Wp/mag/नकुल
| नकुल | |
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नकुलके दर्शावैत १८मा शताब्दीके एक चित्रकला । | |
| व्यक्तिगत जानकारी | |
| सम्बद्धता | पाण्डव आउ अश्विनी |
| हथियार | तलवार |
| परिवार | माता-पिता
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| जीवनसाथी |
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| लैकन | पुत्र |
| सम्बन्धी |
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नकुल महान हिन्दु काव्य महाभारतमे पाँच पाण्डवमे से एक हलन । नकुल आउ सहदेव, दुनो माता माद्रीके असमान जुड़वा पुत्र हलन, जिनकर जन्म दैवीय चिकित्सक अश्विनके वरदान स्वरूप होलै हल जे अपनहुँ समान जुड़वा बन्धु हलन ।
नकुल नामके अर्थ होवऽ है जे प्रेमसे परिपूर्ण होवे आउ ई नामके नौ पुरुष विशेषता है: बुद्धिमत्ता, सकेन्द्रित, परिश्रमी, रूपवान, स्वास्थ्य, आकर्षकता, सफलता, आदर आउ शर्त रहित प्रेम होवऽ है । महाभारतमे नकुलके चित्रण एक बड़ी रूपवान, प्रेम युक्त आउ बड़ी सुन्दर व्यक्तिके रूपमे कैल गेलै हे । अपन सुन्दरताके कारण नकुलके तुलना काम आउ प्रेमके देवता "कामदेव" से कैल गेलै हे । पाण्डवके अन्तिम आउ तेरहमा वर्षके अज्ञातवासमे नकुल अपन रूपके कौरवसे लुकावेला अपन शरीर पर धूरी लीपके लेलन । श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुरके वध करेके पश्चात नकुल द्वारा घुड़ प्रजनन आउ प्रशिक्षणमे निपुण होवेके महाभारतमे अभिलेखाकरण है । ऊ एक योग्य पशु शल्य चिकित्सक हलै जिनका घुड़ चिकित्सामे महारथ प्राप्त हलै । अज्ञातवासके समयमे नकुल भेष बदलके आउ ग्रन्थिक नामके छद्मनामसे महाराज विराटके राजधानी उपपलव्यके घुड़शालामे शाही घोड़ाके देखभाल करे वाला सेवकके रूपमे रहलन हल । ऊ अपन तलवारबाजी आउ घोड़सवारीके कलोला विख्यात हलन । अनुश्रुतिके अनुसा ऊ वर्षामे बिना पानीके छुइले घोड़सवारी कर सकऽ हलन ।
नकुलके विवाह द्रौपदीके अतिरिक्त जरासन्ध की पुत्रियोसे होलै हल ।
जन्म आउ प्रारम्भिक वर्ष
[edit | edit source]पाण्डुके बच्चा पैदा करेमे असमर्थता (ऋषि किन्दमाके श्रापके कारण) के कारण, कुन्तीके अपन तीन लैकनके जन्म देवेला ऋषि दुर्वासा द्वारा देल वरदानके प्रयोग करे पड़लै । ऊ पाण्डुके दोसर पत्न, माद्रीके साथ वरदान साझा कैलन, जे अश्विनी कुमारके नकुल आउ सहदेवके जन्म देवेला आमन्त्रित कैलन । कुरु वंशमे नकुलके सबसे सुन्दर व्यक्तिके रूपमे जानल जा हलै ।[2]
अपन बचपनमे नकुल अपन पिता पाण्डु आउ सतश्रृङ्ग आश्रममे शुक नामक एक साधुके अधीन तलवारबाजी आउ चाकू फेकेमे अपन कौशलमे महारत हासिल कैलन । बादमे पाण्डु अपन पत्नी माद्रीसे प्रेम करेके प्रयास करे पर अपन जान गवा देलन । बादो वाली अपन पतिके चिता (सती) मे आत्मदाह कर लेलन । ई प्रकार नकुल अपन भाईके साथ हस्तिनापुर चल गेलन जने कुन्ती उनकर पालन-पोषण कैलन । कुन्ती उनका अपन पुत्रके समान प्यार करऽ हलन ।[3]
नकुल द्रोणके संरक्षणमे अपन तीरन्दाजी आउ तलवार चलावेके कौशलमे बड़ी सुधार कैलन । नकुल तलवार चलावे वाला निकललन । अन्य पाण्डव भाईके साथे नकुलके कुरु गुरु कृपाचार्य आउ द्रोणाचार्य द्वारा धर्म, विज्ञान, प्रशासन आउ सैन्य कलामे प्रशिक्षित कैल गेलै हल । ऊ घोड़सवारीमे विशेष रूपसे कुशल हलन ।
