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Wp/mag/संस्कृत साहित्य

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बिहार या नेपालसे प्राप्त देवीमाहात्म्यके ई पाण्डुलिपि संस्कृतके सबसे प्राचीन सुरक्षित बचल पाण्डुलिपि है (११मा शताब्दी के) ।

ऋग्वेदकालसे लेके आज तक संस्कृतभाषाके माध्यमसे सब प्रकारके वाङ्मयके निर्माण होवित आवित है । हिमालयसे लेके कन्याकुमारीके छोर तक कौनो न कौनो रूपमे संस्कृतके अध्ययन अध्यापन अब तक होवित चलित है । भारतीय संस्कृति आउ विचारके धाराके माध्यमो होके ई भाषा अनेक दृष्टिसे धर्मनिरपेक्ष रहलै है ।[1]

संस्कृतभाषाके साहित्य अनेक अमूल्य ग्रन्थरत्नके सागर है, एतना समृद्ध साहित्य कौनो दोसर प्राचीन भाषाके न है और नहिए कौनौ अन्य भाषाके परम्परा अविच्छिन्न प्रवाहके रूपमे एतना दीर्घकाल तक रह पैलै हे । अति प्राचीन होवहुँ पर ई भाषाके सृजन-शक्ति कुण्ठित न होलै, एकर धातुपाठ नित्य नया शब्दके गढ़मे समर्थ रहलै हे ।

प्रसिद्ध साहित्यिक रचना

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साहित्यकारप्रसिद्ध कृतिरचनाकाल
भरतमुनिनाट्यशास्त्रम्प्रथम शती
भामहकाव्यालङ्कारसप्तम शतक
दण्डीकाव्यादर्शसप्तम शती
उद्भटकाव्यालङ्कारसारसङ्ग्रहअष्ठम शती
वामनकाव्यालङ्कारसूत्रवृत्तिअष्ठम शती
रुद्रटकाव्यालङ्कारनवम शती
आनन्दवर्धनध्वन्यालोकनवम शती
राजशेखरकाव्यमीमांसादशम शती
भट्टनायकहृदयदर्पणदशम शती
अभिनवगुप्तअभिनवभारती, लोचनं चदशम शती
धनञ्जयदशरूपकम्दशम शती
भोजसरस्वतीकण्ठाभरणम्,शृङ्गारप्रकाशएकादश शती
महिमभट्टव्यक्तिविवेकएकादश शती
क्षेमेन्द्रऔचित्यविचारचर्चाएकादश शती
मम्मटकाव्यप्रकाशएकादश शती
रुय्यकअलंकारसर्वस्वम्द्वादश शती
हेमचन्द्रकाव्यानुशासनम्द्वादश शती
जयदेवचन्द्रालोकत्रयोदश शती
विद्यानाथएकावलीत्रयोदश शती
विद्यानाथप्रतापरुद्रीयम्त्रयोदश शती
विश्वनाथसाहित्यदर्पणत्रयोदश शती
केशवमिश्रअलङ्कारशेखरषोडश शती
अप्पयदीक्षितकुवलयानन्द तथा चित्रमीमांसाषोडश शती
जगन्नाथरसगंगाधरसप्तदश शती
चूडामणिदीक्षितकाव्यदर्पणसप्तदश शती

एकरो देखथिन

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सन्दर्भ

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