Wp/mag/ब्रह्मचारिणी
Appearance
| माँ ब्रह्मचारिणी | |
|---|---|
ब्रह्मचारिणी- नवदुर्गामे द्वितीय | |
| देवनागरी | ब्रह्मचारिणी |
| सम्बन्ध | हिन्दु देवी |
| अस्त्र | कमण्डल आउ माला |
| सन्तान | ऋक्, यजुष,साम,अथर्वा (पौत्र: व्याडि, लोकविश्रुत मीमांस, पाणिनी, वररुचि) |
| सवारी | पैर |
ब्रह्मचारिणी माँके नवरात्र पर्वके दोसर दिन पूजा-अर्चना कैल जा है ।[1] साधक ई दिन अपन मनके माँके चरणमे लगावऽ हथिन । ब्रह्मके अर्थ है तपस्या आउ चारिणी मने आचरण करे वाली । ई प्रकार ब्रह्मचारिणीके अर्थ होलै तपके आचरण करे वाली । इनकर दहिना हाथमे जपके माला एवं बामा हाथमे कमण्डल रहऽ है । ई जानकारी भविष्य पुराण[2] से लेल गेलै हे ।
सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "द्वितीय नवरात्र 2017 : यश, सिद्धि और सर्वत्र विजय के लिए होती है देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा". NDTVIndia (हिन्दी भाषा मे). १९ मार्च 2020. मूल से 9 अगस्त 2019 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि २७ मार्च २०२०.Wp/mag/सीएस१ रखरखाव: नामालूम भाषा (link)
- ↑ Bhavishaya Puran (Tagalog मे). Diamond Pocket Books (P) Limited. प॰ 13. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-81-288-0562-2. अभिगमन तिथि २७ मार्च २०२०.