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Wn/hi/भारत सरकार ने ई-बस संचालन के लिए भुगतान सुरक्षा तंत्र के तहत 500 करोड़ रुपये जारी किए

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डीएमआरसी इलेक्ट्रिक फीडर बस - पार्श्व दृश्य

नई दिल्ली, भारत — भारत सरकार ने 'पीएम ई-बस सेवा' और 'पीएम ई-ड्राइव' योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बस ऑपरेटरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 'भुगतान सुरक्षा तंत्र' (पीएसएम) के तहत 500 करोड़ रुपये जारी किए हैं। 17 मार्च 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने यह जानकारी दी। यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) को पहली किश्त के रूप में दी गई है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और बस ऑपरेटरों के लिए भुगतान जोखिम को कम करना है।

वर्तमान स्थिति

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लोकसभा में प्रस्तुत किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 अक्टूबर 2024 को इस पीएसएम योजना की अधिसूचना जारी की गई थी। 12 मार्च 2026 तक 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस योजना में भाग लेते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास अपना डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (डीडीएम) जमा कर दिया है। इस तंत्र के तहत यदि कोई राज्य परिवहन प्राधिकरण (पीटीए) ऑपरेटरों को भुगतान करने में विफल रहता है, तो पीएसएम फंड से उसका भुगतान किया जाएगा।

ई-बसों का आवंटन और निविदा

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आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) तथा भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) के अंतर्गत बसों के आवंटन और निविदा की प्रक्रिया जारी है। पीएम ई-बस सेवा के तहत 28 फरवरी 2026 तक 6,228 बसों की निविदाएं पूरी की गई हैं, जिनमें से 4,720 बसों के लिए आवंटन पत्र जारी किए जा चुके हैं। वहीं, पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 10,900 बसों की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 2,900 अतिरिक्त बसों के लिए प्रक्रिया अभी जारी है।

सीईएसएल की भूमिका और नियम

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कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) इस योजना के लिए केंद्रीय कार्यान्वयन एजेंसी है, जो 500 करोड़ रुपये के पीएसएम फंड का प्रबंधन कर रही है। यह ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल के तहत संचालित होता है।

नियमों के अनुसार, यह योजना प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस के लिए 12 साल तक की भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है। यदि पीएसएम फंड से किसी ऑपरेटर को भुगतान किया जाता है, तो संबंधित राज्य को विलंब भुगतान अधिभार (एलपीएस) के साथ 90 दिनों के भीतर वह राशि फंड में वापस लौटानी होगी।

स्रोत

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