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Wp/mag/गरुड़

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हिन्दु मान्यताके अनुसार गरुड़ पक्षीके राजा आउ भगवान विष्णुके वाहन हथिन । गरुड़ प्रजापति कश्यप आउ उनकर पत्नी विनताके सन्तान आउ अरुणके छोट भाई हथिन । त्रेतायुगमे गरुड़ श्रीरामके छोट भाई आउ राजा दशरथके मञ्झला पुत्र भरतके रूपमे अवतार लेलन हल । गरुड़ आउ अरुणके प्रसिद्ध गरुड़ पक्षीके रूपमे वर्णित कैल गेल है ।

पक्षीराज विनतानन्दन गरुड़

गरुड़के माताके शाप

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महाभारतके अनुसार सतयुगमे दक्ष प्रजापतिके कद्रू आउ विनता नामके दु कन्या हलन । दुनोके बियाह महर्षि कश्यपसे होलै । एक दिन कश्यप दुनोसे वरदान माङ्गेला कहलन । तखनि कद्रू एक हजार नाग पुत्र आउ विनता खाली दु तेजस्वी पुत्र वरदानके रूपमे माङ्गलन । वरदानके परिणामस्वरूप कद्रू एक हजार अण्डा आउ विनता दु अण्डा प्रसव कैलन । कद्रूके अण्डाके फूटे पर उनका एक हजार नाग पुत्र भेट गेल । किन्तु विनताके अण्डा ऊ समय तक न फूटलै । उतावली होके विनता एक अण्डाके फोड़ देलन । ओकरामे से निकले वाला लैका एक गरुड़ हलै । लाल रङ्ग होवेके चलते ओकर नाम अरुण रखल गेलै । ओकर ऊपरी अङ्ग पूरा हो गेलै हल किन्तु नीचेके देह कच्चे हलै । ऊ लैका क्रोधित होके अपन माताके शाप दे देलकै कि माता! तु कच्चा अण्डाके तोड़ देले हे एहीसे तुरो पाँच सौ बरस तक अपन ओही बहिनके दासी बनके रहे पड़तौ जेकरासे तु एतना घृणा करऽ हे । ध्यान रहे दोसर अण्डाके अपनेसे फूटे दिहेँ । ऊ अण्डासे एक अत्यन्त तेजस्वी बालक उत्पन्न होतौ । ओही तोरा ई श्रापसे मुक्त करवैतौ । यदि तू हमर भाइयोके अङ्गहीन कर देले त तु सदा कद्रूके दासी बनके रहबे । एतना कहके अरुण नामक ऊ बालक आकाशमे उड़ गेलै आउ सूर्य नारायणके रथके सारथी बन गेलै ।

विनताके दासी बनल

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एक दिन कद्रू आउ विनताके दृष्टि समुद्र मन्थनसे निकलल उच्चैःश्रवा घोड़ा पर पड़लै । कद्रू कहलन कि ऊ घोड़ाके पोँछ करिया है जखनिकि विनता ओकरा उज्जर रङ्गके बतौलन । एकरा पर दुनोमे शर्त होलै कि जेकर कथन गलत होतै ओकरा दोसरके दासी बने पड़तै । दुनो शर्त मानके पोँछ देखे चललन । कद्रू चुपचाप अपन पुत्र (सर्प सब) के ऊ पोँछसे लिपट जाएके आज्ञा देलन । एकरासे पोँछ करिया लोके लगलै । विनता हार मानके कद्रूके दासी बन गेलन ।

गरुड़के जन्म

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समय आवे पर विनताके दोसर अण्डासे महातेजस्वी गरुड़के उत्पत्ति होलै । उनकर शक्ति आउ गति अद्वितीय हलै । गरुड़ महान पराक्रमी हथिन । ऊ एक बेर चन्द्रलोकसे अमृतकलश तक पर अधिकार कर लेलन हल ।

