Wp/mag/सहदेव
| द्रोणाचार्य | |
|---|---|
राजा रवि वर्मा प्रेस द्वारा सहदेव पर एक प्रति | |
| हिन्दु पौराणिक कथाके पात्र | |
| नाम | द्रोणाचार्य |
| अन्यनाम | द्रोण |
| सन्दर्भ ग्रन्थ | महाभारत |
| मुख्य शस्त्र | तलवार |
| माता-पिता | * अश्विनी कुमार (पिता) |
| भाई-बहिन | * नकुल (जुड़वा भाई) |
| जीवनसङ्गी | * द्रौपदी
|
| सन्तान | * द्रौपदी द्वारा श्रुतसेना
|
सहदेव महाभारतमे पाँच पाण्डवमे से एक आउ सबसे छोट हलन । ऊ माता माद्रीके असमान जुड़वा पुत्रमे से एक हलन, जिनकर जन्म देव चिकित्सक अश्विन के वरदान स्वरूप होलै हल । जखनि नकुल आउ सहदेवके जन्म होलै हल तखनि ई आकाशवाणी होलै कि ‘शक्ति आउ रूपमे ई जुड़वा बन्धु स्वयं जुड़वा अश्विनियोसे बढ़के होथिन ।’ सहदेव त्रिकालदर्शी हलन । ऊ परशु ताउ तलवार अस्त्रके निपुण योद्धा हलन । अज्ञातवासके समय ई तन्तीपाल नाम धारण करके गायके देखभाल करेके कार्य कैलन ।
सहदेव अपन चार भाईके साथे द्रौपदीके साझा कैलन । उनकर विवाह मद्र राज्यके विजयोसे होलै हल । उनकर दु पत्नीसे क्रमशः श्रुतसेन आउ सुहोत्र दु पुत्र होएल । सहदेव युधिष्ठिरके राजसूय खनि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभौलन जने ऊ दक्षिणके राजा पर विजय प्राप्त कैलन । युधिष्ठिर द्वारा पासाके खेलमे दुर्योधनसे अपन सब सम्पत्ति हारेके बाद सहदेव दुर्योधनके मामा शकुनिके मारेके कसम खैलन जे खेलके अनुचित तरीकासे जीतेला लोड कैल पासाके प्रयोग कैलक हल । बादमे पाण्डव आउ द्रौपदीके तेरह सालला निर्वासित कर देल गेलै जेकरामे अन्तिम वर्ष लुकाएके अवधि हलै जेकरा अज्ञातवास कहल जा है । लुकाइत खनि सहदेव तन्त्रिपाल नामक एक वैश्यके रूप धारण कैलन आउ विराटके राज्यमे एक चरवाहाके रूपमे काम कैलन । सहदेव एक कुशल योद्धा हलन जे पाण्डव आउ उनकर चचेरा भाई कौरवके बीच कुरुक्षेत्र युद्धमे लड़ाई लड़लन हल । युद्धके १८मा दिन ऊ शकुनिके वध कर देलन । महाकाव्यके अन्तमे स्वर्गमे प्रवेश करेला हिमालयमे पाण्डवके यात्रा खनि द्रौपदीके बाद सहदेव दोसर व्यक्ति हलन जे अपन बुद्धि पर अत्यधिक गर्वके कारण मर गेल ।
एकरो देखथिन
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]
