Wp/mag/बृहद्रथ वंश
बृहद्रथ राजवंश | |||||||||||
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| मध्य वैदिककालसे पूर्व महाजनपद काल तक | |||||||||||
पूर्वी आर्यावर्तमे मगध राज्यके बृहद्रथ राजवंश द्वारा शासन (लगभग ११०० ईपू) | |||||||||||
| राजधानी | राजगीर (गिरिव्रज) | ||||||||||
| प्रचलितभाषा | मागधी | ||||||||||
| धर्म | बौद्धधर्म | ||||||||||
| सरकार | राजतन्त्र | ||||||||||
| महाराजा | |||||||||||
• मध्य वैदिककालमे | बृहद्रथ | ||||||||||
• मध्य वैदिककालमे | महाराजा जरासन्ध | ||||||||||
• उत्तर वैदिककालमे | महाराजा सहदेव | ||||||||||
• लगभग ७३२–६८२ ईपू | महाराजा रिपुञ्जय | ||||||||||
| ऐतिहासिक युग | प्राचीन भारत | ||||||||||
| मुद्रा | पण | ||||||||||
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| अखनि जे देशके भाग हे | भारत | ||||||||||
बृहद्रथ वंश मगध पर शासन करेवाला प्राचीनतम ज्ञात राजवंश हे । एही राजवंशके परिवर्तित नाम रवानी राजवंश भेल । महाभारत आउ पुराणसे ज्ञात होवहे कि प्राग्-ऐतिहासिक कालमे चेदिराज वसुके पुत्र बृहद्रथ गिरिव्रजके राजधानी बनाके मगधमे अपन स्वतन्त्र राज्य स्थापित कैलन हल । बृहद्रथ द्वारा स्थापित राजवंशके बृहद्रथ-वंश कहल गेल । ई वंशके सबसे प्रतापी शासक जरासन्ध हलन जे बृहद्रथके पुत्र हलन ।[1]
स्थिति आउ विस्तार
प्राचीन मगध दक्षिणी बिहारके गया आउ पटना मण्डलके स्थान पर तत्कालीन मगध राज्य हल । एकर उत्तरदने गङ्गानदी, पच्छिमदने सोननदी, पूरुबदने चम्पा नदी आउ दक्खिनदने विन्ध्याचल पर्वतमाला हल ।[2]
इतिहास
महाराजा बृहद्रथ
बृहद्रथ नाम ऋग्वेद (I.36.18, X.49.6) मे भेटहे । रामायण आउ पौराणिक सूत्रके अनुसार उपरिचार वसु राजवंशके राजधानी वसुमती आउ गिरिव्रजके स्थापना कैलन हल । महाभारत आउ पुराणके अनुसार बृहद्रथ उपरीचर वसुके पाँच पुत्रमे सबसे बड़ हलन आउ उनकर रानी गिरिका हलन ।[3]
महाराजा जरासन्ध
जरासन्ध अत्यन्त पराक्रमी आउ साम्राज्यवादी प्रवृत्तिके शासक हलन । जरासन्धके नामके जन्मसूत्रो 'जरा' मे लुकाएल हे । ऊ जनम खनि दु टुकड़ामे विभाजित हलन । जरा माता उनका जोड़लन हल । जरासन्धके नाम पुराणमे ढेर बेर आवहे । जरासन्ध जादवके शत्रु हलन आउ एहीसे महाभारतमे उनकर उल्लेख खलनायकके रूपमे कैल गेल हे ।[4]
हरिवंश पुराणसे ज्ञात होवहे कि ऊ काशी, कोशल, चेदि, मालवा, विदेह, अङ्ग, वङ्ग, कलिङ्ग, पाण्डय, सौबिर, मद्र, कश्मीर आउ गन्धारके राजासभके परास्त कैलन । एही चलचे पुराणमे जरासन्धके महाबाहु, महाबली आउ देवेन्द्रके समान तेज वाला कहल गेल हे ।[5]

जरासन्ध मथुरा शासक कंसके शिवकृपासे प्राप्त दुनो कन्यासे बियाह करलन आउ ब्रहद्रथ वंशके राजधानी वशुमति वा गिरिव्रज वा राजगृहके बनौलन । श्रीकृष्णके सहयोगसे पाण्डव पुत्र भीम जरासन्धके द्वन्द युद्धमे मार देलन । ओकरा बाद उनकर पुत्र सहदेवके शासक बनावल गेल ।[6]
महाराजा सहदेव
सहदेव जरासन्धके पुत्र हलन जिनका जरासन्धके हत्याके बाद पाण्डव मगधके सिंहासन पर बैठौलन हल । सहदेव पाण्डव दनेसे कुरुक्षेत्र युद्ध लड़लन हल । पुराणके अनुसार ऊ अपन चचेरा भाई जयदेवके साथे कुरुक्षेत्र युद्धमे शकुनि द्वारा मर गेलन हल ।[7]
सहदेवके उत्तराधिकारी भेलन सोमधि (वा सोम्फी) जेकि सहदेवके पुत्र हलन । पाण्डव द्वारा उनका अधीनस्थ बनेला सहमत होवेके बाद उनका मगधके सिंहासन पर बैठावल गेल हल । एकर बाद मगध राज्य कुरु राज्यके अधिन शासन करे लगल ।
