Wp/mag/कुरुक्षेत्र युद्ध
| महाभारतके युद्ध | |||||||
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महाभारत महाकाव्यके हस्तलिखित पाण्डुलिपि, चित्र सहित | |||||||
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| योद्धा | |||||||
| पाण्डवके सेनापति धृष्टद्युम्न | कौरवके सेनापति भीष्म | ||||||
| सेनानायक | |||||||
| धृष्टद्युम्न † | भीष्म †,द्रोण †,कर्ण †, शल्य †,अश्वत्थामा | ||||||
| शक्ति/क्षमता | |||||||
| ७ अक्षौहिणी १५,३०,९०० सैनिक |
११ अक्षौहिणी २४,०५,७०० सैनिक | ||||||
| मृत्यु आउ हानि | |||||||
| सब योद्धामेसे खाली आठे ज्ञात वीर बचलन - पाँच पाण्डव, कृष्ण, सात्यकि, युयुत्सु |
सब योद्धामे से खाली तीने ज्ञात वीर शेष -अश्वत्थामा, कृपाचार्य, कृतवर्मा | ||||||
कुरुक्षेत्र युद्ध कौरव आउ पाण्डवके मध्य कुरु साम्राज्यके सिंहासनके प्राप्तिला लड़ल गेलै हल । महाभारतके अनुसार ई युद्धमे भारतवर्षके प्रायः सब जनपद भाग लेलकै हल । महाभारत आउ अन्य वैदिक साहित्यके अनुसार ई प्राचीन भारतमे वैदिक कालके इतिहासके सबसे बड़ युद्ध हलै ।[1] ई युद्धमे लाखो क्षत्रिय योद्धा मारल गेलन जेकर परिणामस्वरूप वैदिक संस्कृति आउ सभ्यताके पतन हो गेलै हल । ई युद्धमे सम्पूर्ण भारतवर्षके राजाके अतिरिक्त बड़ी मनी अन्य देशके वीरो भाग लेलन आउ सबके सब वीर गतिके प्राप्त हो गेलन ।[2] ई युद्धके परिणामस्वरुप भारतमे ज्ञान आउ विज्ञान दुनोके साथे-साथे वीर क्षत्रियके अभाव हो गेलै । एक प्रकारसे वैदिक संस्कृति आउ सभ्यता जे विकासके चरम पर हलै ओकर एकाएक विनाश हो गेलै । प्राचीन भारतके स्वर्णिम वैदिक सभ्यता ई युद्धके समाप्तिके साथहीँ समाप्त हो गेलै । ई महान युद्धके ऊ समयके महान ऋषि आउ दार्शनिक भगवान वेदव्यास अपन महाकाव्य महाभारतमे वर्णन कैलन जे सहस्राब्दी तक सम्पूर्ण भारतवर्षमे गाके एवं सुनके याद रखल गेलै । [3]
युद्धके ऐतिहासिकता विद्वानके चर्चाके विषय बनल है ।[4][5][6] ऋग्वेदमे उल्लिखित दस राजाके लड़ाई कुरुक्षेत्र युद्धके कहानीके मूल आधार बनावल हो सकऽ है । महाभारतके वृत्तान्तमे युद्धके बड़ी विस्तार आउ संशोधन कैल गेलै हल जे एकरा सन्दिग्ध बनावऽ है ।[7] कुरुक्षेत्र युद्धके एक ऐतिहासिक तिथि प्रदान करेके प्रयास कैल गेलै हे जेकरामे अनुसन्धानके सुझाव देल गेलै हे १००० ईपू ।[5] हालाँकि लोकप्रिय परम्पराके दावा है कि युद्ध कलियुगमे सङ्क्रमणके चिह्नित करऽ है जे एकरा ३१०२ ईसा पूर्वसे दिनाङ्कन करऽ है ।[8]
महाभारतमे मुख्यतः चन्द्रवंशीके[उद्धरण चाही] दु परिवार कौरव आउ पाण्डवके बीच होएल युद्धके वृत्तान्त है । १०० कौरव आउ पाँच पाण्डवके बीच कुरु साम्राज्यके भूमिला जे सङ्घर्ष चललै ओकरासे अन्ततः महाभारत युद्धके सृजन होलै । उक्त युद्धके हरियाणामे स्थित कुरुक्षेत्रके आसपास होएल मानल जा है । ई युद्धमे पाण्डव विजयी होलन हल ।[1] महाभारतमे ई युद्धके धर्मयुद्ध कहल गेलै हे काहेकि ई सत्य आउ न्यायला लड़ल जाए वाला युद्ध हलै ।[2] महाभारत कालसे जुड़ल ढेर अवशेष दिल्लीमे पुराना किलामे मिललै हे । पुराना किलाके पाण्डवके किलो कहल जा है ।[9] कुरुक्षेत्रोमे भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा महाभारत कालके बाण आउ भाला प्राप्त होलै हे ।[10] गुजरातके पश्चिमी तट पर समुन्दरमे डूबल ७०००-३५०० बरस पुरान नगर खोजल गेलै हे ।[11], जिनको महाभारत में वर्णित द्वारका के सन्दर्भों से जोड़ा गया[12] एकर इलावा बरनावोमे लाक्षागृहके अवशेष मिललै हे ।[13] ई सब प्रमाण महाभारतके वास्तविकताके सिद्ध करऽ है ।
