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Wp/mag/ऋग्वेद

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Wp/mag/ऋग्वेद
Four Vedas
चार वेद
जानकारी
धर्महिन्दुधर्म
भाषावैदिक संस्कृत
अवधि1500 BC-1000 BC
अध्याय१० (10) मण्डल
श्लोक/आयत१०,५८० मन्त्र[1]

ऋग्वेद सनातन धर्म आउ सम्पूर्ण विश्व के सबसे प्राचीन ग्रन्थ है जे उपलब्ध है । एकरा मे १० मण्डल,[2] १०२८ सूक्त आउ वर्तमान मे १०,४६२ मन्त्र है, मन्त्र संख्या के विषय मे विद्वान मे कुछ मतभेद है । मन्त्र मे देवता सब के स्तुति कैल गेलै हे । एकरा मे देवता के यज्ञ मे आह्वान करेला मन्त्र है । एही सर्वप्रथम वेद है । ऋग्वेद के इतिहासकार हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार के अभी तक उपलब्ध पहिला रचना मे एक मानऽ हथिन । ई संसार के ऊ सब सर्वप्रथम ग्रन्थ मे से एक है जेकर कौनो रूप मे मान्यता आज तक समाज मे बनल है । ई सनातन धर्म के प्रमुख ग्रन्थ है । ऋग्वेद के रचना के पढ़े वाला ऋषि के होत्र कहल जा है ।

ऋग्वेद सबसे पुरान ज्ञात वैदिक संस्कृत पुस्तक है ।[3] एकर प्रारम्भिक परत कौनो हिन्द-यूरोपीय भाषा मे सबसे पुरान उपलब्ध ग्रन्थ मे से एक है ।[4][note 1] ऋग्वेद के ध्वनि आउ ग्रन्थ के दोसर सहस्राब्दी ईसा पूर्व से मौखिक रूप से प्रसारित कैल गेलै हे ।[6][7][8] दार्शनिक आउ भाषायी साक्ष्य इंगित करऽ है कि ऋग्वेद संहिता के अधिकांश भाग के रचना भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र मे होलै हल ।

ऋक् संहिता मे १० मण्डल एवं बालखिल्य सहित १०२८ सूक्त है । वेद मन्त्र के समूह के सूक्त कहल जा है, जेकरा मे एकदैवत्व एवं एकार्थे के प्रतिपादन रहऽ है‌ । ऋग्वेदे मे मृत्युनिवारक त्र्यम्बक-मन्त्र या महामृत्युञ्जय मन्त्र (/५९/१२) वर्णित है, ऋग्विधान के अनुसार ई मन्त्र के जप के साथे विधिवत व्रत एवं हवन करे से दीर्घ आयु प्राप्त होवऽ है आउ मृत्यु दूर हो कर सब प्रकार के सुख प्राप्त होवऽ है । विश्व-विख्यात गायत्री मन्त्रो (ऋ० /६२/१०) एकरे मे वर्णित है । ऋग्वेद मे अनेक प्रकार के लोकोपयोगी-सूक्त, तत्त्वज्ञान-सूक्त, संस्कार-सुक्त उदाहरणतः रोग निवारक-सूक्त (ऋ॰ १०/१३७/-), श्री सूक्त या लक्ष्मी सूक्त (ऋग्वेद के परिशिष्ट सूक्त के खिलसूक्त मे), तत्त्वज्ञान के नासदीय-सूक्त (ऋ॰ १०/१२९/-) एवं हिरण्यगर्भ सूक्त (ऋ॰ १०/१२१/-१०) आउ विवाह आदि के सूक्त (ऋ॰ १०/८५/-४७) वर्णित है, जेकरा मे ज्ञान विज्ञान के चरमोत्कर्ष लौकऽ है ।

ई ग्रन्थ के इतिहासो के दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण रचना मानल गेलै हे । इरानी अवेस्ता के गाथा का ऋग्वेद के श्लोक के जैसन स्वर मे होलै, जेकरा मे कुछ विविध भारतीय देवता जैसे अग्नि, वायु, जल, सोम आदि के वर्णन है ।

