Wp/mag/कर्ण
| कर्ण | |
|---|---|
महाभारत युद्धके समय अपन रथ पर सवार महारथी कर्ण | |
| हिन्दु पौराणिक कथाके पात्र | |
| नाम | कर्ण |
| अन्यनाम | वासुसेन, दानवीर कर्ण, राधेय, सूर्यपुत्र कर्ण, सूतपुत्र कर्ण, कौन्त्य कर्ण, विजयधारी, वैकर्तना, मृत्युञ्जय कर्ण, दिग्विजयी कर्ण, अङ्गराज कर्ण |
| सन्दर्भ ग्रन्थ | महाभारत |
| जन्मस्थल | सूर्य लोक |
| व्यवसाय | अङ्ग देशके राजा |
| मुख्य शस्त्र | धनुषबाण, विजय धनुष |
| राजवंश | पैतृक राजवंश पाण्डव किन्तु कुन्ती द्वारा जन्मके समय त्याग देवे आउ कौरव युवराज दुर्योधनसे घनिष्ठ मित्रताके चलते कौरव राजवंशी |
| माता-पिता | जन्मदाता सूर्यदेव आउ श्रीमती कुन्ती लालन पालन कर्ता देवी राधा आउ श्री अधिरत |
| भाई-बहिन | युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन, नकुल, सहदेव, सूर्यपुत्र शनि , सूर्यपुत्र यमराज, राधा पुत्र शोण |
| जीवनसङ्गी | वृषाली आउ सुप्रिया |
| सन्तान | वृषसेन, चित्रसेन, सत्यसेन, सुशेन, द्विपाल, शत्रुञ्जय, प्रसेन , बनसेन आउ वृषकेतु |
कर्ण महाभारत (महाकाव्य) के नायक हथिन । महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत कर्ण आउ पाण्डवोके जीवन पर केन्द्रित है । जीवन अन्तत विचार जनक हथिन । कर्ण महाभारतके सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारीमे से एक हथिन । कर्ण पाँच पाण्डवके सबसे बड़ छठा भाई हथिन । भगवान परशुराम स्वयं कर्णके श्रेष्ठताके स्वीकार कैलन हल । कर्णके वास्तविक माय कुन्ती हलथिन आउ कर्ण सहित सब पाण्डवके धर्मपिता महाराज पाण्डु हलथिन । कर्णके वास्तविक पिता भगवान सूर्य हलथिन । कर्णके जन्म पाण्डु आउ कुन्तीके विवाहके पहिल होलै हल । कर्ण दुर्योधनके सबसे बेस मित्र हलथिन आउ महाभारतके युद्धमे ऊ अपन मित्र दुर्योधन दनेसे अपने भाईके विरुद्ध लड़लन । कर्णके एक आदर्श दानवीर मानल जा है काहेकि कर्ण कौनो मङ्गेवालाके दानमे कुछो देवेसे कहियो मना न कैलन भलहीँ एकर परिणामस्वरूप उनका अपने प्राण सङ्कटमे काहे न पड़ गेलै हो । एकरेसे जुड़ल एक वाक्या महाभारतमे है जखनि अर्जुनके द्वारा भगवान इन्द्र कर्णसे उनकर कुण्डल आउ दिव्य कवच माङ्गलन आउ कर्ण दे देलन ।[1]
कर्णके छवि आझो भारतीय जनमानसमे एक ऐसन महायोद्धाके है जे जीवनभर प्रतिकूल परिस्थितिसे लड़ैत रहलै । बड़ीमनी लोगके एहु मानना है कि कर्णके कहियो ऊ सब न भेटलै जेकर ऊ वास्तविक रूपसे अधिकारी हलथिन ।[2] तर्कसङ्गत रूपसे कहल जाए त हस्तिनापुरके सिंहासनके वास्तविक अधिकारी कर्णे हलथिन काहेकि ऊ कुरुए राजपरिवारसे हलथिन आउ युधिष्ठिर आउ दुर्योधनसे ज्येष्ठ हलथिन, किन्तु उनकर वास्तविक पहचान उनकर मृत्यु तक अज्ञाते रहलै । कर्णके एक दानवीर आउ महान योद्धा मानल जा है । उनका दानवीर आउ अङ्गराज कर्णो कहल जा है ।