पृष्ठभूमि
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महाभारत युद्ध होवेका मुख्य कारण कौरवके उच्च महत्वाकांक्षा आउ धृतराष्ट्रके पुत्र मोह हलै । कौरव आउ पाण्डव आपसमे चचेरा भाई हलन । वेदव्यासजीसे नियोगके द्वारा विचित्रवीर्यके भार्या अम्बिकाके गर्भसे धृतराष्ट्र आउ अम्बालिकाके गर्भसे पाण्डु उत्पन्न होलन । धृतराष्ट्रके पत्नी गान्धारीके गर्भसे सौ पुत्रके जन्म होलै । ओकरामे दुर्योधन सबसे बड़ हलै । पाण्डुके युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव पाँच पुत्र होलन । धृतराष्ट्र जन्मेसे नेत्रहीन हलन अतः उनकर जगह पर पाण्डुके राज देल गेलै जेकरासे धृतराष्ट्रके सदा पाण्डु आउ उनकर पुत्रसे द्वेष रहे लगलै । ई द्वेष दुर्योधनके रूपमे फलीभूत होलै आउ शकुनि ई आगमे घीके काम कैलकै । शकुनिके कहे पर दुर्योधन बचपनसे लेके लाक्षागृह तक ढेर षडयन्त्र कैलक । किन्तु हर बार ऊ विफल रहलै । युवावस्थामे आवे पर जखनि युधिष्ठिरके युवराज बना देल गेलै त ऊ उनका लाक्षागृह भेजवाके मारेके प्रयास कैलकै किन्तु पाण्डव बच निकललन । पाण्डवके अनुपस्थितिमे धृतराष्ट्र दुर्योधनके युवराज बना देलन किन्तु जखनि पाण्डव वापिस आके अपन राज्य वापिस माङ्गलन त उनका राज्यके नाम पर खण्डहर रुपी खाण्डव वन देल गेलै ।
धृतराष्ट्रके अनुरोध पर गृहयुद्धके सङ्कटसे बचेला युधिष्ठिर ई प्रस्तावो स्वीकार कर लेलन । पाण्डव श्रीकृष्णके सहयोगसे इन्द्रके अमरावती पुरी जेतना भव्य नगरी इन्द्रप्रस्थके निर्माण कैलन । पाण्डव विश्वविजय करके प्रचुर मात्रामे रत्न एवं धन एकत्रित कैलन आउ राजसूय यज्ञ कैलन । दुर्योधन पाण्डवके उन्नति देख न पौलकै आउ शकुनिके सहयोगसे द्यूतमे छ्लसे युधिष्ठिरसे उनकर सब राज्य जीत लेलकै आउ कुरु राज्य सभामे द्रौपदीके निर्वस्त्र करेके प्रयास करके उनका अपमानित कैलकै । सम्भवतः एही दिन महाभारतके युद्धके खाद पड़ गेलै हल । अन्ततः पुनः द्यूतमे हारके पाण्डवके १२ वर्षोके ज्ञातवास आउ १ वर्षके अज्ञातवास स्वीकार करे पड़लै । किन्तु जखनि ई शर्त पूरा करहुँ पर कौरव पाण्डवके उनकर राज्य देवेसे मना कर देलकै त पाण्डवके युद्ध करेला बाधित होवे पड़लै किन्तु श्रीकृष्ण युद्ध रोकेके हर सम्भव प्रयास करेके सुझाव देलन ।

तखनि श्रीकृष्ण पाण्डव दनेसे कुरुराज्य सभामे शान्तिदूत बनके गेलन आउ ओहाँ श्रीकृष्ण दुर्योधनसे पाण्डवके खाली पाँच गाँव देके युद्ध टालेके प्रस्ताव रखलन । किन्तु जखधि दुर्योधन पाण्डवके सुईके नोक जेतनो भूमि देवेसे मना कर देलकै त अन्ततः युधिष्ठिरके युद्ध करेला बाधित होवे पड़लै । ई प्रकार कौरव ११ अक्षौहिणी आउ पाण्डव ७ अक्षौहिणी सेना एकत्रित कर लेलन । युद्धके तैयारी पुरा करेके बाद कौरव आउ पाण्डव दुनो दल कुरुक्षेत्र पहुँचलन जने ई भयङ्कर युद्ध लड़ल गेलै [14] कुरुक्षेत्रके ऊ भयानक आउ घमासान संहारक युद्धके अनुमान महाभारतके भीष्म पर्वमे देल एक श्लोकसे [15] लगावल जा सक है कि
