके परपोते वज्रनाभ द्वारा शासित रखेके जिम्मेदारी देलन । महाकाव्यमे उनकर मृत्यु कैसे आउ कखनि होलै, एकर बारेमे कौनो विशेष उल्लेख न है, किन्तु ऐसन मानल जा है कि पाण्डवके साथे द्रौपदीके स्वर्गमे पहुँचेके बाद सुभद्रा आउ उनकर बहू (उत्तरा) अपन शेष जीवन बितावेला जङ्गलमे चल गेलन ।[5]

सन्दर्भ

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  1. Krishnan, S. A. (2017-05-20). Abhimanyu: The Warrior Prince. SA Krishnan.
  2. Ganguli 1883.
  3. Mani 1975.
  4. "Subhadra's marriage". The Hindu. 27 अगस्त 2019. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 0971-751X. अभिगमन तिथि 23 नवम्बर 2020.
  5. Mahaprasthanika Parva https://www.sacred-texts.com/hin/m17/m17001.htm