Wp/mag/काव्य

काव्य, कविता या पद्य साहित्यके ऊ विधा है जेकरामे कौनो कहानी या मनोभावके कलात्मक रूपसे कौनो भाषाके द्वारा अभिव्यक्त कैल जा है । भारतमे कविताके इतिहास आउ कविताके दर्शन बड़ी पुराना[1] है । एकर प्रारम्भ भरतमुनिसे समझल जा सकहै । कविताके शाब्दिक अर्थ है काव्यात्मक रचना या कविके कृति, जे छन्दके शृंखलामे विधिवत बान्धल जा है । सुप्रसिद्ध कोरोजयी कवि गोलेन्द्र पटेल कविताके सन्दर्भमे कहलन हे कि "कविता आत्माके औषधि है ।"[2]
काव्य ऊ वाक्य रचना है जेकरासे चित्त कौनो रस या मनोवेगसे पूर्ण होवे अर्थात् ऊ जेकरामे चुनल शब्दके द्वारा कल्पना आउ मनोवेगके प्रभाव डालल जा है । रसगङ्गाधरमे 'रमणीय' अर्थके प्रतिपादक शब्दके 'काव्य' कहलन है । 'अर्थके रमणीयता' के अन्तर्गत शब्दके रमणीयतो (शब्दलंकार) समझके लोग ई लक्षणके स्वीकार करहथिन । पर 'अर्थ' के 'रमणीयता' ढेर प्रकारके हो सकहै । एकरासे ई लक्षण बड़ी स्पष्ट न है । साहित्य दर्पणाकार विश्वनाथके लक्षणे सबसे ठीक जँचहै । ओकर अनुसार 'रसात्मक वाक्ये काव्य है' । रस अर्थात् मनोवेगके सुखद संचारके काव्यके आत्मा है ।
काव्यप्रकाशमे काव्य तीन प्रकारके कहल गेलै हे, ध्वनि, गुणीभूत व्यङ्ग्य आउ चित्र । ध्वनि ऊ है जेकरामे शब्दसे निकलल अर्थ (वाच्य) के अपेक्षा छिपल अभिप्राय (व्यंग्य) प्रधान होवे । गुणीभूत ब्यंग्य ऊ है जेकरामे गौण होवे । चित्र या अलंकार ऊ है जेकरामे बिन ब्यङ्ग्यके चमत्कार होवे । ई तीनोके क्रमशः उत्तम, मध्यम आउ अधमो कहहथिन । काव्यप्रकाशकारके जोर छिपल भाव पर अधिक जान पड़है, रसके उद्रेक पर न । काव्यके दु आउ भेद कैल गेलै हे, महाकाव्य आउ खण्डकाव्य । महाकाव्य सर्गबद्ध आउ ओकर नायक कौनो देवता, राजा या धीरोदात्त गुंण सम्पन्न क्षत्रिय होवेके चाही । ओकरामे शृंगार, वीर या शान्त रसमे से कौनो रस प्रधान होवेके चाही । बीच बीचमे करुणा; हास्य इत्यादि आउ रस तथा लोगके प्रसंगो आवेके चाही । कम से कम आठ सर्ग होवेके चाही । महाकाव्यमे सन्ध्या, सूर्य, चन्द्र, रात्रि, प्रभात, मृगया, पर्वत, वन, ऋतु, सागर, संयोग, विप्रलम्भ, मुनि, पुर, यज्ञ, रणप्रयाण, विवाह आदिके यथास्थान सन्निवेश होवेके चाही । काव्य दु प्रकारके मानल गेलै हे, दृश्य आउ श्रव्य । दृश्य काव्य ऊ है जे अभिनय द्वारा देखलावल जाय, जैसे, नाटक, प्रहसन, आदि जे पढ़े आउ सुने योग्य होवे, ऊ श्रव्य है । श्रव्य काव्य दु प्रकारके होवहै, गद्य आउ पद्य। पद्य काव्यके महाकाव्य आउ खण्डकाव्य दु भेद कहल जा चुकल है । गद्य काव्योके दु भेद कैल गेलै हे - कथा आउ आख्यायिका । चम्पू, विरुद आउ कारम्भक तीन प्रकारके काव्य आउ मानल गेलै हे ।
एकरो देखथिन
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "Zindgi Shayari". 2024-03-23. मूल से 22 मई 2024 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2024-07-04.
- ↑ कोरोजीवी कविता, अप्रैल 2020 (वर्ष-1, अंक-2), पृष्ठ-11.
बाहरी कड़ी
[edit | edit source]- काव्यशास्त्र के मानदण्ड (गूगल पुस्तक; डॉ रामनिवास गुप्त)
- भारतीय काव्यशास्त्र की भूमिका (गूगल पुस्तक; लेखक - योगेन्द्र प्रताप सिंह)
- कविता क्या है? विकिस्रोत पर, लेखक—आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ।