Wp/mag/रुद्र
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रुद्र देवता वैदिक वाङ्मयमे एक शक्तिशाली देवता मानल गेलन हे । ई ऋग्वेदमे वर्णनके मात्रात्मक दृष्टिसे गौण देवताके रूपेमे वर्णित हथिन ।[1] ऋग्वेदमे रुद्रके स्तुति 'बलवानमे सबसे अधिक बलवान' कहके कैल गेलै हे ।[2] यजुर्वेदके रुद्राध्याय, रुद्र देवताके समर्पित है । एकर अन्तर्गत आएल मन्त्र शैव सम्प्रदायोमे बड़ी महत्त्वपूर्ण मानल जा है । रुद्रेके कल्याणकारी होवेसे शिव कहल गेलै हे ।[3] वैदिक वाङ्मयमे मुख्यतः एके रुद्रके बात कहल गेलै हे; किन्तु पुराणमे एकादश रुद्रके मान्यता अत्यधिक प्रधान हो गेलै हे ।
पौराणिक मान्यता
पुराणमे 'रुद्र' के शिव से अभिन्न मानल गेलै हे । रुद्रके शिवेके पर्याय मानल गेलै हे । इनकर अष्टमूर्तिके सङ्केत त यजुर्वेदोमे है;[4] किन्तु अनेक पुराणमे एकरासे सम्बद्ध कथा विस्तारसे देल गेलै हे ।[5]
एकरो देखथिन
सन्दर्भ
- ↑ वैदिक माइथोलाॅजी, अनुवादक-रामकुमार राय, चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी, संस्करण-२०१४ ई, पृ १३९ ।
- ↑ ऋग्वेदके सुबोध भाष्य (भाग-२)-२.३३.३, श्रीपाद् दामोदर सातवलेकर, स्वाध्याय मण्डल पारडी,गुजरात; संस्करण-२००७ ई, पृ ९० ।
- ↑ ऋग्वेद-१०.९२.९ ।
- ↑ यजुर्वेद-३९-८ ।
- ↑ (क) वायुपुराणम्, अध्याय-२७, (हिन्दी अनुवाद सहित), हिन्दी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद, संस्करण-2005, पृ १९२ से १९६; (ख) ब्रह्माण्डमहापुराणम् (सटीक), चौखम्बा संस्कृत सीरीज ऑफिस, वाराणसी, संस्करण-2014 ई, पूर्वभाग, अध्याय-१०, पृ ९० से ९७ ।