कालनिर्धारण आउ ऐतिहासिक सन्दर्भ

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ऋग्वेद कौनो अन्य आर्य पाठके तुलनामे ढेर पुरातन है । ई कारणसे ई मैक्स मूलर आउ रूडोल्फ रोथके समयसे पश्चिमी विद्वानके ध्यानके केन्द्रमे हलै । ऋग्वेद वैदिकधर्मके प्रारम्भिक चरणके दर्ज करऽ है । प्रारम्भिक इरानी अवेस्ता[9][10] के साथे मजबूत भाषायी आउ सांस्कृतिक समानता है, जे प्रोटो-हिन्द-इरानी कालसे व्युत्पन्न है,[11] अक्सर प्रारम्भिक एण्ड्रोनोवो संस्कृति (या बल्कि, प्रारम्भिक एण्ड्रोनोवोके भीतरे सिण्टाष्ट संस्कृति) से जुड़ल है । क्षितिज) २००० ईसा पूर्व । ऋग्वेदके समय ईपू १०००० से अधिक प्राचीनतम मानल गेलै हे ।[12]

भाषा

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उत्तर वैदिक कालसे पहीलेके ऊ काल जेकरामे ऋग्वेदके ऋचाके रचना होलै हल , ई सब ऋचाके जे भाषा हलै ऊ ऋग्वैदिक भाषा कहला है । ऋग्वैदिक भाषा हिन्द यूरोपीय भाषा परिवारके एक भाषा है । एकर परवर्ती पुत्री भाषा अवेस्ता, पुरान फारसी, पालि प्राकृत आउ संस्कृत है ।

मातृभाषी

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ऋग्वैदिक भाषाके मूल मातृभाषी संस्कृत भाषी हिन्द-इरानी हलन ।

व्याकरण

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नामन् (संज्ञा)

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एकवचनद्विवचनबहुवचन
कर्ता -स् (-म्)-ॲउ, -ई, -ऊ (-नी)-अस् (-नि)
सम्बोधन -स् (-)-उ, -ई, -ऊ (-नी)-अस् (-नि)
कर्म -अम् (-म्)-ॲउ, -ई, -ऊ (-नी)-न्, -अस् (-नि)
करण -ना, -या-भ्यॅम्-भिस्
सम्प्रदान -अइ-भ्यॅम्-भ्यस्
आपादान -अस्-भ्यॅम्-भ्यस्
सम्बन्ध -अस्-अउस्-नॅम
अधिकरण -इ, -ॲम्-अउस्-सु/-षु

सङ्गठन

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एक प्रचलित मान्यताके अनुसार वेद पहिले एक संहितामे हलै पर व्यास ऋषि अध्ययनके सुगमताला एकरा चार भागमे बाँट देलन । ई विभक्तीकरणके कारणे उनकर नाम वेदव्यास पड़लै । इनकर विभाजन दु क्रमसे केल जा है -

  1. अष्टक क्रम - ई पुरान विभाजन क्रम है जेकरामे सम्पूर्ण ऋक संहिताके आठ भाग (अष्टक) मे बाँटल गेलै हे । प्रत्येक अष्टक ८ अध्यायके है आउ हर अध्यायमे कुछ वर्ग है । प्रत्येक अध्यायमे कुछ ऋचा (गेय मन्त्र) है - सामान्यतः ५ ।
  2. मण्डल क्रम - सम्पूर्ण ऋग्वेद संहिता १० मण्डलमे विभक्त है । प्रत्येक मण्डलमे अनेक अनुवाक आउ प्रत्येक अनुवाकमे अनेक सूक्त आउ प्रत्येक सूक्तमे ढेर मन्त्र (ऋचा) । कुल दस मण्डलमे ८५ अनुवाक आउ १०१७ सूक्त है । एकर अतिरिक्त ११ सूक्त बालखिल्य नामसे जानल जा है । (ऋग्वेदके मण्डल देखथिन)

ऋग्वेदके सूक्तके पुरुष रचियतामे गृत्समद, विश्वामित्र, वामदेव, अत्रि, भारद्वाज, वशिष्ठ आदि प्रमुख हथिन । सूक्तके स्त्री रचयितामे लोपामुद्रा, घोषा, शची, कांक्षावृत्ति, पौलोमी आदि प्रमुख हथिन । ऋग्वेदके १०मा मण्डलके ९५ सूक्तमे पुरुरवा, ऐल आउ उर्वशीके संवाद है ।

वेदमे कौनौ प्रकारके मिलावट न होवे एकराला ऋषि शब्द आअ अक्षरके गिनके लिख देलन हल । कात्यायन प्रभृति ऋषिके अनुक्रमणीके अनुसार ऋचाके संख्या १०,५८०, शब्दके संख्या १५३५२६ तथा शौनककृत अनुक्रमणीके अनुसार ४,३२,००० अक्षर है । शतपथ ब्राह्मण नियन ग्रन्थमे उल्लेख मिलऽ है कि प्रजापति कृत अक्षरके संख्या १२००० बृहती हलै । अर्थात् १२००० गुणा ३६ मने ४,३२,००० अक्षर । आज जे शाकल संहिताके रूपमे ऋग्वेद उपलब्ध है ओकरामे केवल १०५५२ ऋचा है ।

ऋग्वेदमे ऋचाके बाहुल्य होवेके कारण एकरा 'ज्ञानके वेद' कहल जा है ।

एकरो देखथिन

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टिप्पणी

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  1. According to Edgar Polome, the Hittite language Anitta text from the 17th century BCE is older. This text is about the conquest of Kanesh city of Anatolia, and mentions the same Indo-European gods as in the Rigveda.[5]

सन्दर्भ

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  1. https://hi.quora.com/%E0%A4%8B%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82
  2. "WHO IS AHINDU? How 'breaking India' started".
  3. Stephanie W. Jamison; Joel Brereton (2014). The Rigveda: 3-Volume Set. Oxford University Press. प॰ 3. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-0-19-972078-1.
  4. Edwin F. Bryant (2015). The Yoga Sutras of Patañjali: A New Edition, Translation, and Commentary. Farrar, Straus and Giroux. पप॰ 565&nbsp, – 566. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-1-4299-9598-6. |pages= में 18 स्थान पर line feed character (सहायता)
  5. Edgar Polome (2010). Per Sture Ureland (सम्पा॰). Entstehung von Sprachen und Völkern: glotto- und ethnogenetische Aspekte europäischer Sprachen. Walter de Gruyter. प॰ 51. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-3-11-163373-2.
  6. Wood 2007.
  7. Hexam 2011, पृ॰ chapter 8.
  8. Dwyer 2013.
  9. (Oldenberg 1894) (tr. Shrotri), p. 14 "The Vedic diction has a great number of favourite expressions which are common with the Avestic, though not with later Indian diction. In addition, there is a close resemblance between them in metrical form, in fact, in their overall poetic character. If it is noticed that whole Avesta verses can be easily translated into the Vedic alone by virtue of comparative phonetics, then this may often give, not only correct Vedic words and phrases, but also the verses, out of which the soul of Vedic poetry appears to speak."
  10. (Bryant 2001, पृ॰प॰ 130  131) "The oldest part of the Avesta... is linguistically and culturally very close to the material preserved in the Rigveda... There seems to be economic and religious interaction and perhaps rivalry operating here, which justifies scholars in placing the Vedic and Avestan worlds in close chronological, geographical and cultural proximity to each other not far removed from a joint Indo-Iranian period."
  11. (Mallory 1989) p. 36 "Probably the least-contested observation concerning the various Indo-European dialects is that those languages grouped together as Indic and Iranian show such remarkable similarities with one another that we can confidently posit a period of Indo-Iranian unity..."
  12. The Celestial Key to the Vedas: Discovering the Origins of the World's oldest civilization. B. G. Sidharth. 1999. astronomer B. G. Sidharth proves conclusively that the earliest portions of the Rig Veda can be dated as far back as 10,000 b.c.