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कार्तीय निर्देशाङ्क पद्धतिमे दीर्घवृत्त

गणितमे दीर्घवृत्त एक ऐसन शाङ्कव होवहे जेकर उत्केन्द्रता इकाईसे कम होवहे । एक अन्य परिभाषाके अनुसार, दीर्घवृत्त ऐसन बिन्दुके बिन्दुपथ हे जिनकर दु निश्चित बिन्दुसे दूरीके योग सदैव अचर रहहे । ईसभ निश्चित बिन्दुके दीर्घवृत्तके नाभी (Focus) कहल जाहे । मानल जाहे कि पृथ्वी सहित ढेर ग्रह सूर्यके चारो दन्ने एक दीर्घवृत्तीय कक्षामे घूमहे आउ ई दीर्घवृत्तके एक नाभि पर सूर्य अवस्थित होवहे ।

दीर्घवृत्त

ई प्रकार ई एक वृत्तके सामान्यीकृत रूप होवहे । वृत्त एक विशेष प्रकारके दीर्घवृत्त होवहे जेकरामे दुनो नाभी एके स्थान पर होवहे । एक दीर्घवृत्तके आकार एकर उत्केन्द्रतासे दर्शावल जा हे, जेकर मान दीर्घवृत्तला 0 से लेके 1 के मध्य होवहे । यदि केहु दीर्घवृत्तके उत्केन्द्रता 0 होवे त ऊ दीर्घवृत्त एक वृत्त होवहे ।

कार्तीय निर्देशाङ्क पद्धतिमे दीर्घवृत्त

समीकरण:

दीर्घवृत्तके केन्द्र मूलबिन्दु, मुख्याक्ष x-अक्ष, एवं नाभी आउ शीर्ष

एक दीर्घवृत्त (लाल रङ्ग) जे एक शङ्कु आउ एक आनत समतलके प्रतिच्छेदनसे प्राप्त भेल

तखनि दीर्घवृत्त पर कौनो बिन्दु (x,y) लागि दीर्घवृत्तके समीकरण

या

a: अर्द्ध दीर्घाक्षb: अर्द्ध लघ्वाक्ष c: नाभीय दूरी p: अर्द्ध नाभिलम्ब

एहाँ क्रमशः अर्द्ध दीर्घाक्ष आउ अर्द्ध लघ्वाक्ष कहला हे ।

दीर्घवृत्तके उत्केन्द्रताला सूत्र:

एहाँ उत्केन्द्रता हे ।

ज्यामितीय विशेषता

दीर्घवृत्तके दु अक्षमे से बड़के प्रधान अक्ष कह सकही । दुनो नाभि प्रधान अक्ष पर अवस्थित होवहे आउ दीर्घवृत्त पर स्थित कौनो बिन्दुके ई दुनो नाभीसे दूरीके योग ई प्रधान अक्षके लम्बाईके बराबर मने हमेशा नियत होवहे ।

दीर्घवृत्तके क्षेत्रफल

दीर्घवृत्तके क्षेत्रफल ई सूत्र द्वारा निकालल जा सकहे -

एहाँ a आउ b दीर्घवृत्तके दु अक्षके आधा हे । यदि दीर्घवृत्तके समीकरण ई रूपमे होवे ,

त एकर क्षेत्रफल होत:

परिधि

एकर गणना जटिल होवहे आउ एकर कौनो सरल एवं सटीक सूत्र नै हे । हालाँकि भारतीय गणितज्ञ रामानुजन् द्वारा सुझावल गेल ई सूत्रके सरलतम एवं सटीकतम मानल जा सकहे:

इहो देखी