Wp/mag/लक्ष्मी
| लक्ष्मी | |
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| धन, स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख, शक्ति, भोजन, वैभव, धैर्य, मोक्ष, प्रेम, सौन्दर्य, स्त्रीत्व आउ सन्तानके देवी ,मूल प्रकृति, जगनमाता, ब्रह्मजननी, आदिशक्ति , जगदम्बा । धन, वैभव, धन्य, सुख सम्पति, ऐश्वर्या, सौभाग्य, समृद्धि आउ करुणाके देवी | |
देवी महालक्ष्मी अपन दिव्य कमल पर बैकुण्ठमे विराजमान | |
| अन्यनाम | भार्गवी, श्री, विष्णुप्रिया, सिन्धुसूता, महालक्ष्मी, रुक्मिणी, सीता, अष्टलक्ष्मी, नारायणी, भगवती ,माधवी ,वैष्णवी, वाराही, नरसिंही, अम्बाबाई , करवीरपुरवासिनी , जगतजननी , चन्द्रसहोदरी |
| देवनागरी | लक्ष्मी |
| संस्कृत लिप्यन्तरण | लक्ष्मी |
| तमिल्लिपि | லட்சுமி |
| तमिल् लिप्यन्तरण | Laṭchumi |
| कन्नडलिपि | ಲಕ್ಷ್ಮಿ |
| कन्नड लिप्यन्तरण | Lakṣmī |
| सम्बन्ध | महादेवी, आदि शक्ति, आदि पराशक्ति आउ जगदम्बा |
| निवासस्थान | बैकुण्ठ, मणिद्वीप , क्षीरसागर |
| मन्त्र | ॐ श्रीं श्रीयें नमः |
| अस्त्र | कमल, चक्र, शङ्ख, गदा, अक्षय पात्र, वर मुद्रा, अभय मुद्रा आउ धनुष - बाण |
| प्रतीक | श्री यन्त्र |
| दिवस | शुक्रवार |
| जीवनसङ्गी | विष्णु |
| भाई-बहिन | अलक्ष्मी, चन्द्रदेव ,शुक्राचार्य |
| सन्तान | कामदेव, १८ पुत्र, ब्रह्मदेव, देवसेना, वल्ली |
| सवारी | उल्लू, गरुड़, शेषनाग आउ कमल |
लक्ष्मी हिन्दुधर्मके एक प्रमुख देवी हथिन । ऊ भगवान् विष्णुके पत्नी हथिन । पार्वती आउ सरस्वतीके साथे ऊ त्रिदेवीमे से एक आउ धन, सम्पदा, शान्ति आउ समृद्धिके देवी मानल जा हथिन । दीपावलीके त्योहारमे उनकर गणेश सहित पूजा कैल जा है । जिनकर उल्लेख सबसे पहिले ऋग्वेदके श्री सूक्तमे मिलऽ है ।
गायत्रीके कृपासे मिले वाला वरदानमे एक लक्ष्मियो है । जेकरा पर ई अनुग्रह उतरता है, ऊ दरिद्र, दुर्बल, कृपण, असन्तुष्ट एवं पिछड़ापनसे ग्रसित न रहै । स्वच्छता एवं सुव्यवस्थाके स्वभावोके 'श्री' कहल गेलै हे । ई सद्गुण जन्ने होतै, ओहाँ दरिद्रता, कुरुपता टिक न सकतै ।
पदार्थके मनुष्यला उपयोगी बनावे आउ ओकर अभीष्ट मात्रा उपलब्ध करे के क्षमताके लक्ष्मी कहल जा है । यों प्रचलनमे त 'लक्ष्मी' शब्द सम्पत्तिला प्रयुक्त होवऽ है, पर वस्तुतः ऊ चेतनाके एक गुण है, जेकर आधार पर निरुपयोगी वस्तुओके उपयोगी बनावल जा सकऽ है । मात्रामे स्वल्प होइतहुँ उनकर भरपूर लाभ सत्प्रयोजनला उठा लेल एक विशिष्ट कला है । ऊ जेकरा आवऽ हथिन ओकरा लक्ष्मीवान्, श्रीमान् कहल जा है । शेष अमीर लोगके धनवान् भर कहल जा है । गायत्रीके एक किरण लक्ष्मियो है । जे एकरा प्राप्त करऽ है, ओकरा स्वल्प साधनोमे अथर् उपयोगके कला आवेके कारण सदा सुसम्पन्न नियन प्रसन्नता बनल रह है ।
