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Wp/mag/ब्रह्मसूत्र

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978-8120815735, पृष्ठ 210-212michael Comans (1993), आधुनिक आउ शास्त्रीय अद्वैत वेदान्तमे समाधिके महत्वके सवाल, दर्शन पूर्व
978-8120815735, पृष्ठ 210-212michael Comans (1993), आधुनिक आउ शास्त्रीय अद्वैत वेदान्तमे समाधिके महत्वके प्रश्न, दर्शन पूर्व

ब्रह्मसूत्र वेदान्त दर्शनके आधारभूत ग्रन्थ है । एकर रचयिता महर्षी बादरायण हथिन । एकरा वेदान्त सूत्र, उत्तर-मीमांसा सूत्र, शारीरक सूत्र आउ भिक्षु सूत्र आदिके नामोसे जानल जाहै । एकरा पर अनेक आचार्य सब भाष्यो लिखलन हे । ब्रह्मसूत्रमे उपनिषदके दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विचारके साररूपमे एकीकृत कैल गेलै हे ।

वेदान्तके तीन मुख्य स्तम्भ मानल जाहै - उपनिषद्, श्रीमद्भगवद्गीता एवं ब्रह्मसूत्र । ई तीनोके प्रस्थानत्रयी कहल जा है । एकरामे उपनिषद् सबके श्रुति प्रस्थान, गीताके स्मृति प्रस्थान आउ ब्रह्मसूत्र सबके न्याय प्रस्थान कहल जाहै । ब्रह्मसूत्र सबके न्याय प्रस्थान कहेके अर्थ है कि ई वेदान्तके पूर्णतः तर्कपूर्ण ढङ्गसे प्रस्तुत करऽहै । (न्याय = तर्क)

परिचय

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प्राचीन परम्पराके अनुसार वेदान्तसूत्रके लेखक बादरायण मानल जा हथिन । पर ई सब सूत्रेमे बादरायणके नामोल्लेख करके उनकर मतके उद्धरण देल गेलै हे अतः कुछ लोग एकरा बादरायणके कृति न मानके कौनो परवर्ती संग्राहकके कृति कहऽ हथिन । बादरायण आउ व्यासके कहियो-कहियो एके मानल जाहै । जैमिनि अपन पूर्वमीमांसासूत्रमे बादरायणके एवं बादरायण वेदान्तसूत्र सबमे जैमिनिके उल्लेख कैलन हे । यदि बादरायण आउ व्यास एके हथिन त महाभारतके परम्पराके अनुसार जैमिनि व्यासके शिष्य हलन । आउ गुरु अपन कृतिमे शिष्यके मतके उल्लेख करथिन, ई विचित्र नियन लगऽहै ।

ई सब सूत्रमे साङ्ख्य, वैशेषिक, जैन आउ बौद्ध मतके आउ सङ्केत भेटऽहै । गीता दनहुँ इशारा कैल गेलै हे । ई सब सूत्रमे बड्डीमनी ऐसन आचार्य आउ उनकर मतके उल्लेख है जे श्रौतसूत्रोमे उल्लिखित है । गरुड़पुराण, पद्मपुराण आउ मनुस्मृति वेदान्त सूत्रके चर्चा करऽहै । हापकिंसके अनुसार हरिवंशके रचनाकाल ईसाके दोसर शताब्दी है आउ एकरामे स्पष्ट रूपसे वेदान्तसूत्रके उल्लेख है । कीथके अनुसार ई रचना २०० ई के बादके न होतै । जाकोबी एकरा २०० से ४५० ई के बीचके मानऽहथिन । मैक्समूलर एकरा भगवद्गीताके पहिलेके रचना मानऽहथिन काहेकि ओकरामे ब्रह्मसूत्र शब्द आएल है जे वेदान्तसूत्रके पर्यायवाची है । भारतीय विद्वान् एकर रचनाकाल ईपू ५०० से २०० के बीच मानऽ हथिन ।

ब्रह्मसूत्रमे चार अध्याय है जेकर नाम है - समन्वय, अविरोध, साधन एवं फल । प्रत्येक अध्यायके चार पाद है । कुल मिलाके एकरामे ५५५ सूत्र है ।

अध्याय नामसूत्र संख्याअधिकरण संख्या
समन्वय13439
अविरोध15747
साधन18667
फल7838
कुल555191

