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Wp/mag/चार आर्यसत्य

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एगो संस्कृत पाण्डुलिपिमे चार आर्यसत्यके उपदेश देइत महात्मा बुद्ध (नालन्दा, बिहार)

आर्यसत्य (पालि : अरियसच्च) के सङ्कल्पना बौद्ध दर्शनके मूल सिद्धान्त है । एकरा संस्कृतमे 'चत्वारि आर्यसत्यानि' आउ पालिमे 'चत्तरि अरियसच्चानि' कहल जा है ।[1]

बौद्धधम्म

श्रेणीके भाग

बौद्धधर्मके इतिहास
· बौद्धधर्मके कालक्रम
· बौद्धसंस्कृति
बुनियादी मनोभाव
चार आर्यसत्य ·
आर्य अष्टाङ्गमार्ग ·
निर्वाण · त्रिरत्न · पञ्चशील
मुख्य व्यक्ति
गौतमबुद्ध · बोधिसत्व
क्षेत्रानुसार बौद्धधर्म
दक्खिनपूरुबी बौद्धधर्म
· चीनी बौद्धधर्म
· तिब्बती बौद्धधर्म ·
पच्छिमी बौद्धधर्म
बौद्ध सम्प्रदाय
थेरवाद · महायान
· वज्रयान
बौद्ध साहित्य
त्रिपिटक · पालि ग्रन्थ सङ्ग्रह
· विनय
· पालिसूत्र · महायानसूत्र
· अभिधर्म · बौद्धतन्त्र

आर्यसत्य चार है - दुक्खं अरियसच्चं, दुक्खसमुदयं अरियसच्चं, दुक्खनिरोधं अरियसच्चं एवं दुक्खनिरोधगामिनी पटिपदा अरियसच्चं ।

  1. दुःख : संसारमे दुःख है,
  2. दुःखसमुदय : दुःखके कारण है,
  3. दुःखनिरोध : दुःखके निवारण है,
  4. दुखनिरोधगामिनी पटिपदा (दुःख-निरोध-गामिनी प्रतिपदा) : निवारणला अष्टाङ्गिक मार्ग है ।

प्राणी जनमभर विभिन्न दुःखके शृङ्खलामे पड़ल रह है । ई दुःख आर्यसत्य है । संसारके विषयके प्रति जे तृष्णा है ओही समुदय आर्यसत्य है । जे प्राणी तृष्णाके साथे मर है ऊ ओकर प्रेरणासे तैयो जनम ग्रहण कर है । एहीसे तृष्णाके समुदय आर्यसत्य कहल जा है । तृष्णाके अशेष प्रहाण कर देल निरोध आर्यसत्य है । तृष्णाके न रहेसे न त संसारके वस्तुके कारण कोनो दुःख होव है आउ न मरणोपरान्त ओकर पुनर्जन्म होव है । बुझाएल प्रदीप नियन ओकर निर्वाण हो जा है । और ई निरोधके प्राप्तिके मार्ग आर्यसत्य - अष्टाङ्गिक मार्ग है । एकर आठ अङ्ग है - सम्यक् दृष्टि, सम्यक् सङ्कल्प, सम्यक् वचन, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीविका, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति आउ सम्यक् समाधि । ई आर्यमार्गके सिद्ध करके ऊ मुक्त हो जा है ।

एकरो देखथिन

बाहरी कड़ी

सन्दर्भ

  1. "गौतम बुद्ध का सम्पूर्ण जीवन". मूल से 23 सितम्बर 2019 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 सितम्बर 2019.