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Wp/mag/अभिमन्यु

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अभिमन्यु
अभिमन्यु उत्तरा साथे
पूर्ववर्तीअर्जुन
उत्तरवर्तीपरीक्षित
जन्म<
निधन१६ वर्षके आयुमे
कुरुक्षेत्र
जीवनसङ्गीउत्तरा आउ वत्सला
सन्तानपरीक्षित
पूरा नाम
अभिमन्यु
घरानायदुकुल
पिताअर्जुन (आध्यात्मिक पिता), चन्द्र (वास्तविक पिता)
मातासुभद्रा
धर्महिन्दु

भारतवर्षके प्राचीन कालके ऐतिहासिक कथा महाभारतके एक महत्त्वपूर्ण पात्र अभिमन्यु पूरु कुलके राजा आउ पाण्डवमे से धनुर्धर अर्जुन आउ राजकुमारी सुभद्राके पुत्र हलन । श्रीकृष्ण आउ बलरामजी उनकर मामा आउ गुरु हलन । विराट नरेशके पुत्री राजकुमारी उत्तरा अभिमन्युके पत्नी हलन जिनकर पुत्र परीक्षित सम्पूर्ण भारतवर्षमे चक्रवर्ती नरेशके रूपमे शासन कैलन हल । कथामे उनकर छल आउ अधर्म द्वारा कारुणिक अन्त बतावल गेलै हे किन्तु अभिमन्यु जैसन ख्याति कौनो अन्य महाभारत योद्धाके न भेट सके । अभिमन्यु महाभारत कालके सर्वश्रेष्ठ योद्धामे से एक हथिन आउ सबसे कम आयुके सर्वश्रेष्ठ योद्धा हथिन । अभिमन्युके द्वन्द् युद्धमे हरावल असम्भव मानल जा हलै ।[1][निमन स्रोत वाञ्छित]

१५ वर्षके आयुमे फाल्गुन मासमे उनकर विवाह उत्तरासे होलै हल । १६ वर्षके आयुमे आषाढ़ मासमे जौन दिन ई महाभारतके युद्धमे वीरगतिके प्राप्त होलन हल ओकरासे एक दिन पहिलहीँ अभिमन्युके पत्नी उत्तरा गर्भधारण कैलन हल । द्वापर युगमे सबसे कम आयुमे स्त्रीके शारीरिक सुख आउ सन्तान जन्मके प्राप्ति करे वाली ई इकलौता हलन ।

जन्म

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अभिमन्युके जन्म तीसरा पाण्डव अर्जुनके सबसे निमन मित्र श्रीकृष्णके बहिन सुभद्रासे होलै हल । पाण्डवके पासाके खेल हारेके बाद द्रौपदीके साथे सब पाण्डवके १३ सालला वनवास भेज देल गेलै हल । ई अवधि खनि सुभद्रा अपन भाई सब साथे द्वारकामे रहलन, जने ऊ अपन परिवारके सदस्यके साथे अभिमन्युके परवरिश कैलन । उनका प्रद्युम्न, बलराम आउ कृष्ण द्वारा हथियार आउ युद्धमे प्रशिक्षित कैल गेलै हल । अभिमन्युके बलराम रौद्र धनुष देलन हल ।

पाण्डव द्वारा वनवास समाप्त करेके बाद दुर्योधन उनकर धन आउ भाग्यके वापिस करेला सहमत न होलै । ई प्रकार पाण्डवके अपन अधिकार वापिस पावेला एक लड़ाई लड़े पड़लै ।[2]

लोककथाके अनुसार जखनि अभिमन्यु अपन मायके गर्भमे हलन, ऊ चक्रव्यूहके बारेमे सुनलन आउ चक्रव्यूहमे प्रवेश करेला आधा ज्ञान प्राप्त कैलन ।[3] हालाँकि महाकाव्यमे अभिमन्यु अर्जुनसे चक्रव्यूहमे प्रवेश कैल सीखऽ हथिन ।[4]

विवाह

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कुरुक्षेत्रके युद्धसे पहिले पाण्डव मत्स्य साम्राज्यके राजा विराटके साथे रहलन । ऊ अर्जुनसे अपन पुत्री उत्तरासे बियाह करेला कहलन, किन्त अर्जुन उनकासे बियाह करेसे मना कर देलन, काहेकि ऊ आज्ञावास खनि उनकर शिक्षक हलन । हालाँकि ऊ अभिमन्युके साथे उत्तराके बियाहके प्रस्ताव रखलन । अभिमन्यु उनचासे बियाह करेला तैयार हो गेलन आउ ऊ उपप्लव्य नगरमे बियाह कर लेलन ।[5] उत्तरा बादमे एक बेटाके साथे गर्भवती होइलन ।[6]

