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Wp/mag/कौरव

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कौरव कौरव क्षत्रिय भारतके एक महान राजा कुरुके वंशजके सन्दर्भित करऽ है जे हिन्दु महाकाव्य महाभारतके ढेर पात्रके पूर्वज हे । आमतौर पर ई शब्दके प्रयोग राजा धृतराष्ट्र आउ उनकर पत्नी गान्धारीके १०० पुत्रला कैल जा है । भाई मे दुर्योधन, दुःशासन, विकर्ण आउ चित्रसेन सबसे लोकप्रिय हे । उनकर दुःशला नामके एक बहिन आउ युयुत्सु नामके एक सौतेला भाइयो हलै । कौरव भारतके अधिकांश राज्यमे पाएल जा हे । राणा कौरवेके एक उपजाति है । कुरुवंशी क्षत्रिय आझो भारतके ढेर राज्यमे निवासरत है । मध्यप्रदेश (दतिया, भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, नरसिंहपुर), उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़ एवं नेपाल आउ श्रीलङ्का आदि जगह कौरव क्षत्रिय आझो निवासरत है ।

कौरव सेना (बामा) पाण्डवके सामना कर रहलै हे । मेवाड़, राजस्थानके १७मा-१८मा शताब्दीके एक चित्र ।

शब्द-साधन

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कौरव शब्दके प्रयोग महाभारतमे दु अर्थमे कैल गेलै हे ।

  • व्यापक अर्थके प्रयोग राजा कुरुके सब वंशजके दर्शावेला कैल जा है । ई अर्थ, जेकरामे पाण्डव भाइयो शामिल हथिन, अक्सर महाभारतके लोकप्रिय अनुवादके पहिलेके भागमे प्रयोग कैल जा है ।[1]
  • कुरुके वंशजके वरिष्ठ वंशावलीके प्रतिनिधित्व करेला संकीर्ण किन्तु अधिक सामान्य अर्थके प्रयोग कैल जा है । ई एकरा राजा धृतराष्ट्रके लैकन तक सीमित रखऽ है । उनकर छोट भाई पाण्डुके लैकनके छोड़के जिनकर लैकन पाण्डव कहला हथिन ।

कौरवके जन्म

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गान्धारीके बियाह धृतराष्ट्रसे होवेके बाद ऊ अपन आँख पर कपड़ा लपेट लेलन आउ अपन पतिके जीवनके अन्धकारके साझा करेके कसम खैलन । एक बेर ऋषि कृष्ण द्वैपायन व्यास हस्तिनापुरमे गान्धारीसे मिले ऐलन आउ ऊ महान सन्तके सुख-सुविधाके बड़ी ख्याल रखलन आउ देखलन कि हस्तिनापुरमे उनकर प्रवास सुखद हलै । सन्त गान्धारीसे प्रसन्न होइलन आउ उनका वरदान देलन । गान्धारी एक सौ पुत्रके कामना करऽ हलन जे उनकर पतिके समान शक्तिशाली होवे । द्वैपायन व्यास उनका वरदान देलन आउ समयके साथे गान्धारी गर्भवती होइलन । किन्तु दु साल बीत गेलै तयो बच्चा पैदा न होलै ।[2] एतनामे कुन्ती आउ पाण्डुके यमसे उनका एक पुत्र प्राप्त होलै जेकर नाम ऊ युधिष्ठिर रखलन । दु वर्षके गर्भावस्थाके बाद गान्धारी एक निर्जीव मांसके सख्त टुकड़ाके जन्म देलन जे एकदम बच्चा न हलै । गान्धारी तबाह हो गेलन हल काहेकि ऊ ऋषि व्यासके आशीर्वादके अनुसार सौ पुत्रके आशा कैलन हल । ऊ मांसके टुकड़ा फेकही वाला हलन कि ऋषि व्यास प्रकट होइलन आउ उनकासे कहलन कि उनकर आशीर्वाद व्यर्थ न जा सकै आउ ऊ गान्धारीसे एक सौ घड़ा घीसे भरेके व्यवस्था करेला कहलन । ऊ गान्धारीसे कहलन कि ऊ मांसके टुकड़ाके सौ टुकड़ामे काट देथिन आउ ओकरा घड़ामे रख देथिन, जेकरासे बादमे ऊ सौ पुत्रमे बदल जैतै जे ऊ चाहऽ हथिन । गान्धारी व्याससे कहलन फिर ओहु चाहऽ हथिन कि उनकर एक बेटी होवे । व्यास सहमत हो गेलन । ऊ मांसके टुकड़ाके एक सौ एक टुकड़ामे काट देलन आउ ओकरामे से प्रत्येकके एक घड़ामे रख देलन । दु साल तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करेके बाद घड़ा खोलेला तैयार हलै आउ उनका एक गुफामे रखल गेलै हल । भीमके जन्म ओही दिन होलै हल जे दिन दुर्योधनके जन्म होलै हल । ई प्रकार ऊ एके उम्र के हो गेलन । दुर्योधनके जन्मके बाद अर्जुन, दुशासन, विकर्ण, नकुल आउ सहदेवके जन्म होलै ।[3]

