Wp/mag/विष्णुपद मन्दिर
| विष्णुपद मन्दिर | |
|---|---|
| धर्म सम्बन्धी जानकारी | |
| सम्बद्धता | हिन्दुधर्म |
| देवता | विष्णु |
| अवस्थिति जानकारी | |
| अवस्थिति | गया |
| मण्डल | गया मण्डल |
| राज्य | बिहार |
| देश | भारत |
| भौगोलिक निर्देशाङ्क | 24°36′37″N 85°0′33″E / 24.61028°N 85.00917°Eनिर्देशाङ्क: 24°36′37″N 85°0′33″E / 24.61028°N 85.00917°E |
| वास्तु विवरण | |
| प्रकार | शिखर |
| निर्माता | इन्दौरके रानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित |
| निर्माण पूर्ण | १७८७ मे पुनर्निर्मित |
विष्णुपद मन्दिर भगवान् विष्णुके समर्पित एगो हिन्दु मन्दिर हे[1] जे बिहार राज्यके गयाजीमे फल्गु नदीके तट पर स्थित हे ।[2] ऐसन मानल जा हे कि ई मन्दिर ओह स्थान पर बनावल गेल हल जने विष्णु कथित रूपसे राक्षस गयासुरके मारलन हल या ओकरा जमीनके भीतरे दबा देलन हल । मन्दिरमे ४० सेमी के एगो पदचिह्न हे जे भगवान् विष्णुके मानल जा हे जे बेसाल्टके एगो खण्डमे उकेरल गेल हे । एकरा 'धर्मशिला' के रूपमे जानल जा हे जेकरा तखनियो बनैलै रखल गेलै हल जखनि भगवान् गयासुरके छाती पर गोड़ रखलन हल आउ फिर ओकरा जमीनके भीतरे दबा देलन हल ।
मन्दिरके ऊपरे ५० किलो सोनाके झण्डा हे जेकरा एगो भक्त, गयापाल पण्डा बाल गोविन्द सेन दान करलन हल ।[3] विष्णुपद मन्दिर गयामे श्राद्ध कर्मके केन्द्र हे ।[4] गयावाल ब्राह्मण, जिनका गयावाल तीर्थ पुरोहित या गयाके पण्डाके रूपोमे जानल जा हे, मन्दिरके पारम्परिक पुजारी हथ । सन्त माधवाचार्य, चैतन्य महाप्रभु आउ वल्लभाचार्य ई मन्दिरके दौरा करलन हल ।[5]
वास्तुकला
ऐसन मानल जा हे कि ई मन्दिरके निर्माण केन्द्रमे भगवान् विष्णुके गोड़के निशानके साथे करल गेल हल । हिन्दुधर्ममे ई पदचिह्न भगवान् विष्णु द्वारा गयासुरके अपन सीना पर गोड़ रखके दबावेके कार्यके दर्शावहे । विष्णुपद मन्दिरके भीतरे भगवान विष्णुके ४० सेमी लम्बा पदचिह्न ठोस चट्टानमे अङ्कित हे आउ चान्दीके परत चढ़ल बेसिनसे घेराएल हे । ई मन्दिरके ऊँचाई ३० मीटर हे आउ एकरामे सुन्दरतासे नक्काशीदार स्तम्भके ८ पङ्क्ति हे जे मण्डपके सहारा दे हे । मन्दिर लोहाके कीलकसे जुड़ल बड़ धूसर ग्रेनाइट खण्डसे बनल हे । अष्टकोणीय मन्दिर पूरुब दने हे । एकरा शुण्डाकार टावर १०० फीट ऊपरे उठहे । टावरमे ढलान वाला भुजा हे जेकरामे बेरी-बेरीसे दाँतेदार आउ सादा भाग हे । शीर्ष पर जुड़ल चोटीके एगो शृङ्खला बनावेला खण्डके एगो कोण पर सेट करल गेल हे ।[6] मन्दिरके भीतरे अमर बरगदके पेड़ अक्षयवट हे जने मृतकला अन्तिम अनुष्ठान होवहे ।[7]
एहो देखथिन
सन्दर्भ
- ↑ Kulshreshtha 2017, पृ॰ 167.
- ↑ Davidson & Gitlitz 2002, पृ॰ 194.
- ↑ Singh 1978, पृ॰ 16.
- ↑ Asher 2008, पृ॰ 89.
- ↑ Singh 1978, पृ॰ 15.
- ↑ Singh 2009, पृ॰ 96.
- ↑ Varma 2005, पृ॰ 206.