शुद्ध सङ्कल्पके परिणाम स्वरुप जन्म
[edit | edit source]कर्णके जन्म कुन्तीके भेटल एक वरदान स्वरुप होलै हल । जखनि ऊ कुँआरी हलथिन, तखनि एक बेर दुर्वासा ऋषि उनकर पिताके महलमे पधारलथिन । तखनि कुन्ती पूरा एक वर्ष तक ऋषिके बड़ी निमन सेवा कैलथिन । कुन्तीके सेवाभावसे प्रसन्न होके ऊ अपन दिव्यदृष्टिसे ई देख लेलन कि पाण्डुसे उनका सन्तान न हो सकै आउ उनका ई वरदान देलन कि ऊ कौनो देवताके स्मरण करके उनकासे सन्तान उत्पन्न कर सकऽ है । एक दिन उत्सुकतावश कुँआरेपनमे कुन्ती सूर्य देवके ध्यान कैलन । एकरासे सूर्य देव प्रकट होइलन आउ उनकर नाभिके छूके उनकर गर्भमे प्रवेश कैलन आउ अपन पुत्रके ओहाँ मन्त्र द्वारा स्थापित कैलन । कालान्तरमे कुन्तीके गर्भसे ऐसन बालक उत्पन्न होलै जे तेजमे सूर्येके समान हलै आउ ऊ कवच आउ कुण्डल लेके उत्पन्न होलै हल जे जन्मेसे ओकर शरीरसे सटल हलै । चूँकि ऊ अखनियो अविवाहित हलथिन एहीसे लोक-लाजके डरसे ऊ पुत्रके एक बक्सामे रखके गङ्गाजीमे बहा देलथिन ।[3]
पालन-पोषण
[edit | edit source]कर्ण गङ्गाजीमे बहैत जाइत हलथिन कि महाराज धृतराष्ट्रके सारथी अधिरथ आउ उनकर पत्नी राधा उनका देखलन आउ उनका गोद ले लेलन आउ उनकर पालन पोषण करे लगलन । ऊ उनका वासुसेन नाम देलन । अपन पालनकर्ता माताके नाम पर कर्णके राधेय के नामोसे जानल जा है । अपन जन्मके रहस्योद्घाटन होवे आअ अङ्गके राजा बनाए जाएके बादो कर्ण सदैव उनके अपन माता-पिता मानलन आउ अपन मृत्यु तक सब पुत्र धर्मके निभौलन । अङ्गके राजा बनाए जाए बाद कर्णके एक नाम अङ्गराजो होलै ।[4]
प्रशिक्षण
[edit | edit source]कर्ण परशुरामसे सम्पर्क कैलन जे कि खाली ब्राह्मण वर्णेके शिक्षा देल करऽ हलन काहेकि उनकर प्रतिज्ञा हलै ऊ खाली वेदके ज्ञातेके शिक्षा देथिन । कर्ण स्वयंके ब्राह्मण वर्ण बताके परशुरामसे शिक्षाके आग्रह कैलन । परशुराम कर्णके आग्रह स्वीकार कैलन आउ कर्णके अपने समान युद्धकला आउ धनुर्विद्यामे निष्णात कैलन । ई प्रकार कर्ण परशुरामके एक अत्यन्त परिश्रमी आउ निपुण शिष्य बनलन ।[5]
एकरो देखथिन
[edit | edit source]सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "मुरैना के कुंतलपुर में हुआ था दानवीर कर्ण का जन्म, यहीं हैं पांडवों का ननिहाल". punjabkesari. 2020-06-13. अभिगमन तिथि 2021-07-31.
- ↑ "कर्ण - महाभारत का एक उपेक्षित पात्र". मूल से 10 फरवरी 2009 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 जून 2009.
- ↑ "दानवीर 'कर्ण' का परिचय". Hindi Webduia. मूल से 27 जुलाई 2019 के पुरालेखित.
- ↑ "कर्ण का लालन-पालन [[Wp/mag/सूत (जाति)|सूत]] अधिरथ और उसकी पत्नी राधा ने किया". जागरण. मूलसे 30 नवम्बर 2018 के पुरालेखित. URL–wikilink conflict (सहायता)
- ↑ "महाभारत कथा : कर्ण के जन्म की कथा". Jagran.