श्री, लक्ष्मीला एक सम्मानजनक शब्द, पृथ्वीके मातृभूमिके रूपमे सांसारिक क्षेत्रके प्रतिनिधित्व करऽ है, जेकरा पृथ्वी माताके रूपमे सन्दर्भित कैल जा है, आउ ओकरा भु देवी आउ श्री देवीके अवतार मानल जा है ।
जैनोधर्ममे लक्ष्मी एक महत्वपूर्ण देवी हथिन आउ जैन मन्दिरमे पाएल जा हथिन । लक्ष्मियो बौद्धला प्रचुरता आउ भाग्यके देवी रहलथिन हे, आउ उनका बौद्धधर्मके सबसे पुरान जीवित स्तूप आउ गुफा मन्दिरके प्रतिनिधित्व कैल गेलै हल ।
अर्थ
[edit | edit source]धनके अधिक मात्रामे सङ्ग्रह होवे मात्रसे कौनोके सौभाग्यशाली न कहल जा सकै । सद्बुद्धिके अभावमे ऊ नशाके काम करऽ है, जे मनुष्यके अहंकारी, उद्धत, विलासी आउ दुर्व्यसनी बना दे है । सामान्यतः धन पाकर लोग कृपण, विलासी, अपव्ययी आउ अहंकारी हो जा है । लक्ष्मीके एक वाहन उलूक मानल गेलै हे । उलूक अथार्त् मूखर्ता । कुसंस्कारी व्यक्तिके अनावश्यक सम्पत्ति मूर्खे बनावऽ है । ओकरासे दुरुपयोगे बन पड़ऽ है आउ ओकर फल स्वरूप ऊ आहते होवऽ है ।
स्वरूप
[edit | edit source]माता महालक्ष्मीके अनेक रूप है जेकरामे से उनकर आठ स्वरूप जिनका अष्टलक्ष्मी कहल जा है प्रसिद्ध है । लक्ष्मीके अभिषेक दु हाथी करऽ है । ऊ कमलके आसन पर विराजमान हथिन ।
कमल कोमलताके प्रतीक है । लक्ष्मीके एक मुख, चार हाथ है । ऊ एक लक्ष्य आउ चार प्रकृति (दूरदर्शिता, दृढ़ सङ्कल्प, श्रमशीलता एवं व्यवस्था शक्ति) के प्रतीक है । दु हाथमे कमल-सौन्दर्य आउ प्रामाणिकताके प्रतीक है । दान मुद्रासे उदारता आउ आशीर्वाद मुद्रासे अभय अनुग्रहके बोध होवऽ है । वाहन-उलूक, निर्भीकता एवं रात्रिमे अन्धेरोमे देखेके क्षमताके प्रतीक है ।
कोमलता आउ सुन्दरता सुव्यवस्थेमे सन्निहित रहऽ है । कलो एही सत्प्रवृत्तिके कहल जा है । लक्ष्मीके एक नाम कमलो है । एकरे सङ्क्षेपमे कला कहल जा है । वस्तुके सम्पदाके सुनियोजित रीतिसे सद्दुश्यला सदुपयोग कैल, ओकरा परिश्रम एवं मनोयोगके साथ नीति आउ न्यायके मयार्दामे रहके उपार्जित कैलो अथर्कलाके अन्तगर्त आवऽ है । उपार्जन अभिवधर्नमे कुशल होएल श्री तत्त्वके अनुग्रहके पूवार्ध है । उत्तरार्ध ऊ है जेकरामे एको पाईके अपव्यय न कैल जाए । एक-एक पैसाके सदुद्देश्येला खर्च कैल जा है ।