राजवंशके अन्त
बृहद्रथ वंशके अन्तिम राजा रिपुञ्जय हलन जिनका पुनिक (पुलिक) नामक मन्त्री मार देलक हल । रिपुञ्जयके मृत्युके बाद पुनिक अपने पुत्र प्रद्योतके सिंहासन पर बैठौलक आउ ६८२ ईसा पूर्वमे प्रद्योत राजवंशके स्थापना कैलक ।
वंशावली
- शासकके सूची-
| क्रम | शासक | शासन अवधि (ईपू मे) | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| १ | महाराजा बृहद्रथ | ल १७००–१६८० | राजा बृहद्रथ मगध साम्राज्यके स्थापना कैलन । |
| २ | महाराजा जरासन्ध | ल १६८०–१६६५ | राजा बृहद्रथके पुत्र आउ राजवंशके सबसे शक्तिशाली शासक भीम द्वारा वध कर देल गेलन । |
| ३ | महाराजा सहदेव | ल १६६५–१६६१ | राजा जरासन्धके पुत्र, पाण्डवके अधीन शासन कैलन । |
| ४ | महाराजा सोमधि | ल १६६१–१६०३ | राजा सहदेवके पुत्र |
| ५ | महाराजा श्रुतसरवास | ल १६०३–१५३९ | |
| ६ | महाराजा अयुतायुस | ल १५३९–१५०३ | |
| ७ | महाराजा निरामित्र | ल १५०३–१४६३ | |
| ८ | महाराजा सुक्षत्र | ल १४६३–१४०५ | |
| ९ | महाराजा बृहतकर्मन | ल १४०५–१३८२ | |
| १० | महाराजा सेनाजीत | ल १३८२–१३३२ | |
| ११ | महाराजा श्रुतञ्जय | ल १३३२–१२९२ | |
| १२ | महाराजा विप्र | ल १२९२–१२५७ | |
| १३ | महाराजा सुची | ल १२५७–११९९ | |
| १४ | महाराजा क्षेम्य | ल ११९९–११७१ | |
| १५ | महाराजा सुब्रत | ल ११७१–११०७ | |
| १६ | महाराजा धर्म | ल ११०७–१०४३ | |
| १७ | महाराजा सुसुम | ल १०४३–९७० | |
| १८ | महाराजा द्रिधसेन | ल ९७०–९१२ | |
| १९ | महाराजा सुमति | ल ९१२–८७९ | |
| २० | महाराजा सुबाला | ल ८७९–८५७ | |
| २१ | महाराजा सुनीता | ल ८५७–८१७ | |
| २२ | महाराजा सत्यजीत | ल ८१७–७६७ | |
| २३ | महाराजा विश्वजीत | ल ७६७–७३२ | राजा रिपुञ्जयके पिता |
| २४ | महाराजा रिपुञ्जय | ल ७३२–६८२ | राजा रिपुञ्जय राजवंशके अन्तिम राजा हलन । उनकर हत्या उनकर प्रधानमन्त्री पुलिक द्वारा कर देल गेल आउ अपन पुत्र प्रद्योतके मगधके नया राजा बना देलक आउ प्रद्योत वंश के नीव रखलक । |
एकरो देखथिन
सन्दर्भ
- ↑ Misra, V.S. (2007). Ancient Indian Dynasties, Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, ISBN 81-7276-413-8 , pp.129–36
- ↑ Raychaudhuri, H.C. (1972). Political History of Ancient India, Calcutta: University of Calcutta, p.102
- ↑ Gopal, Madan (1990). के एस गौतम (सम्पा॰). India through the ages. प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार. प॰ 80.
- ↑ "Jarasandha was a very powerful king of Magadha, and the history of his birth and activities is also very interesting - Vaniquotes". vaniquotes.org. मूलसे 29 नवम्बर 2018 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-06-23.
- ↑ Gokhale, Namita (2013-01-21). The Puffin Mahabharata (अङ्ग्रेजी मे). Penguin UK. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-93-5118-415-7.Wp/mag/सीएस१ रखरखाव: नामालूम भाषा (link)
- ↑ Gopal, Madan (1990). K.S. Gautam (सम्पा॰). India through the ages. प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार. प॰ 80.
- ↑ Misra, V.S. (2007). Ancient Indian Dynasties, Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, ISBN 81-7276-413-8 , p.290