धृतराष्ट्रके लैकन

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महाकाव्यके अनुसार गान्धारीके ऋषि व्याससे सौ शक्तिशाली पुत्रके वरदान प्राप्त हलै । एक अन्य संस्करणमे कहल गेलै हे कि ऊ लम्बा समय तक कौनो बच्चा पैदा करेमे असमर्थ हलन आउ अन्ततः ऊ गर्भवती हो गेलन किन्तु दु साल तक प्रसव न होलै जेकर बाद ऊ मांसके एक टुकड़ाके जन्म देलन । व्यास ई गाँठके एक सौ एक टुकड़ामे काट देलन आउ अन्ततः ई सौ लैका आउ एक लैकीमे विकसित हो गेलै ।[4] ई सब लैकनके जन्म राज्यके सिंहासनके उत्तराधिकारके विवादसे प्रासङ्गिक है । ई धृतराष्ट्रके सबसे बड़ बेटा दुर्योधनके देरसे जन्मके श्रेय दे है । बावजूद एकर कि उनकर पिताके जल्दी शादी हो गेलै हल आउ उनकर चचेरे भाई युधिष्ठिरला सिंहासनके दावा करेके मामलाके वैध बनावऽ है काहेकि ऊ अपन पीढ़ीमे सबसे बड़ होवेके दावा कर सकऽ हलथिन । कुरुक्षेत्रके युद्धमे धृतराष्ट्रके सब पुत्र (युयुत्सुके छोड़के) मर गेलै । युयुत्सु गान्धारीके दासी सुघदा द्वारा धृतराष्ट्रके पुत्र हलै । धृतराष्ट्र आउ गान्धारीके सौ पुत्रके इलावा एक पुत्री हल, जेकर नाम दुःशला हलै ।

कौरवके नाम

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धृतराष्ट्र आउ गान्धारीके एक सौ एक लैकन हलै जेकरामे सौ पुत्र आउ एक पुत्री हलै ।

  1. दुर्योधन
  2. दुशासन
  3. विकर्ण
  4. चित्रसेना
  5. दुस्सालन
  6. जलगन्ध
  7. साम
  8. साह
  9. विन्ध
  10. अनुविन्ध
  11. दुर्मुख
  12. दुर्दर्षा
  13. दुर्मर्षा
  14. दुस्साह
  15. दुर्मादा
  16. दुष्कर्ण
  17. दुर्धरा
  18. विविंसति
  19. दुर्मर्षण
  20. दुर्विषाहा
  21. दुर्विमोचन
  22. दुष्प्रदर्श
  23. दुर्जय
  24. जैत्र
  25. भूरीवाला
  26. रवि
  27. जयत्सेन
  28. सुजाता
  29. श्रुतवान्
  30. श्रुतान्त
  31. जय
  32. चित्र
  33. उपचित्र
  34. चारुचित्र
  35. चित्राक्ष
  36. सराषन
  37. चित्रयुद्ध
  38. चित्रवर्मन
  39. सुवर्मा
  40. सुदर्शन
  41. धनुर्ग्रह
  42. विवित्सु
  43. सुबाहु
  44. नन्द
  45. उपनन्द
  46. क्रथ
  47. वातवेग
  48. निशागिन
  49. कवाशिन
  50. पासी
  51. विकट
  52. सोम
  53. सुवर्चसस
  54. धनुर्धर
  55. अयोबाहु
  56. महाबाहु
  57. चित्रमग
  58. चित्रकुंडल
  59. भीमरथ
  60. भीमवेग
  61. भीमबेल
  62. उग्रयुध
  63. कुण्डधर
  64. वृन्दारक
  65. दृढ़वर्मा
  66. दृढ़क्षत्र
  67. दृढ़सन्ध
  68. जरासन्ध
  69. सत्यसंध
  70. सदासुवक
  71. उग्रश्रवस
  72. उग्रसेन
  73. सेनानी
  74. अपराजीत
  75. कुन्धासाई
  76. दृढ़हस्थ
  77. सुहस्थ
  78. सुवर्च
  79. आदित्यकेतु
  80. उग्रसाई
  81. कवची
  82. क्रधन
  83. कुन्धी
  84. भीमविक्र
  85. अलोलूप
  86. अभय
  87. धृधकर्मावु
  88. धृधार्थाश्रय
  89. अनाध्रुष्य
  90. कुन्धभेदी
  91. विरावी
  92. चित्रकुण्डल
  93. प्रधाम
  94. अमाप्रमाधि
  95. डीरखारोम
  96. सुवीर्यवान
  97. धीरखाबाहु
  98. कञ्चनध्वज
  99. कुन्धासी
  100. विरजस

कौरवके एक बहिन दुशला आउ एक सौतेला भाई युयुत्सुओ हलै ।

एकरो देखथिन

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सन्दर्भ

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  1. Monier-Williams, Sir Monier (1872). A Sanskṛit-English Dictionary Etymologically and Philologically Arranged: With Special Reference to Greek, Latin, Gothic, German, Anglo-Saxon, and Other Cognate Indo-European Languages. Clarendon Press.
  2. Joshi, Nikul. "Kauravas". World History Encyclopedia. अभिगमन तिथि 2023-07-08.
  3. "Mahabharat Chapter 6 - Birth of Pandavas and Kauravas". web.archive.org. 2015-09-24. मूल से 24 सितम्बर 2015 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2023-07-08.
  4. "Mythological Story : The Birth of the Pandavas and Kauravas". www.kidsgen.com. अभिगमन तिथि 2023-07-08.