Wp/mag/आकाश

कौनो खगोलीय पिण्ड (जैसे धरती) के वाह्य अन्तरिक्षके ऊ भाग जे ऊ पिण्डके सतहसे लौकहे, ओही आकाश हे । अनेक कारणसे एकरा परिभाषित कैल कठिन हे । दिनके प्रकाशमे पृथ्वीके आकाश गहरा-नील रङ्गके सतह नियन प्रतीत होवहे जे हावाके कण द्वारा प्रकाशके प्रकीर्णनके परिणामस्वरूप घटित होवहे । जखनिकि रात्रिमे हमनीके धरतीके आकाश तारेगनसे भरल करिया रङ्गके सतह नियन जना हे ।
रङ्ग
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आकाशके रङ्ग ओकर अपन नै होवे । सूरजसे आवेवाला प्रकाश जखनि आकाशमे उपस्थित धूरी इत्यादिसे भेटहे त ऊ छितर जा हे । नील रङ्ग अपन अपेक्षाकृत कम तरङ्गदैर्घ्यके चलते अन्य रङ्गके अपेक्षा अधिक छितरहे ।[1] एहीसे आकाशके रङ्ग नील लौकहे पर ई हरेक बेर नील होवे जरूरी न । ढेर बेर ई पियर या लालो रङ्गके लौकहे ।[2]
आकाशके विलोम शब्द
[edit | edit source]आकाशके विलोम शब्द "पाताल" हे ।[3]
आकाश के अर्थ होवहे "स्वर्ग" या "असमान" । "पाताल" के अर्थ होवहे “बड्डी नीचेके तल” अथवा "अन्तरिक्षके निचला परत" ।[4]
अन्य नाम
[edit | edit source]आकाशके अन्य नाम हे:
- नभ
- असमान
- अम्बर
- व्योम
- निलाम्बर
- गगन
भारतीय धर्मदर्शनमे आकाश
[edit | edit source]प्राचीन भारतीय धर्मग्रन्थके अनुसार सृष्टिके निर्माण पाँच तत्वसे भेल मानल जा हे जेकरामे कि एक आकाश हे (बाकी चार हे-पृथ्वी, वायु, जल, अग्नि) । यदि तुलना कैल जाये त भारतीय धर्मदर्शनमे वर्णित आकाशके अवधारणा वर्तमान वैज्ञानिक ज्ञान आउ शब्दावलीके एक अयाम "स्थान" (स्पेस) के निकट प्रतीत होवहे । एकर एक उदाहरण अष्टावक्र गीताके निम्न श्लोक हे -
एकं सर्वगतं व्योम बहिरन्तर्यथा घटे । नित्यं निरन्तरं ब्रह्म सर्वभूतगणे तथा ।।[5]
- जौन प्रकार एके सर्वव्यापक आकाश घड़ाके भीतरे आउ बाहिरे हे, ओही प्रकार सदा स्थिर (सदा विद्यमान) आउ सदा गतिमान (सदा रहेवाला) ब्रह्म सब भूतमे हे ।
तज्ज्ञस्य पुण्यपापाभ्यां स्पर्शो ह्यन्तर्न जायते । न ह्याकाशस्य धूमेन दृश्यमानापि सङ्गतिः ।।४- ३।।[6]
- ओकरा (ब्रह्मके) जानेवाला अपन अन्तमे पाप आउ पुण्यके स्पर्श नै करे, ई ऐसने हे जैसे ऊपरेसे केत्ते प्रतीत होवे किन्तु वास्तवमे धुआँ कखनियो आकाशके स्पर्श नै करे ।
सन्दर्भ
[edit | edit source]- ↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 28 मई 2018 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 मई 2018.
- ↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 9 मई 2018 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 मई 2018.
- ↑ "Hindi Vilom Shabd for Sarkari Exam 2024:यहाँ चेक करें विभिन्न परीक्षाओं में पूंछे जानें वाले महत्वपूर्ण विलोम शब्द". Jagranjosh.com (Hindi मे). 2024-07-12. अभिगमन तिथि 2025-09-18.
- ↑ और पढ़ें
- ↑ अष्टावक्र गीता, भाग १, श्लोक-२०
- ↑ अष्टावक्र गीता, भाग ४, श्लोक-३