| “ | न पुत्रः पितरं जज्ञे पिता वा पुत्रमौरसम् ।
भ्राता भ्रातरं तत्र स्वस्रीयं न च मातुलः ॥ |
„ |
| “ | अर्थात् : ऊ युद्धमे न पुत्र पिताके, न पिता पुत्रके, न भाई भाईके, न मामा भाञ्जाके, न मित्र मित्रके चिन्हऽ हलै' | „ |
एकरो देखथिन
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]- 1 2 महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर,सौप्तिकपर्व
- 1 2 महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर,भीष्मपर्व
- ↑ महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर, आदिपर्व, प्रथम अध्याय
- ↑ Singh, Upinder (2006). Delhi: Ancient History. Berghahn Books. प॰ 85. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 9788187358299.
- 1 2 Singh 2009, पृ॰ 19.
- ↑ Insoll, Timothy. Case Studies in Archaeology and World Religion: The Proceedings of the Cambridge Conference. Archaeopress. प॰ 166.
- ↑ Murthy, S. S. N. (8 सितम्बर 2016). "The Questionable Historicity of the Mahabharata". Electronic Journal of Vedic Studies. 10 (5): 1–15. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 1084-7561. डीओआइ:10.11588/ejvs.2003.5.782. मूल से 26 जनवरी 2019 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 जनवरी 2019.
- ↑ The Mahabharata: Volume 1, Volume 1. Penguin UK. 2015. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 9788184753882.
- ↑ "दिल्ली सिटी द इमपेरिकल गजेटटियर ऑफ इण्डिया,१९०९, भाग ११, पेज २३६". मूल से 3 मार्च 2016 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 मई 2010.
- ↑ "आरकेलोजी ऑनलाइन, साइन्टिफिक वेरिफिकेशन ऑफ वैदिक नोलेज, कुरुक्षेत्र". मूल से 26 मार्च 2010 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 मई 2010.
- ↑ "आई एस डॉट कॉम, आरटिकल २९". मूलसे 15 फ़रवरी 2010 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 मई 2010.
|archive-date=में तिथि प्राचल का मान जाँची (सहायता) - ↑ "आरकेलोजी ऑनलाइन, साइन्टिफिक वेरिफिकेशन ऑफ वैदिक नोलेज, ऐविडेन्स फार ऐन्शियन्ट पोर्ट सिटी ऑफ द्वारका". मूल से 26 मार्च 2010 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 मई 2010.
- ↑ "लाक्षागृह". मूलसे 10 अप्रैल 2009 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 मई 2010.
- ↑ महाभारत-गीताप्रेस गोरखपुर
- ↑ महाभारत गीताप्रेस गोरखपुर, भीष्म पर्व-४६.१
बाहरी कड़ी
[edit | edit source]Archived 2006-02-17 at the वेबैक मशीन - इन्दिरा गान्धी राष्ट्रीय कला केन्द्र
- ब्रज डिस्कवरी-एहाँ वैदिक साहित्य एवं स्थलके बारेमे जानकारी प्राप्त करथिन
- वेद-पुराण - एहाँ चारो वेद एवं दससे अधिक पुराण हिन्दी अर्थ सहित उपलब्ध है । पुराणके एहाँ सुनलो जा सकऽ है ।
- महर्षि प्रबन्धन विश्वविद्यालय
Archived 2008-04-08 at the वेबैक मशीन - एहाँ सम्पूर्ण वैदिक साहित्य संस्कृतमे उपलब्ध है ।
- ज्ञानामृतम् - वेद, अरण्यक, उपनिषद् आदि पर सम्यक् जानकारी