शशिरेखा परिनयम नामक एक लोककथाके अनुसार अभिमन्यु उत्तरासे बियाह करेसे पहिले बलरामके पुत्री शशिर्खासे बियाह कैलन हल । मूल महाकाव्यमे ई घटनाके कौनो प्रमाण न है आउ स्थानीय मौखिक परम्परा सब एकरा विकसित करऽ है । कहानी बतावऽ है कि अभिमन्युके वत्सलासे प्रेम हो गेलै, किन्तु वत्सलाके पिता बलराम चाहऽ हलथिन कि ऊ दुर्योधनके पुत्र लक्ष्मण कुमारसे बियाह करे, अपन चचेरा भाईके सहयोग करेला घटोत्कच वत्सलाके रूप धारण कर लेलकै आउ लक्ष्मण कुमारके हाथके घायल कर देलकै । घटनाके बाद लक्ष्मण वत्सलासे अपन बियाह तोड़ देलक । ई बीच असली वत्सला अभिमन्युके साथे एक जङ्गलमे हलन जेने ऊ बियाह कैलन हल ।[7]

कुरुक्षेत्र युद्ध

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युद्धमे अभिमन्यु अपन पिता दनेसे लड़लन । युवा होवेके बावजूदो ऊ युद्धमे बड़ बहादुरीके परिचय देलन । ऊ रुक्मार्थ, बृहदबाला, लक्ष्मण (दुर्योधनके पुत्र), दुष्मनारा (दुष्यसनके दोसरा पुत्र), छौ परामर्शदाता आउ कर्णके सात पालक भाई, शल्यके पुत्र, आदि सहित योद्धा सबके मार देलन ।[8]द्रोण, कर्ण, अश्वत्थामा, कृपा, शल्य, दुर्योधन, दुशासन, वृषभसेन आदि सहित ढेर शक्तिशाली योद्धोसे लड़ाई लड़लन आउ उनकर विरोध कैलन ।

वीरगति

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चक्रव्यूहमे फँसल अभिमन्यु

युद्धके १३मा दिन अर्जुनके शर्मा आउ त्रिगर्त द्वारा दक्षिण दने मोड़ देल गेलै हल । उनकर अनुपस्थितिके फायदा उठाके दुर्योधन आउ ओकर सहयोगिय सब युधिष्ठिरके फँसावेके योजना बनैलक ताकि युद्धके जल्दीसे रोकल जा सके बिना ढेर सेनाके गवैले । कौरवके सेना द्रोणाचार्यके नेतृत्वमे चक्रव्यूहके निर्माण कैलक । अभिमन्यु एकरामे प्रवेश कैल जानऽ हलथिन किन्तु बाहरे निकलल न जानऽ हलन । ऊ जालमे चल गेलन, ओकराके बाद उनकर मामा । चक्रव्यूहके किनार भिरु अभिमन्यु दुर्योधनके पुत्र लक्ष्मणके मार देलन । अपन बेटाके हत्यासे नाराज दुर्योधन द्रोणाचार्यके अभिमन्युके मारेके योजना बदलेके आदेश देलक, किन्तु शेष चार पाण्डव अभिमन्युके पीछा कैलन । हालाँकि चारो पाण्डवके जयद्रथ रोक देलकै हल । जयद्रथ ऊ चारोके हरौलक; द्रुपदोके रोकके फँसा देल गेलै । अश्वत्थामा आउ कृतवर्मा अभिमन्युके अकेले छोड़के धृष्टद्युम्न आउ उपपाण्डवके हरौलन । केन्द्र पर पहुँचेसे पहिले अभिमन्यु रुखमर्थ, बृहदबाला, शॉन आदि जैसन ढेर अन्य योद्धाके मार देलन । अभिमन्यु जालके केन्द्रमे पहुँचेके बाद, उनका पर द्रोण, दुशासन, अश्वत्थामा, कर्ण, शकुनि, दुर्योधन कृपा, कृतवर्मा वृषभसेन आउ द्रुमसेना द्वारा हमला कैल गेलै आउ ढेर अन्य योद्धा सेनाके एक छोट दलके साथे भीतरे पहुँचलै । ऊ ओकरासे घोर लड़ाई लड़लन आउ ऊ सब उनका मार देलक ।[9] [10]

सन्दर्भ

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  1. "The Mahabharata, Book 1: Adi Parva: Sambhava Parva: Section LXVII". मूलसे 25 October 2017 के पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 जनवरी 2016.
  2. Mani 2015.
  3. "Abhimanyu and the Battle of Kurukshetra". Radha Krishna Temple in Utah. 2009-11-29. अभिगमन तिथि 2020-08-09.
  4. Vyasa, Krishna-Dwaipayana (2014-03-25). THE MAHABHARATA of Krishna-Dwaipayana Vyasa: Complete 18 Parvas. Darryl Morris.
  5. Abhimanyu. Amar Chitra Katha Private Limited. April 1971. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 9788184821062.
  6. Chakravarti 2007.
  7. Indrajit Bandyopadhyay (29 October 2008), "A Study In Folk "Mahabharata": How Balarama Became Abhimanyu's Father-in-law", Epic India: A New Arts & Culture Magazine, मूल से 17 February 2012 के पुरालेखित
  8. "Abhimanyu and the Battle of Kurukshetra". 29 November 2009.
  9. Chakravarti, Bishnupada (2007-11-13). Penguin Companion to the Mahabharata. Penguin UK. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-93-5214-170-8.
  10. Mani, Vettam (2015-01-01). Puranic Encyclopedia: A Comprehensive Work with Special Reference to the Epic and Puranic Literature. Motilal Banarsidass. आई॰ऍस॰बी॰एन॰ 978-81-208-0597-2.