कौशल
[edit | edit source]- अश्व-पालन: नकुलके घोड़ाके प्रजनन आउ प्रशिक्षणके गहरा समझके महाभारतमे कृष्ण द्वारा नरकासुरके मृत्युके बाद प्रलेखित कैल गेलै हे । विराटके साथ बातचीतमे नकुल घोड़ाके सब बीमारीके इलाजके कला जानेके दावा कैलन । ऊ एक अत्यधिक कुशल सारथियो हलन ।[4][5]
- तलवार चलावे वाला: नकुल एक शानदार तलवारबाज हलन आउ ऊ कुरुक्षेत्र युद्धके १८मा दिन कर्णके तीन पुत्र सुशेन, सत्यसेन आउ प्रसेनके मारित तलवारके अपन कौशल देखौलन हल ।
विवाह आउ लैकन
[edit | edit source]जखनि पाण्डव आउ उनकर माय, कुन्ती, लाक्षगृहके घटनाके बाद लुकाएल हलन, अर्जुन विवाहमे द्रौपदीके हाथ जीत लेलन । नकुल अपन भाईके साथ उनकासे बियाह कैलन आउ उनकर एक बेटा शतानिक हलै, जेकरा कुरुक्षेत्र युद्धमे अश्वत्थामा मार देलन हल ।
ऊ शिशुपालके पुत्री करेनुमातियोसे विवाह कैलन, जिनकासे उनकर एक पुत्र निरामित्र उत्पन्न होलै ।[7]महाभारतके महान युद्धमे कर्ण निरामित्रके हत्या कर देलन हल ।
बादके जीवन आउ मृत्यु
[edit | edit source]युद्धके बाद युधिष्ठिर नकुलके उत्तरी मद्राके राजा आउ सहदेवके दक्षिणी मद्राके राजा नियुक्त कैलन ।[8]
कलियुगके शुरुआत आउ कृष्णके जाए पर पाण्डव सेवानिवृत्त हो गेलन । पाण्डव आउ द्रौपदी अपन सब सामान आउ बन्धन त्यागके एक कुत्ताके साथ हिमालयके तीर्थ यात्राके अन्तिम यात्रा कैलन ।
युधिष्ठिरके छोड़के सब पाण्डव कमजोर हो गेलन आउ स्वर्ग पहुँचेसे पहिलहीँ उनकर मृत्यु हो गेलै । नकुल द्रौपदी आउ सहदेवके बाद गिरे वाला तीसरा व्यक्ति हलन । जखनि भीम युधिष्ठिरसे पूछलन कि नकुल काहे गिरलै, त युधिष्ठिर उत्तर देलन कि नकुलके अपन सुन्दरता पर गर्व है आउ उनकर मानल है कि लौकेमे उनकर बराबर कोई न है ।[9]
सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "The Mahabharata, Book 1: Adi Parva: Sambhava Parva: Section XCV". 2010-01-16. मूल से 16 January 2010 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-09-10.
- ↑ "The five Pandavas and the story of their birth". aumamen.com. अभिगमन तिथि 2020-08-31.
- ↑ Fang, Liaw Yock (2013). A History of Classical Malay Literature. Institute of Southeast Asian. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-981-4459-88-4.
- ↑ "Mahabharata Text".
- ↑ Lochan, Kanjiv (2003). Medicines of early India : with appendix on a rare ancient text (Ed. 1st. संस्करण). Varanasi: Chaukhambha Sanskrit Bhawan. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 9788186937662.
- ↑ Charak, K.S. (1999). Surya, the Sun god (1st संस्करण). Delhi: Uma Publications. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 9788190100823.
- ↑ "The Mahabharata, Book 1: Adi Parva: Sambhava Parva: Section XCV". मूल से 16 January 2010 के पुरालेखित.
- ↑ "Shalya – Vyasa Mahabharata".
- ↑ "The Mahabharata, Book 17: Mahaprasthanika Parva: Section 2".
