Wp/mag/रामनवमी
| रामनवमी | |
|---|---|
भगवान राम, माता सीता, कनक मन्दिर, अयोध्या | |
| अनुयायी | हिन्दु |
| प्रकार | हिन्दु |
| उद्देश्य | श्रीरामके जन्मदिन |
| उत्सव | चैत्र नवरात्रिका अन्तिम दिवस |
| अनुष्ठान | पूजा, व्रत, उपवास, कथा, हवन, दान |
| तिथि | चैत्र शुक्ल नवमी[1] |
| आवृत्ति | वार्षिक |
रामनवमी के त्यौहार चैत्र मासके शुक्ल पक्षके नवमीके मनावल जा है जे अप्रैल-मईमे आवऽ है । हिन्दु धर्मशास्त्रके अनुसार ई दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीरामके जनम होलै हल । [2]

- चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ ।
- उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्चस्थे ग्रहपञ्चके ॥
- मेषं पूषणि सम्प्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये ।
- आविरसीत्सकलया कौसल्यायां परः पुमान् ॥ (निर्णय सिन्धु)
गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस बालकाण्डमे स्वयं लिखलन हे कि ऊ रामचरितमानसके रचनाके आरम्भ अयोध्यापुरीमे विक्रम संवत् १६३१ (१५७४ ईस्वी) के रामनवमी (मङ्गलवार) के कैलन हल । गोस्वामीजी रामचरितमानसमे श्रीरामके जनमके वर्णन ई प्रकार कैलन हे -
- भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी ।
- हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ॥
- लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी ।
- भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी ॥
- कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौँ अनन्ता।
- माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनन्ता॥
- करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिँ श्रुति सन्ता।
- सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रकट श्रीकन्ता ॥
राम जन्म कथा
[edit | edit source]हिन्दु धर्म शास्त्रके अनुसार त्रेतायुगमे रावणके अत्याचारके समाप्त करे आउ धर्मके पुनः स्थापनाला भगवान विष्णु मृत्युलोकमे श्रीरामके रूपमे अवतार लेलन हल । श्रीरामचन्द्रजीके जनम चैत्र शुक्लके नवमीके दिन पुनर्वसु नक्षत्र आउ कर्क लग्नमे रानी कौशल्याके कोखसे राजा दशरथके घरे होलै हल ।
रामायणके अनुसार अयोध्याके राजा दशरथके तीन पत्नी हलन किन्तु बड़ी समय तक कोनो राजा दशरथके सन्तानके सुख न दे पावलन हल जेकरासे राजा दशरथ बड़ी परेशान रहऽ हलन । पुत्र प्राप्तिला राजा दशरथके ऋषि वशिष्ठ पुत्रकामेष्टि यज्ञ करावेके विचार देलन । एकर पश्चात् राजा दशरथ अपन जमाई, महर्षि ऋष्यशृङ्गसे यज्ञ करावलन । तत्पश्चात् यज्ञकुण्डसे अग्निदेव अपन हाथमे खीरके कटोरी लेके बाहरे निकललन ।[3]
यज्ञ समाप्तिके बाद महर्षि ऋष्यशृङ्ग दशरथके तीनो पत्नीके एक-एक कटोरी खीर खाएला देलन । खीर खाएके कुछ महीना बादे तीनो रानी गर्भवती हो गेलन । ठीक ९ महीना बाद राजा दशरथके सबसे बड़ रानी कौशल्या श्रीरामके जे भगवान विष्णुके सतमा अवतार हलन, कैकयी भरतके आउ सुमित्रा जुड़वा लैकन लक्ष्मण आउ शत्रुघ्नके जनम देलन । भगवान रामके जनम धरती पर दुष्ट प्राणीके संहार करेला होलै हल ।[3]
रामनवमी पूजन
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रामनवमीके त्यौहारके महत्व हिन्दुधर्म सभ्यतामे महत्वपूर्ण रहलै हे । ई पर्वके साथे माता दुर्गाके नवरात्रोके समापन होवऽ है । हिन्दुधर्ममे रामनवमीके दिन पूजा अर्चना कैल जा है । रामनवमीके पूजामे पहिले देवता पर जल, रोली आउ लेपन चढ़ावल जा है । एकर बाद मूर्ती पर मुट्ठी भरके चौर चढ़ावल जा है । पूजाके बाद आरती कैल जा है । कुछ लोग ई दिन व्रतो रखऽ हथिन ।[4]
रामनवमीके महत्व
[edit | edit source]ई पर्व भारतमे श्रद्धा आउ आस्थाके साथे मनावल जा है । रामनवमिएके दिन चैत्र नवरात्रो समाप्ति हो जा है । हिन्दुधर्म शास्त्रके अनुसार ई दिन भगवान श्रीरामजीके जनम होलै हल । अतः ई शुभ तिथिके भक्त लोग रामनवमीके रूपमे मनावऽ हथिन एवं पवित्र नदीमे स्नान करके पुण्यके भागीदार होवऽ हथिन ।[5]
सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "Google Books". Google. अभिगमन तिथि 4 April 2025.
- ↑ "प्रभु श्रीराम की असली जन्म दिनांक". hindi.webdunia.com (Hindi मे). 26 July 2014. मूल से 1 September 2014 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 April 2025.
- 1 2 "रामनवमी का इतिहास". पंजाब केसरी. मूल से 29 मार्च 2020 के पुरालेखित.
- ↑ "रामनवमी पर ऐसे करें भगवान राम का पूजन, पूर्ण होगी हर इच्छा". पत्रिका. मूलसे 29 मार्च 2020 के पुरालेखित.
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