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Wp/mag/अश्वत्थामा

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अश्वत्थामा
महाभारत पात्र
अश्वत्थामा
अश्वत्थामा नारायणस्त्रके प्रयोग करैत
अन्यनामद्रोणपुत्र, कृपि नन्दन, मणिधर, दुर्योधनसखा
कहानीमे जानकारी
परिवारद्रोणाचार्य (पिता) आउ कृपी माता

अश्वत्थामा प्राचीन हिन्दु महाकाव्य महाभारतके एक पात्र हे । ऊ द्रोणके पुत्र हे जे कुरु राजकुमार पाण्डव आउ कौरवके राजगुरु हलन । अश्वत्थामा कौरवके नेता दुर्योधनके घनिष्ठ साथी हे आउ अपन पिताके संरक्षणमे कुरु राजकुमारके साथ सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करहे ।

महाभारत युद्धसे पहिले गुरु द्रोणाचार्य अनेक स्थानमे भ्रमण करैत हिमालय (ऋषिकेश) पहुँचलन । ओहाँ तमसा नदीके तट पर एक दिव्य गुफामे तपेश्वर नामक स्वयंभू शिवलिङ्ग है । एहाँ गुरु द्रोणाचार्य आउ उनकर पत्नी माता कृपि शिवके तपस्या कैलन । इनकर तपस्यासे प्रसन्न होके भगवान शिव इनका पुत्र प्राप्तिके वरदान देलन । कुछ समय पश्चात् माता कृपि एक सुन्दर तेजश्वी बालकके जनम देलन । जन्म ग्रहण करतहीँ इनकर कण्ठसे हिनहिनाएके ध्वनि होलै जेकरासे इनकर नाम अश्वत्थामा पड़लै । जन्मेसे अश्वत्थामाके मस्तकमे एक अमूल्य मणि विद्यमान हलै जे कि उनका दैत्य, दानव, शस्त्र, व्याधि, देवता, नाग आदिसे निर्भय रखऽ हलै । ऊ मणि अश्वत्थामाके बुढ़ापा, भूख, प्यास आउ थकानोसे बचावऽ हलै । भगवान शिवसे प्राप्त ऊ शक्तिशाली दिव्य मणि अश्वत्थामाके लगभग अजेय आउ अमर बना देलकै हल ।

सन्दर्भ

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