Jump to content

Wp/mag/रामनवमी

From Wikimedia Incubator
< Wp | mag
Wp > mag > रामनवमी
रामनवमी
भगवान राम, माता सीता, कनक मन्दिर, अयोध्या
अनुयायीहिन्दु
प्रकारहिन्दु
उद्देश्यश्रीरामके जन्मदिन
उत्सवचैत्र नवरात्रिका अन्तिम दिवस
अनुष्ठानपूजा, व्रत, उपवास, कथा, हवन, दान
तिथिचैत्र शुक्ल नवमी[1]
आवृत्तिवार्षिक

रामनवमी के त्यौहार चैत्र मासके शुक्ल पक्षके नवमीके मनावल जा है जे अप्रैल-मईमे आवऽ है । हिन्दु धर्मशास्त्रके अनुसार ई दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीरामके जनम होलै हल । [2]

अयोध्या, उत्तरप्रदेश स्थित जन्मभूमि मन्दिरमे श्री "राम" के प्रतिमा
चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ ।
उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्चस्थे ग्रहपञ्चके ॥
मेषं पूषणि सम्प्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये ।
आविरसीत्सकलया कौसल्यायां परः पुमान् ॥ (निर्णय सिन्धु)

गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस बालकाण्डमे स्वयं लिखलन हे कि ऊ रामचरितमानसके रचनाके आरम्भ अयोध्यापुरीमे विक्रम संवत् १६३१ (१५७४ ईस्वी) के रामनवमी (मङ्गलवार) के कैलन हल । गोस्वामीजी रामचरितमानसमे श्रीरामके जनमके वर्णन ई प्रकार कैलन हे -

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ॥
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी ।
भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी ॥
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौँ अनन्ता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनन्ता॥
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिँ श्रुति सन्ता।
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रकट श्रीकन्ता ॥

राम जन्म कथा

[edit | edit source]

हिन्दु धर्म शास्त्रके अनुसार त्रेतायुगमे रावणके अत्याचारके समाप्त करे आउ धर्मके पुनः स्थापनाला भगवान विष्णु मृत्युलोकमे श्रीरामके रूपमे अवतार लेलन हल । श्रीरामचन्द्रजीके जनम चैत्र शुक्लके नवमीके दिन पुनर्वसु नक्षत्र आउ कर्क लग्नमे रानी कौशल्याके कोखसे राजा दशरथके घरे होलै हल ।

सम्पूर्ण भारतमे रामनवमी मनावल जा है । तेलङ्गाणाके भद्राचलम मन्दिर ऊ सब स्थानमे है जने रामनवमी बड़ धूमधामसे मनावल जा है ।

रामायणके अनुसार अयोध्याके राजा दशरथके तीन पत्नी हलन किन्तु बड़ी समय तक कोनो राजा दशरथके सन्तानके सुख न दे पावलन हल जेकरासे राजा दशरथ बड़ी परेशान रहऽ हलन । पुत्र प्राप्तिला राजा दशरथके ऋषि वशिष्ठ पुत्रकामेष्टि यज्ञ करावेके विचार देलन । एकर पश्चात् राजा दशरथ अपन जमाई, महर्षि ऋष्यशृङ्गसे यज्ञ करावलन । तत्पश्चात् यज्ञकुण्डसे अग्निदेव अपन हाथमे खीरके कटोरी लेके बाहरे निकललन ।[3]

यज्ञ समाप्तिके बाद महर्षि ऋष्यशृङ्ग दशरथके तीनो पत्नीके एक-एक कटोरी खीर खाएला देलन । खीर खाएके कुछ महीना बादे तीनो रानी गर्भवती हो गेलन । ठीक ९ महीना बाद राजा दशरथके सबसे बड़ रानी कौशल्या श्रीरामके जे भगवान विष्णुके सतमा अवतार हलन, कैकयी भरतके आउ सुमित्रा जुड़वा लैकन लक्ष्मण आउ शत्रुघ्नके जनम देलन । भगवान रामके जनम धरती पर दुष्ट प्राणीके संहार करेला होलै हल ।[3]

रामनवमी पूजन

[edit | edit source]
राम, सीता, लक्ष्मण एवं हनुमान रामनवमी पूजने एगो घरमे

रामनवमीके त्यौहारके महत्व हिन्दुधर्म सभ्यतामे महत्वपूर्ण रहलै हे । ई पर्वके साथे माता दुर्गाके नवरात्रोके समापन होवऽ है । हिन्दुधर्ममे रामनवमीके दिन पूजा अर्चना कैल जा है । रामनवमीके पूजामे पहिले देवता पर जल, रोली आउ लेपन चढ़ावल जा है । एकर बाद मूर्ती पर मुट्ठी भरके चौर चढ़ावल जा है । पूजाके बाद आ‍रती कैल जा है । कुछ लोग ई दिन व्रतो रखऽ हथिन ।[4]

रामनवमीके महत्व

[edit | edit source]

ई पर्व भारतमे श्रद्धा आउ आस्थाके साथे मनावल जा है । रामनवमिएके दिन चैत्र नवरात्रो समाप्ति हो जा है । हिन्दुधर्म शास्त्रके अनुसार ई दिन भगवान श्रीरामजीके जनम होलै हल । अतः ई शुभ तिथिके भक्त लोग रामनवमीके रूपमे मनावऽ हथिन एवं पवित्र नदीमे स्नान करके पुण्यके भागीदार होवऽ हथिन ।[5]

सन्दर्भ

[edit | edit source]
  1. "Google Books". Google. अभिगमन तिथि 4 April 2025.
  2. "प्रभु श्रीराम की असली जन्म दिनांक". hindi.webdunia.com (Hindi मे). 26 July 2014. मूल से 1 September 2014 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 April 2025.
  3. 1 2 "रामनवमी का इतिहास". पंजाब केसरी. मूल से 29 मार्च 2020 के पुरालेखित.
  4. "रामनवमी पर ऐसे करें भगवान राम का पूजन, पूर्ण होगी हर इच्छा". पत्रिका. मूलसे 29 मार्च 2020 के पुरालेखित.

  5. Archived 2017-04-03 at the वेबैक मशीन | देशबन्धु वेबसाइट