जौन प्रकार मीमांसासूत्रमे वेदके कर्मकाण्ड भागके व्यख्या प्रस्तुत कैल गेलै हे ओही प्रकार चार अध्यायमे विभाजित लगभग ५०० वेदान्तसूत्र सबमे वैदिक वाङ्मयके अन्तिम भाग अर्थात् उपनिषद सबके व्याख्या देल गेलै हे । उपनिषद सबमे प्रतिपादित सिद्धान्त एत्ता परस्पर विरोधी एवं बिखरल है कि ओकरासे एक प्रकारके दार्शनिक मत निकालल कठिन है । वेदान्त सूत्र 'समन्वय' के सिद्धान्तके सहारा लेके उपनिषद सबमे एक दार्शनिक दृष्टिके प्रतिपादन करऽहै । पर ई सब सूत्र स्वयं एत्ते सङ्क्षिप्त है कि बिन व्याख्याके सहारे ओकरासे अर्थ निकालल कठिन है । इनकर सङ्क्षिप्तताके कारण एकरा पर ढेर व्याख्या लिखल गेलै जे परस्पर विरोधी दृष्टिसे वेदान्तके प्रतिपादन करऽहै । वेदान्तके सब प्रस्थान ई सभ सूत्रके अपन प्रमाण मानऽ है । ब्रह्मके प्रतिपादन करेके कारण ई सब सूत्रके ब्रह्मसूत्रो कहल जा है ।

भाष्य

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ब्रह्मसूत्र पर बड्डीमनी भाष्य लिखल गेलै है । ओकरामे सबसे प्राचीन श्री निम्बार्क भाष्य है । श्री शङ्कराचार्यके भाष्य पर वाचस्पति मिश्र एवं पद्मपाद भाष्य लिखलन । श्री रामानुजाचार्य द्वारा ब्रह्मसूत्रके जे भाष्य लिखल गेलै ओकर नाम 'श्रीभाष्य' है ।

एकर अतिरिक्त श्री मध्वाचार्य, श्रीजयतीर्थ, श्री व्यासतीर्थ, श्री भास्कर, आदियो ब्रह्मसूत्रके भाष्य लिखलन हे ।

ब्रह्मसूत्रके कुछ भाष्य
सूत्रकार शताब्दी दर्शन सम्प्रदाय विषय/प्रभाव[1][2]
श्री आदि शंकराचार्य[3] ५मा शताब्दी ईपू अद्वैत दशनामी एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति
भास्कराचार्य ,[4]
[5]
१०मा शताब्दी भेदाभेद ? भक्ति आन्दोलन
रामानुजाचार्य [6] ११मा शताब्दी विशिष्टाद्वैत श्री (लक्ष्मी) सम्प्रदाय Qualified Advaita
वैष्णव धर्म[7]
मध्वाचार्य[8] १३मा शताब्दी द्वैत ब्रह्म (मध्व) / सम्प्रदाय द्वैतवाद (वैष्णव)
निम्बार्काचार्य [9] ३०९६ ईसापूर्व [10] स्वाभाविक द्वैताद्वैत कुमार सम्प्रदाय द्वैत अद्वैत
श्रीकण्ठ[11] १३मा शताब्दी शैव शैव Theistic Monism
शैव सिद्धान्त[12][13]
वल्लभाचार्य [14] १६मा शताब्दी शुद्धाद्वैत रूद्र सम्प्रदाय शुद्ध अद्वैत
शुक[15] १६मा शताब्दी भेदाभेद ? Revised dualism
बलदेव विद्याभूषण १६मा शताब्दी अचिन्त्यभेदाभेद

(गौडीय वैष्णव)

गौडिय वैष्णव सम्प्रदाय अचिन्त्यभेदाभेद

सन्दर्भ

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  1. Cite error: Invalid <ref> tag; no text was provided for refs named sradhakrish27
  2. Steven Katz (2000), Mysticism and Sacred Scripture, Oxford University Press, ISBN 978-0195097030 , page 12
  3. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 28–39. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  4. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 39–45. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  5. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 45–46. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  6. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 47–60. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  7. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. प॰ 57. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  8. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 61–66. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  9. निम्बार्काचार्य. मूलसे 3 फ़रवरी 2017 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 जून 2020. |archive-date= में तिथि प्राचल का मान जाँची (सहायता)
  10. भगवान् श्रीनिम्बार्काचार्य का आविर्भाव समय.
  11. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 66–78. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  12. K Sivaraman (2001), Śaivism in Philosophical Perspective, Motilal Banarsidass, ISBN 978-8120817715 , pages 33-36, 472-499
  13. Gavin Flood (1989), Shared Realities and Symbolic Forms in Kashmir Śaivism, Numen, Vol. 36, Fasc. 2, pages 225-247
  14. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 88–93. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.
  15. Radhakrishna, Sarvepalli (1960). Brahma Sutra, The Philosophy of Spiritual Life. पप॰ 93–94. मूलसे 9 अप्रैल 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 मार्च 2020.