Wp/mag/धर्मसूत्र
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धर्मसूत्र सबमे वर्णाश्रम-धर्म, व्यक्तिगत आचरण, राजा एवं प्रजाके कर्त्तव्य आदिके विधान है । ई गृह्यसूत्रके शृङ्खलाके रूपेमे उपलब्ध होवऽ है । श्रौतसूत्रेके समान मानल जा है कि प्रत्येक शाखाके धर्मसूत्रो पृथक्-पृथक् हलै । वर्तमान समयमे सब शाखाके धर्मसूत्र उपलब्ध न होवै । ई अनुपलब्धिके एक कारण ई है कि सम्पूर्ण प्राचीन वाङ्मय आज हमनीके समक्ष विद्यमान न है । ओकर एक बड़ भाग कालकवलित हो गेलै । एकर दोसर कारण ई मानल जा है कि सब शाखाके पृथक्-पृथक् धर्मसूत्रके सम्भवतः प्रणयने न कैल गेलै, काहेकि ई सब शाखाके द्वारा कौनो अन्य शाखाके धर्मसूत्रेके अपना लेल गेलै हल । पूर्वमीमांसामे कुमारिल भट्टो ऐसने सङ्केत देलन हे । धर्मसूत्र चार प्रमुख जातिके स्थिति, व्यवसाय, दायित्व, कर्तव्य तथा विशेषाधिकारमे स्पष्ट विभेद करहै ।
प्रमुख धर्मसूत्र
[edit | edit source]एकरो देखथिन
[edit | edit source]बाहरी कड़ी
[edit | edit source]- धर्मसूत्र (ब्रिटानिका)