विनताके दासतासे मुक्ति

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एक दिन कद्रू गरुड़से कहलन कि तु हमर दासीके पुत्र हे एहीसे तु हमर पुत्रके घुमावे ले जो । गरुड़के एकरा पर बड़ी क्रोध ऐले किन्तु ऊ सौतेली मायके आज्ञा मान लेलन । नाग सबके घुमावित गरुड़ उनकासे अपन माताके दासतासे मुक्त कर देवेला कहलन । एकरा पर नाग सब कहलन कि यदि तु हमनी लोगला अमृत ला देबे त हमनी तोर मायके दासतासे मुक्त कर देबौ । गरुड़ इन्द्र सहित सब देवताके परास्त करके अमृत घट उनकासे छीन लेलन । गरुड़के पराक्रमसे प्रभावित होके इन्द्र गरुड़से मित्रता कर लेलन । मित्रता हो जाए पर इन्द्र बोललन, "मित्र! अपने ई अमृत घटके हमरा वापिस दे दऽ काहेकि अपने जेकराला ई ले जा रहलऽ हे ऊ स्वभावतः बड़ी दुष्ट है ।" एकरा पर गरुड़ कहलन, "हमरा पता है किन्तु हम अपन माताके दासतासे मुक्ति देलावेला एकरा उनका पास ले जा रहलन हे । अपने ओहाँसे एकरा वापिस ला सकऽ हथिन । हठात् उनकर भेट नारायण (विष्णु) से हो गेलै । नारायण गरुड़से प्रसन्न होके वर माङ्गेला कहलन । एकरा पर गरुड़ सदा उनकर ध्वजामे बनल रहेके वर ले लेलन । साथे ऊ नारायणके वाहनो बन गेलन । एकर पश्चात् गरुड़ अमृत घटके नाग सबके देके अपन माता विनताके दासतासे मुक्ति देलौलन ।

अमृत घटके कुशासन पर रखके सब नाग पवित्र होवेला स्नान करे चले गेलन । एही बीच इन्द्र चोरीसे ऊ अमृत घटके उठाके ले गेलन । नाग जखनि स्नान करके वापिस ऐलन त ओखनी देखलन कि अमृत कलश गायब हे । उनका लगलै कुशासने पर अमृतके कुछ बून्दा गिर गेलै होत । ओखनी जैसहीँ ऊ कुशासनके चाटलन उनकर जीभके दु भाग हो गेलै आउ ऊ द्विजिह्व (दु जीभ वाला) कहलैलन ।

गरुड़के रामचन्द्रके प्रति भ्रम

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रावणके पुत्र इन्द्रजीत लक्ष्मणसे युद्ध करित लक्ष्मणके नागपाशसे बान्ध देलकै हल । देवर्षि नारदके कहे पर गरूड़ जे नागभक्षी हलै, नागपाशके समस्त नागके खाके रामके नागपाशके बन्धनसे छुड़वौलन । रामके ई प्रकार नागपाशमे बन्ध जाए पर रामके परमब्रह्म होवे पर गरुड़के सन्देह हो गेलै । गरुड़के सन्देह दूर करेला देवर्षि नारद उनका ब्रह्मा भिरु भेजलन । ब्रह्माजी उनकासे कहलन कि तोर सन्देह भगवान शङ्कर दूर कर सकऽ हथुन । भगवान शङ्करो गरुड़के उनकर सन्देह मिटावे काकभुशुण्डिजी भिरु भेज देलन । अन्तमे काकभुशुण्डिजी रामके चरित्रके पवित्र कथा सुनाके गरुड़के सन्देहके दूर कैलन ।

भारतके बाहरे गरुड़

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थाईलैण्डमे

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विवाह आउ सन्तान

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गरुड़ आउ उनकर बड़ भाई अरुणके बियाह पक्षी कुलमे दु बहिनसे होलै हल । गरुड़के पत्नीके नाम उन्नति आउ अरुणके पत्नीके नाम श्येनी है । अरुणके दु पुत्र जटायु आउ सम्पाती होलन आउ गरुड़के पुत्र सुमुख होलन ।

एकरो देखथिन

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सन्दर्भ

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