Wp/mag/संस्कृत साहित्य
Appearance

ऋग्वेदकालसे लेके आज तक संस्कृतभाषाके माध्यमसे सब प्रकारके वाङ्मयके निर्माण होवित आवित है । हिमालयसे लेके कन्याकुमारीके छोर तक कौनो न कौनो रूपमे संस्कृतके अध्ययन अध्यापन अब तक होवित चलित है । भारतीय संस्कृति आउ विचारके धाराके माध्यमो होके ई भाषा अनेक दृष्टिसे धर्मनिरपेक्ष रहलै है ।[1]
संस्कृतभाषाके साहित्य अनेक अमूल्य ग्रन्थरत्नके सागर है, एतना समृद्ध साहित्य कौनो दोसर प्राचीन भाषाके न है और नहिए कौनौ अन्य भाषाके परम्परा अविच्छिन्न प्रवाहके रूपमे एतना दीर्घकाल तक रह पैलै हे । अति प्राचीन होवहुँ पर ई भाषाके सृजन-शक्ति कुण्ठित न होलै, एकर धातुपाठ नित्य नया शब्दके गढ़मे समर्थ रहलै हे ।
प्रसिद्ध साहित्यिक रचना
[edit | edit source]
एकरो देखथिन[edit | edit source]सन्दर्भ[edit | edit source]Template:Wp/mag/संस्कृत साहित्य
|