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Wp/mag/विद्युत आवेश

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वैद्युतिक आवेश
एक धनात्मक आउ एक ऋणात्मक बिन्दुके आवेशके वैद्युतिक क्षेत्र
सामान्य प्रतीक
Q
एसआइ इकाईकूलम्ब
अन्य मात्रा
से व्युत्पन्न
Q = I · t

वैद्युतिक आवेश पदार्थके ऊ भौतिक गुण हे जे पदार्थके विद्युच्चुम्बकीय क्षेत्रमे रखे जायेपर एक बलके अनुभव करेके कारण बनहे । वैद्युतिक आवेश धनात्मक या ऋणात्मक हो सकहे (सामान्यतः प्रचलन द्वारा क्रमशः प्रोटोन और इलेक्ट्रोन द्वारा कैल जा हे) । समान आवेश एक दोसराके विकर्षित करहे एवं भिन्न आवेश एक दोसराके आकर्षित करहे । निवल आवेशके अनुपस्थिति वाला वस्तुके तटस्थ कहल जाहे । आवेशित पदार्थ कैसे परस्पर क्रिया करहे, एकर प्रारम्भिक ज्ञान अखन चिरसम्मत विद्युच्चुम्बकशास्त्र कहल जाहे, आउ अखनियो ऊसब समस्याला सटीक हे जेकरा प्रमात्रा प्रभाव पर विचार करके आवश्यकता नै हे ।

वैद्युतिक आवेश एक संरक्षित गुण हे; एक पृथक्तन्त्रके निवल आवेश, धनात्मक आवेशके मात्रा घटा ऋणात्मक आवेशके मात्राके नै बदल सकहे । वैद्युतिक आवेश अवपरमाण्विक कण द्वारा कैल जाहे । साधारण पदार्थमे इलेक्ट्रोन द्वारा ऋणात्मक आवेश होवहे, आउ परमाणुके नाभिकमे प्रोटोन द्वारा धनात्मक आवेश होवहे । यदि कौनो पदार्थके अंशमे प्रोटोनके तुलनामे अधिक इलेक्ट्रोन हे, त ओकर ऋणात्मक आवेश होत, यदि कम हे त एकर धनात्मक आवेश होत, आउ यदि समान सङ्ख्यामे हे त ई तटस्थ होत । आवेश परिमाणित हे; ई विभिन्न छोट इकाईके पूर्णाङ्क गुणकमे आवहे जेकरा मूल आवेश कहल जाहे, e, ल. 1.602176634×10−19 C

वैद्युतिक आवेश वैद्युतिक क्षेत्र उत्पन्न करहे । गतिमान आवेश एक चुम्बकीय क्षेत्रो उत्पन्न करहे । विद्युच्चुम्बकीय क्षेत्रके साथे वैद्युतिक आवेशके परस्पर क्रिया विद्युच्चुम्बकीय बलके स्रोत हे, जे भौतिकशास्त्रमे चार मूलभूत अन्योन्य क्रियामेसे एक हे । फोटोन-मध्यस्थ आवेशित कणके बीचके अन्योन्यक्रियाके अध्ययन प्रमात्रा विद्युद्गतिकी कहलाहे ।

वैद्युतिक आवेश दु प्रकारके होवहे:

  • धन आवेश
  • ऋण आवेश

सन्दर्भ

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