Wn/hi/केंद्र सरकार की साइबर अपराध पर बड़ी कार्रवाई: I4C और 'प्रतिबिंब' ऐप से बचाए गए 8,690 करोड़ रुपये
नई दिल्ली, 11 मार्च 2026 — भारत में साइबर अपराधों और डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम कसने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) के नेतृत्व में चलाए जा रहे देशव्यापी अभियानों के तहत अब तक भारतीय नागरिकों के 8,690 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी होने से बचाई गई है।
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए कई नए प्लेटफॉर्म और दिशा-निर्देश लागू किए हैं, जिनसे अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा रहा है।
8,690 करोड़ रुपये की बचत और हेल्पलाइन '1930'
[edit | edit source]सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 जनवरी 2026 तक 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (CFCFRMS) और राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन '1930' पर दर्ज 24.65 लाख से अधिक शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की गई है। वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग के कारण यह विशाल धनराशि साइबर ठगों के खातों में जाने से पहले ही फ्रीज (Freeze) कर ली गई। इसके अलावा, आम जनता को अपनी शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा देने के लिए 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (cybercrime.gov.in) भी सुचारू रूप से कार्य कर रहा है, जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
साइबर बुनियादी ढांचे पर प्रहार
[edit | edit source]सरकार ने साइबर अपराधियों के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर, 31 जनवरी 2026 तक भारत सरकार ने 12.94 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल सिम कार्ड और 3.03 लाख हैंडसेट (IMEI) को ब्लॉक कर दिया है।
इसके साथ ही, I4C ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10 सितंबर 2024 को एक 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' (संदिग्धों का रजिस्टर) भी शुरू किया था, जिसके तहत अब तक 27.37 लाख 'लेयर-1 म्यूल खातों' (धोखाधड़ी के पैसे मंगाने वाले बैंक खाते) की पहचान कर 9,518 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन को रोका गया है।
बैंकों के साथ रियल-टाइम API एकीकरण और CFMC
[edit | edit source]साइबर सुरक्षा के इस तंत्र को और अधिक मजबूत व तेज बनाने के लिए सरकार ने बैंकों और NCRP के CFCFRMS मॉड्यूल के बीच 'एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस' (API) एकीकरण लागू किया है। यह रियल-टाइम (real-time) संचार को सक्षम बनाता है, जिससे संदिग्ध खातों पर तुरंत रोक (Lien marking) लगाई जा सकती है।
इसके अतिरिक्त, नई दिल्ली स्थित I4C मुख्यालय में एक अत्याधुनिक 'साइबर फ्रॉड मिटीगेशन सेंटर' (CFMC) स्थापित किया गया है। इस केंद्र में प्रमुख बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, पेमेंट एग्रीगेटर्स, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टेलीकॉम कंपनियों) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि एक ही छत के नीचे बैठकर काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी डिजिटल ठगी की शिकायत मिलने पर बिना समय गंवाए तत्काल संयुक्त कार्रवाई की जा सके।
'प्रतिबिंब' ऐप और नई एसओपी (SOP)
[edit | edit source]दृष्टि आईएएस (Drishti IAS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधियों को पकड़ने में उन्नत डिजिटल पुलिसिंग टूल 'प्रतिबिंब' (Pratibimb) एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह एक मानचित्रण (Mapping) मॉड्यूल है जो पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को धोखेबाजों द्वारा उपयोग किए जा रहे मोबाइल नंबरों और उनके ठिकानों की स्पष्ट दृश्यता (visibility) प्रदान करता है।
इन सभी प्रयासों को एक सुव्यवस्थित रूप देने के लिए, केंद्र सरकार ने 2 जनवरी 2026 को एक व्यापक 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) भी जारी की है। यह SOP पूरे देश में साइबर शिकायतों को संभालने के लिए एक समान और पीड़ित-केंद्रित (victim-centric) ढांचा प्रदान करती है। क्षमता निर्माण के तहत 1.5 लाख से अधिक पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को साइबर अपराधों से निपटने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
स्रोत
[edit | edit source]- साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार के कदम: 12.94 लाख सिम कार्ड और 3.03 लाख IMEI ब्लॉक — पत्र सूचना कार्यालय (PIB), 11 मार्च 2026
- प्रतिबिंब प्लेटफॉर्म: साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए उन्नत डिजिटल पुलिसिंग टूल — दृष्टि आईएएस (Drishti IAS), 29 नवंबर 2025