लक्ष्मीके जल-अभिषेक करे वाला दु गजराजके परिश्रम आउ मनोयोग कहल जा है । उनकर लक्ष्मीके साथे अविच्छिन्न सम्बन्ध है । ई युग्म जन्हुँ रहतै, ओहाँ वैभवके, श्रेय-सहयोगके कमी रहबे न करतै । प्रतिभाके धनी पर सम्पन्नता आउ सफलताके वर्षा होवऽ है आउ उनका उत्कर्षके अवसर पग-पग पर उपलब्ध होवऽ है ।
गायत्रीके तत्त्वदशर्न एवं साधन क्रमके एक धारा लक्ष्मी है । एकर शिक्षण ई है कि अपनामे ऊ कुशलताके, क्षमताके अभिवृद्धिके जाये, त कहियो रहलऽ, लक्ष्मीके अनुग्रह आउ अनुदानके कमी न रहतै । ओकर अतिरिक्त गायत्री उपासनाके एक धारा 'श्री' साधना है । उनकर विधान अपनावे पर चेतना-केन्द्रमे प्रसुप्त पड़ल ऊ क्षमता जागृत होवऽ है, जिनकर चुम्बकत्वसे खिँचैत धन-वैभव उपयुक्त मात्रामे सहजे एकत्रित होबैत रहऽ है । एकत्रित होवे पर बुद्धिके देवी सरस्वती ओकरा सञ्चित न रहे देथिन, वरन परमार्थ प्रयोजनमे ओकर सदुपयोगके प्रेरणा दे हथिन । पुस्तक 'महालक्ष्मीके आत्मकथन'[1] (निहार शतपथी, राजमङ्गल प्रकाशन, 2020) देवी महालक्ष्मीके बारेमे एक महत्वपूर्ण पुस्तक है ।
फलदायक
[edit | edit source]लक्ष्मी प्रसन्नताके, उल्लासके, विनोदके देवी हथिन । ऊ जन्ने रहथिन हँसे-हँसावेके वातावरण बनल रहतै । अस्वच्छतो दरिद्रता है । सौन्दर्य, स्वच्छता एवं कलात्मक सज्जेके दोसर नाम है । लक्ष्मी सौन्दर्यके देवी है । उ जन्ने रहथिन तन्ने स्वच्छता, प्रसन्नता, सुव्यवस्था, श्रमनिष्ठा एवं मितव्ययिताके वातावरण बनल रहतै ।
गायत्रीके लक्ष्मी धाराके आववाहन करे वाला श्रीवान बनऽ हथिन आउ ओकर आनन्द एकाकी न लेके असङ्ख्यके लाभान्वित करऽ हथिन ।
विष्णु-लक्ष्मी विवाह
[edit | edit source]महर्षि दुर्वासाके श्रापके फलीभूत करेला जखनी माता लक्ष्मी ई संसारके छोड़ देलन हल आउ समुद्रमे निवास करे लगलन हल, तखनी देवता माता लक्ष्मी आउ अमृतला समुद्र मन्थन कैलन हल । शरद पूर्णिमाके दिन समुद्र मन्थनसे माता श्री लक्ष्मी पुनः प्रकट होलन आउ माता लक्ष्मी शरद पूर्णिमेके दिन भगवान् विष्णुसे पुनः विवाह कैलन ।
एकरो देखथिन
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "Mahalakshmi Ke Atmakathan | Rajmangal Publishers | Hindi Book Publishers india". Rajmangal Publishers. अभिगमन तिथि 2023-01-02.
बाहरी कड़ी
[edit | edit source]| विकिमीडिया कॉमन्स् पर लक्ष्मी से सम्बन्धित मीडिया हे । |
Archived 2023-09-05 at the वेबैक मशीन